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बरमकेला बस स्टैंड का सामुदायिक शौचालय बना बदहाली का प्रतीक, गंदगी और बदबू से यात्री परेशान.
सारंगढ़-बिलाईगढ़//
स्वच्छता और बेहतर सुविधाओं के दावों के बीच बरमकेला बस स्टैंड स्थित सामुदायिक शौचालय की हालत बद से बदतर हो चुकी है। रोजाना सैकड़ों यात्रियों और स्थानीय लोगों द्वारा उपयोग किए जाने वाला यह शौचालय अब गंदगी, बदबू और अव्यवस्थाओं का केंद्र बन गया है। हालत ऐसी है कि लोग मजबूरी में शौचालय का उपयोग तो कर रहे हैं, लेकिन अंदर जाते ही नाक बंद करने को मजबूर हो रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि शौचालय में लंबे समय से नियमित सफाई नहीं हो रही है। कई जगहों पर गंदा पानी जमा है, सीटें टूटी हुई हैं और परिसर में इतनी दुर्गंध फैली रहती है कि कुछ मिनट खड़ा रहना भी मुश्किल हो जाता है। बस स्टैंड में बाहर से आने वाले यात्रियों पर इसका गलत असर पड़ रहा है और नगर पंचायत की व्यवस्थाओं पर सवाल उठने लगे हैं।
महिलाओं और बुजुर्गों को सबसे ज्यादा परेशानी
बस स्टैंड में हर दिन बड़ी संख्या में महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग आते-जाते हैं, लेकिन शौचालय की खराब स्थिति के कारण उन्हें भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। महिलाओं ने बताया कि शौचालय के अंदर सफाई की कोई व्यवस्था नहीं है, कई बार पानी भी उपलब्ध नहीं रहता। इससे लोग मजबूरी में खुले स्थानों का सहारा लेने को मजबूर हो रहे हैं।
जर्जर भवन बना खतरा
सिर्फ गंदगी ही नहीं, बल्कि शौचालय भवन की स्थिति भी चिंताजनक हो गई है। दीवारों में दरारें दिखाई दे रही हैं और कई हिस्सों का प्लास्टर टूट चुका है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते मरम्मत नहीं कराई गई तो कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। नगर पंचायत द्वारा लाखों रुपये खर्च कर बनाए गए इस सामुदायिक शौचालय की देखरेख पूरी तरह लापरवाही की भेंट चढ़ती नजर आ रही है।
लोगों में नाराजगी, कार्रवाई की मांग
स्थानीय नागरिकों और यात्रियों ने नगर पंचायत प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए जल्द सफाई व्यवस्था दुरुस्त करने की मांग की है। लोगों का कहना है कि स्वच्छता अभियान सिर्फ पोस्टरों और भाषणों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि जमीन पर भी दिखाई देना चाहिए। अब देखना होगा कि नगर पंचायत प्रशासन इस गंभीर समस्या पर कब तक ध्यान देता है या फिर बस स्टैंड का यह शौचालय यूं ही बदबू और बदहाली का केंद्र बना रहेगा।
मोदी सरकार का इमरजेंसी अलर्ट सिस्टम! मोबाइल पर बजा ‘खतरे का सायरन’, घबराएं नहीं- ये सुरक्षा की तैयारी है
-:मोदी सरकार का इमरजेंसी अलर्ट सिस्टम! मोबाइल पर बजा ‘खतरे का सायरन’, घबराएं नहीं- ये सुरक्षा की तैयारी है:-
छत्तीसगढ़ सहित देशभर में अचानक मोबाइल फोन पर तेज सायरन जैसी आवाज के साथ एक इमरजेंसी अलर्ट पहुंचने से लोग चौंक गए। कई लोगों ने इसे खतरे का संकेत समझ लिया, लेकिन यह दरअसल केंद्र सरकार द्वारा किए जा रहे एक बड़े सुरक्षा अभ्यास का हिस्सा है। दूरसंचार विभाग और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) मिलकर सेल ब्रॉडकास्ट सिस्टम की टेस्टिंग कर रहे हैं, ताकि आपदा के समय लोगों तक तुरंत और प्रभावी सूचना पहुंचाई जा सके।
Emergency Alert System: क्या है यह इमरजेंसी अलर्ट?
यह अलर्ट एक विशेष प्रकार का संदेश है, जो तेज ध्वनि और वाइब्रेशन के साथ मोबाइल स्क्रीन पर फ्लैश होता है। इसका उद्देश्य किसी संभावित आपदा या खतरे की स्थिति में लोगों को तुरंत सतर्क करना है। फिलहाल यह केवल परीक्षण (टेस्टिंग) के तौर पर भेजा गया है।
घबराने की जरूरत नहीं, यह सिर्फ टेस्टिंग है
सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह कोई वास्तविक खतरा नहीं है। यह केवल यह जांचने के लिए किया जा रहा है कि भविष्य में किसी आपात स्थिति में अलर्ट सिस्टम सही तरीके से काम करता है या नहीं। इसलिए नागरिकों से अपील की गई है कि वे इस तरह के संदेश से घबराएं नहीं।
सेल ब्रॉडकास्ट टेक्नोलॉजी क्या है?
सेल ब्रॉडकास्ट एक आधुनिक संचार तकनीक है, जिसके जरिए एक साथ किसी विशेष क्षेत्र के सभी मोबाइल फोन पर अलर्ट भेजा जा सकता है। यह SMS की तरह एक-एक नंबर पर निर्भर नहीं करता, बल्कि सीधे मोबाइल टॉवर से प्रसारित होता है, जिससे संदेश तुरंत पहुंचता है।
SMS से कैसे अलग है यह सिस्टम?
पहले आपदाओं से जुड़े संदेश SMS के जरिए भेजे जाते थे, लेकिन इसमें देरी या नेटवर्क जाम की समस्या हो सकती थी। खासकर बिजली गिरना, सुनामी या गैस लीक जैसी आपात स्थितियों में समय बेहद महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में सेल ब्रॉडकास्ट टेक्नोलॉजी ज्यादा प्रभावी साबित होती है क्योंकि यह बिना देरी के एक साथ सभी तक पहुंचती है।
स्वदेशी तकनीक C-DOT की बड़ी उपलब्धि
इस अत्याधुनिक तकनीक को सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ टेलीमैटिक्स (C-DOT) द्वारा विकसित किया गया है। यह पूरी तरह स्वदेशी प्रणाली है, जो भारत की डिजिटल सुरक्षा क्षमताओं को मजबूत करती है। इसकी खास बात यह है कि यह कमजोर नेटवर्क में भी काम कर सकती है और सीधे टॉवर से मोबाइल तक अलर्ट पहुंचाती है।
आपदा प्रबंधन में होगा बड़ा बदलाव
इस तकनीक के लागू होने से भविष्य में किसी भी प्राकृतिक या मानवजनित आपदा के दौरान लोगों को समय पर चेतावनी मिल सकेगी। इससे जान-माल के नुकसान को काफी हद तक कम करने में मदद मिलेगी।
महिलाओं के अधिकारों की सशक्त आवाज बनीं अमृता सिंह, राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ाया मान
इंदौर। मध्य प्रदेश के इंदौर शहर की रहने वाली अमृता सिंह आज महिलाओं के लिए एक प्रेरणादायक व्यक्तित्व के रूप में उभरकर सामने आई हैं। समाजसेवा और मानवाधिकार के क्षेत्र में उनके द्वारा किए गए निरंतर प्रयासों ने उन्हें एक मजबूत पहचान दिलाई है। विशेष रूप से महिलाओं के अधिकारों, कानूनी संरक्षण और पारिवारिक विवादों के समाधान में उनकी सक्रिय भूमिका सराहनीय रही है।
अमृता सिंह ने समाज के विभिन्न वर्गों में जाकर महिलाओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक किया है। उन्होंने कई जटिल पारिवारिक मामलों को काउंसलिंग के माध्यम से सुलझाकर न केवल परिवारों को टूटने से बचाया, बल्कि समाज में सकारात्मक संदेश भी दिया। उनके इस प्रयास ने उन्हें एक संवेदनशील और प्रभावशाली सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में स्थापित किया है।
वर्तमान में अमृता सिंह राष्ट्रीय मानवाधिकार एवं अपराध नियंत्रण ब्यूरो में राष्ट्रीय सचिव के पद पर कार्यरत हैं। इस पद पर रहते हुए उन्होंने मानवाधिकार संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया है। वर्षों से लगातार इस जिम्मेदारी को निभाते हुए वे जरूरतमंदों की आवाज बनकर सामने आई हैं और हर संभव सहायता प्रदान करने के लिए तत्पर रहती हैं।
उनकी कार्यशैली में टीमवर्क की विशेष झलक देखने को मिलती है। उनके नेतृत्व में कई ऐसे अभियान चलाए गए हैं जो महिलाओं के सशक्तिकरण और सम्मान को बढ़ावा देते हैं। यही कारण है कि वे समाज के विभिन्न वर्गों के लिए एक आदर्श बन चुकी हैं।
हाल ही में नेपाल में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम में, जिसे इंडो नेपाल टूरिज्म वेलफेयर सोसाइटी द्वारा आयोजित किया गया था, अमृता सिंह को उनके उत्कृष्ट कार्यों के लिए सम्मानित किया गया। इस कार्यक्रम में नेपाल के मंत्रिमंडल के सदस्य, बिहार के सांसद तथा अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। समारोह के दौरान अमृता सिंह के योगदान की सराहना करते हुए उनके लिए एक विशेष घोषणा भी की गई, जो उनके बढ़ते प्रभाव और सम्मान का प्रतीक है।
अमृता सिंह का जीवन और कार्य यह दर्शाता है कि यदि समर्पण और सेवा की भावना सच्ची हो, तो व्यक्ति समाज में बड़ा परिवर्तन ला सकता है। उनके प्रयास न केवल महिलाओं के लिए प्रेरणा हैं, बल्कि पूरे समाज के लिए एक सकारात्मक दिशा भी प्रदान करते हैं।
किसान कि जीविक मे आग ! सारंगढ़ वन विभाग की कार्यवाही ने,मशरूम खेती को बनाया राख - किसानों में आक्रोश
सारंगढ़ बिलाईगढ़
सारंगढ़ वन विभाग की कार्यवाही से किसानों में भारी नाराज़गी देखने को मिल रही है। बताया जा रहा है कि एक किसान द्वारा मशरूम खेती के लिए लगभग 50 से 60 ट्रैक्टर पैरा यानी पराली इकट्ठा किया गया था, जिसे वन विभाग की टीम ने अवैध कब्जा हटाने के नाम पर देर रात आग के हवाले कर दिया। इस घटना से किसान को भारी नुकसान हुआ है और पूरे क्षेत्र में आक्रोश का माहौल है।वन विभाग के अधिकारी और कर्मचारी देर रात करीब 12 से 1 बजे के बीच मौके पर पहुंचे और बिना किसी पूर्व सूचना के पैरा में आग लगा दी।
ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन ने बिना वैकल्पिक व्यवस्था किए यह कार्यवाही की, जो पूरी तरह अनुचित है। किसान का कहना है कि अगर आग हवा के साथ उनके घरों की ओर फैल जाती, तो एक बड़ा हादसा हो सकता था। इससे न सिर्फ उनकी संपत्ति बल्कि आसपास के लोगों की जान भी खतरे में पड़ सकती थी। घटना के बाद से ग्रामीणों में भारी नाराज़गी है और प्रशासन की इस कार्यवाही पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
मानव गरिमा से सामाजिक न्याय तक: NHRCCB द्वारा “Universal Declaration of Human Rights” विषय पर राष्ट्रीय वेबिनार संपन्न
नई दिल्ली/भारत।
राष्ट्रीय मानवाधिकार एवं अपराध नियंत्रण ब्यूरो (NHRCCB) द्वारा दिनांक 12 अप्रैल 2026 को “Universal Declaration of Human Rights” विषय पर आयोजित राष्ट्रीय स्तर का ऑनलाइन वेबिनार केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि विचार, संवेदना और उत्तरदायित्व का एक जीवंत मंच बनकर उभरा। यह आयोजन उस मूल प्रश्न को पुनः सामने लाता है कि—क्या मानवाधिकार केवल कानून की धाराओं में सीमित हैं, या वे समाज की आत्मा और व्यवहार में भी प्रतिबिंबित होने चाहिए?
वेबिनार के मुख्य वक्ता , माननीय राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. रणधीर कुमार ने अपने उद्बोधन में कहा कि मानवाधिकारों की अवधारणा किसी एक राष्ट्र या समय की देन नहीं, बल्कि मानव सभ्यता की सतत चेतना का परिणाम है। उन्होंने इस बात पर गहन प्रकाश डाला कि यदि अधिकारों की चर्चा कर्तव्यों से अलग हो जाए, तो संतुलन भंग हो जाता है और वहीं से अन्याय की शुरुआत होती है। उनके शब्दों में—“मानवाधिकार केवल संरक्षण का विषय नहीं, बल्कि आत्मानुशासन और सामाजिक उत्तरदायित्व का भी दर्पण हैं।”
उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि अपराध नियंत्रण और मानवाधिकार एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि परस्पर पूरक तत्व हैं, जिनके बीच संतुलन ही एक न्यायपूर्ण व्यवस्था की नींव रखता है। पीपीटी के माध्यम से मानव अधिकार के सार्वभौमिक घोषणापत्र को बेहद ही सरलतापूर्वक समझाया एवं इसके 30 अनुच्छेद पर विस्तार पूर्वक जानकारी दी ।
वेबिनार में विशिष्ट अतिथि के रूप में हरियाणा प्रदेश अध्यक्ष श्री मोहिंदर पाल धानिया ने अपने विचार रखते हुए कहा कि समाज में अधिकारों की वास्तविक सुरक्षा केवल कानून से नहीं, बल्कि जागरूक नागरिकता और नैतिक आचरण से सुनिश्चित होती है। उन्होंने अपने अनुभवों के माध्यम से यह स्पष्ट किया कि जब समाज का प्रत्येक व्यक्ति अपने व्यवहार में संवेदनशीलता और समानता को स्थान देता है, तभी मानवाधिकारों की वास्तविक भावना जीवंत होती है।
वेबिनार का संचालन राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर द्वारा अत्यंत संतुलित एवं प्रभावी ढंग से किया गया, जिसमें देश के विभिन्न राज्यों से जुड़े पदाधिकारी, सामाजिक कार्यकर्ता एवं जागरूक नागरिक बड़ी संख्या में जुड़े। चर्चा के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि आज के डिजिटल और बदलते सामाजिक परिवेश में मानवाधिकारों की परिभाषा और भी व्यापक हो गई है—अब यह केवल शारीरिक सुरक्षा तक सीमित नहीं, बल्कि गरिमा, अभिव्यक्ति, निजता और समान अवसरों से भी गहराई से जुड़ा हुआ विषय है।
प्रश्नोत्तर सत्र में व्यावहारिक प्रश्नों ने इस विमर्श को और अधिक यथार्थपरक बना दिया। इसमें यह बात उभरकर सामने आई कि मानवाधिकारों का वास्तविक परीक्षण न्यायालयों में नहीं, बल्कि समाज के दैनिक व्यवहार—परिवार, कार्यस्थल और सार्वजनिक जीवन—में होता है।
वेबिनार के दौरान यह भी रेखांकित किया गया कि मानवाधिकारों की रक्षा केवल कानूनों के माध्यम से संभव नहीं है, बल्कि इसके लिए समाज के प्रत्येक व्यक्ति की जागरूकता, संवेदनशीलता एवं जिम्मेदारी भी उतनी ही आवश्यक है।
अंत में सभी प्रतिभागियों से आह्वान किया गया कि वे अपने-अपने क्षेत्र में मानवाधिकारों के प्रति जागरूकता फैलाने में सक्रिय भूमिका निभाएँ तथा आगामी अंबेडकर जयंती के अवसर पर संविधान एवं मानवाधिकारों के प्रचार-प्रसार हेतु कार्यक्रम आयोजित करें।
यह वेबिनार न केवल ज्ञानवर्धक रहा, बल्कि मानवाधिकारों के प्रति समाज में जागरूकता एवं जिम्मेदारी की भावना को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सिद्ध हुआ।
राष्ट्रीय कार्यालय
राष्ट्रीय मानवाधिकार एवं अपराध नियंत्रण ब्यूरो (NHRCCB)
???? www.nhrccb.org
गेहूं के खेतों में लगी आग : देखते ही देखते जल गई 15 एकड़ फसल, किसानों की महीनों की मेहनत मिनटों में खाक
सारंगढ़ बिलाईगढ़ :-
छत्तीसगढ़ के सारंगढ़ जिले के सिटी कोतवाली थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत मौहाढोडा में हड़कंप मच गया। जब गेहूं की खड़ी फसल में अचानक भीषण आग लग गई। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप धारण कर लिया और करीब 10 से 15 एकड़ में फैली गेहूं की फसल जलकर पूरी तरह खाक हो गई।घटना के बाद गांव में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। आग की लपटें इतनी तेज थीं कि, किसानों के पास बचाव का कोई मौका नहीं रहा और उनकी महीनों की मेहनत पल भर में राख में तब्दील हो गई।
इस घटना से प्रभावित किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है।आग बुझाने का प्रयास जारी
सूचना मिलते ही दमकल विभाग की टीम मौके पर पहुंची और आग बुझाने का प्रयास लगातार जारी है। काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाने की कोशिश की जा रही है, हालांकि तब तक बड़ा नुकसान हो चुका था। फिलहाल, आग लगने के कारणों का पता नहीं चल सका है। प्रशासन द्वारा मामले की जांच की जा रही है।
मानवता के बड़े हित में युद्धविराम के लिए अंतरराष्ट्रीय जनसंपर्क समुदाय की अपील
नई दिल्ली, भारत - अंतरराष्ट्रीय जनसंपर्क समुदाय विश्व नेताओं से आग्रह करता है कि वे मानवता को प्राथमिकता दें और तत्काल युद्धविराम पर सहमत हों। युद्ध का मानव जीवन, वैश्विक संसाधनों और अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर विनाशकारी प्रभाव पड़ रहा है, जो एक सामूहिक चिंता का विषय है।
मुख्य चिंताएं:
- मानव जीवन की अपूरणीय हानि और आघात: युद्ध में निर्दोष लोगों की मौत हो रही है, परिवार टूट रहे हैं, और भविष्य की पीढ़ियों को स्थायी आघात पहुंच रहा है।
- वैश्विक अर्थव्यवस्था को अस्थिर करने वाले महत्वपूर्ण संसाधनों की कमी: युद्ध में पेट्रोलियम जैसे महत्वपूर्ण संसाधनों की कमी हो रही है, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था अस्थिर हो रही है और नागरिकों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
- अपरिवर्तनीय पर्यावरण क्षरण: युद्ध में पर्यावरण को गंभीर और स्थायी नुकसान पहुंच रहा है, जिससे वायु, जल और भूमि प्रदूषण हो रहा है और भविष्य में जीवन को चुनौतीपूर्ण बना रहा है।
- राष्ट्रों के बीच विश्वास का क्षरण, कूटनीति और शांति को बाधित करना: युद्ध में राष्ट्रों के बीच विश्वास टूट रहा है, जिससे कूटनीति और शांति की संभावना कम हो रही है।
कार्रवाई का आह्वान:
- तत्काल और स्थायी युद्धविराम
- मूल कारणों को संबोधित करने वाली सकारात्मक वार्ता
- विश्व नेताओं के बीच खुला और ईमानदार संवाद
अंतरराष्ट्रीय जनसंपर्क समुदाय का मानना है कि:
- संवाद और कूटनीति स्थायी समाधान के लिए आवश्यक हैं।
- विश्व नेताओं को मानवता के हित में युद्धविराम पर सहमत होना चाहिए।
- हमें शांति और सहयोग के लिए काम करना चाहिए।
डॉ. अजीत पाठक,
राष्ट्रीय अध्यक्ष, पब्लिक रिलेशन्स सोसाइटी ऑफ इंडि
सिकोसा में सीसी रोड का हुआ भूमि पूजन
बालोद।
गुण्डरदेही ब्लॉक के आदर्श ग्राम पंचायत सिकोसा में रेलवे कॉलोनी में विधायक निधि के माध्यम से पांच लाख के सीसी रोड का भूमि पूजन किया गया जिसमें क्षेत्र के जनपद सदस्य आसिफ गहलोत सरपंच प्रीतम ठाकुर उप सरपंच संजय बारले ग्राम विकास समिति के अध्यक्ष द्वारका बारले और प्रदीप निषाद विधायक प्रतिनिधि कुलेश्वर तिवारी पंचायत प्रतिनिधि पंच उमा चौरे दीपमाला गोयल रेणुका बारले चंद्रिका चंद्राकर और रोजगार सहायक नुलाम पटेल और वार्ड वासियों के सानिध्य में कार्य प्रारंभ हुआ
जिस वार्ड वासियों में ग्रामीणों में विकास कार्य के लिए खुशी व्यक्त की और आने वाले वक्त में ग्राम पंचायत सिकोसा में जन समस्या और आनेको विकास कार्य के लिए पंचायत प्रतिनिधि एवं क्षेत्र के जनप्रतिनिधि एवं क्षेत्र के विधायक के सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया
विकास कोसले बने गुरु घासीदास मिनीमाता सतनामी समाज समिति के जिला अध्यक्ष (युवा प्रकोष्ठ)
प्रदेश नेतृत्व ने जताया भरोसा; समाज के युवाओं में हर्ष की लहर
सारंगढ़-बिलाईगढ़:
गुरु घासीदास मिनीमाता सतनामी समाज समिति के प्रदेश नेतृत्व द्वारा संगठन का विस्तार करते हुए श्री विकास कोसले को जिला सारंगढ़-बिलाईगढ़ के युवा प्रकोष्ठ का जिला अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। विकास कोसले की सक्रियता और समाज के प्रति उनके समर्पण को देखते हुए प्रदेश नेतृत्व ने उन्हें यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी है।
प्रदेश नेतृत्व का निर्णय: समिति के उच्च पदाधिकारियों ने विश्वास व्यक्त किया है कि विकास कोसले के नेतृत्व में जिले के सतनामी समाज के युवा संगठित होंगे और बाबा गुरु घासीदास जी के बताए 'मनखे-मनखे एक समान' के संदेश को जन-जन तक पहुँचाने में सक्रिय भूमिका निभाएंगे।
नियुक्ति पर विकास कोसले का वक्तव्य: अपनी नियुक्ति पर आभार व्यक्त करते हुए नवनियुक्त जिला अध्यक्ष विकास कोसले ने कहा, "मुझ पर जो भरोसा प्रदेश नेतृत्व ने जताया है, मैं उस पर पूरी निष्ठा के साथ खरा उतरने का प्रयास करूँगा। मेरा मुख्य उद्देश्य जिले के युवाओं को एकजुट करना, समाज में शिक्षा और जागरूकता का प्रसार करना और बाबा जी के आदर्शों पर चलते हुए समाज के अंतिम व्यक्ति तक सहायता पहुँचाना है।"
समाज में हर्ष का माहौल: विकास कोसले की इस नियुक्ति से सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के सतनामी समाज के युवाओं और वरिष्ठ जनों में भारी उत्साह देखा जा रहा है। सोशल मीडिया और व्यक्तिगत रूप से उन्हें बधाई देने वालों का ताँता लगा हुआ है। समर्थकों का मानना है कि उनकी ऊर्जा और विजन से जिले में सामाजिक गतिविधियों को एक नई दिशा और गति मिलेगी
जिला पंचायत अध्यक्ष संजय भूषण पांडे ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सरसीवां का औचक निरीक्षण
सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिला पंचायत अध्यक्ष संजय भूषण पाण्डेय ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सरसीवा का औचक निरीक्षण किया, निरीक्षण के दौरान स्वास्थ्य केंद्र में उपलब्ध सुविधाओं, दवाइयों और समस्त व्यवस्थाओं का विस्तृत जायज़ा लिया।
सबसे पहले स्टाफ की उपस्थिति पंजी की जांच कर कर्मचारियों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित की। इसके बाद विभिन्न वार्डों का भ्रमण करते हुए भर्ती मरीजों की स्थिति एवं उन्हें मिल रही स्वास्थ्य सेवाओं की समीक्षा की। मरीजों से सीधे बातचीत कर उन्होंने उनकी समस्याओं और अनुभवों को समझा।
निरीक्षण के दौरान अस्पताल में उपलब्ध दवाइयों की भी जांच की गई। दवाओं की गुणवत्ता, उपलब्धता और एक्सपायरी तिथि की बारीकी से समीक्षा की गई। डॉक्टरों ने एंटीबायोटिक एवं एडवेंडजोल टैबलेट की कमी की जानकारी अध्यक्ष को दी।
इस मौके पर संजय भूषण पाण्डेय ने डॉक्टरों और समस्त स्टाफ को स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा,कि मरीजों को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो, यह सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित करने पर जोर देते हुए कहा कि किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
अबूझमाड़ की बेटियां: संरक्षण, सम्मान और सुरक्षा अधिकारों की नई उम्मीद
बस्तर (छत्तीसगढ़) से विशेष रिपोर्ट
छत्तीसगढ के बस्तर संभाग के घने जंगलों में स्थित अबूझमाड़ क्षेत्र आज भी देश के सबसे दूरस्थ और संवेदनशील इलाकों में गिना जाता है। यहां की आदिवासी महिलाएं वर्षों से सामाजिक, आर्थिक और भौगोलिक चुनौतियों के बीच अपने अस्तित्व और अधिकारों के लिए संघर्ष कर रही हैं।
कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में जीवन
अबूझमाड़ के गांव आज भी सड़क, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं से काफी हद तक वंचित हैं। महिलाएं रोजमर्रा के जीवन में जंगल पर निर्भर हैं—लकड़ी, महुआ, तेंदूपत्ता संग्रह कर परिवार का पालन-पोषण करती हैं।
लेकिन इन कठिन परिस्थितियों के बीच महिलाओं को सुरक्षा, स्वास्थ्य और सम्मान से जुड़े कई गंभीर मुद्दों का सामना करना पड़ता है।
लैंगिक उत्पीड़न: एक छिपी हुई समस्या
स्थानीय स्तर पर जानकारी के अनुसार, अबूझमाड़ क्षेत्र में महिलाओं के साथ होने वाले लैंगिक उत्पीड़न के कई मामले सामने नहीं आ पाते। इसके प्रमुख कारण हैं:
जागरूकता की कमी
पुलिस और प्रशासन तक सीमित पहुंच
सामाजिक दबाव और डर
शिक्षा का अभाव
कई बार महिलाएं घरेलू हिंसा, मानसिक प्रताड़ना और छेड़छाड़ जैसी घटनाओं को सहने के लिए मजबूर हो जाती हैं।
सुरक्षा और अधिकारों की चुनौतियां
महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने में कई बाधाएं हैं:
दूर-दराज क्षेत्रों में पुलिस चौकियों की कमी
त्वरित न्याय प्रक्रिया का अभाव
महिला हेल्पलाइन और सहायता सेवाओं की सीमित पहुंच
इन कारणों से महिलाएं अपने अधिकारों का उपयोग नहीं कर पातीं।
सकारात्मक पहल: बदलाव की दिशा में कदम
पिछले कुछ वर्षों में प्रशासन और सामाजिक संगठनों द्वारा कई सकारात्मक प्रयास किए गए हैं:
1. महिला जागरूकता अभियान
गांव-गांव में महिलाओं को उनके कानूनी अधिकारों और सुरक्षा उपायों के बारे में जानकारी दी जा रही है।
2. स्व-सहायता समूहों का गठन
महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए समूह बनाकर उन्हें छोटे व्यवसायों से जोड़ा जा रहा है।
3. स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार
मोबाइल हेल्थ यूनिट और आंगनबाड़ी सेवाओं के माध्यम से मातृ-शिशु स्वास्थ्य पर ध्यान दिया जा रहा है।
4. शिक्षा पर जोर
लड़कियों की शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए छात्रावास और आवासीय विद्यालय खोले जा रहे हैं।
प्रशासन और समाज की भूमिका
विशेषज्ञों का मानना है कि अबूझमाड़ की महिलाओं की स्थिति सुधारने के लिए केवल सरकारी योजनाएं पर्याप्त नहीं हैं। इसके लिए:
स्थानीय समुदाय की भागीदारी
शिक्षा और जागरूकता का विस्तार
महिलाओं के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण
अत्यंत आवश्यक है।
अबूझमाड़ की महिलाएं आज भी चुनौतियों से घिरी हुई हैं, लेकिन बदलते समय के साथ उनमें जागरूकता और आत्मविश्वास बढ़ रहा है। यदि सरकार, प्रशासन और समाज मिलकर प्रयास करें, तो यह क्षेत्र महिला सशक्तिकरण का एक मजबूत उदाहरण बन सकता है।
महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और अधिकार सुनिश्चित करना ही अबूझमाड़ के समग्र विकास की कुंजी है।
डॉ. जतिंदरपाल सिंह
जनगणना 2027: डिजिटल माध्यम से आंकड़ों का होगा संग्रहण जिला स्तरीय प्रशिक्षण का हुआ आयोजन स्वगणना वेब पोर्टल: नागरिक स्वयं मोबाईल के माध्यम से भर सकते हैं जानकारी
इमरान खोखर ब्यूरो चीफ मुंगेली
मुंगेली । जनगणना 2027 के अंतर्गत मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना के लिए जिला स्तरीय प्रशिक्षण का आयोजन किया गया। कलेक्टर कुन्दन कुमार के मार्गदर्शन में जिला कलेक्टोरेट स्थित मनियारी सभाकक्ष में आयोजित इस प्रशिक्षण में जनगणना कार्य से जुड़े अधिकारियों को विस्तृत जानकारी दी गई। प्रशिक्षण के दौरान जनगणना के उद्देश्य, कार्ययोजना, प्रगणकों एवं पर्यवेक्षकों की भूमिका और उत्तरदायित्व, भवनों तथा जनगणना मकानों की नंबरिंग, नक्शा तैयार करने की प्रक्रिया, मकान सूचीकरण और गणना से संबंधित प्रश्नों को भरने की विधि तथा स्व-गणना पद्धति के बारे में विस्तार से बताया गया।
जिला सांख्यिकी अधिकारी प्रीतेश अहिरवार ने बताया कि जनगणना 2027 में पहली बार डिजिटल माध्यम से आंकड़ों का संग्रहण किया जाएगा। नागरिक स्वयं स्वगणना वेब पोर्टल के माध्यम से जनगणना डेटा और मकान की जानकारी भर सकते हैं। इससे विशेष रूप से उन लोगों को सुविधा मिलेगी जो रोजगार या अन्य कारणों से अपने निवास स्थान से दूर रहते हैं। इस अवसर पर जिला जनगणना अधिकारी श्रीमती निष्ठा पांडेय तिवारी, अनुविभागीय जनगणना अधिकारी के रूप में जिले के एसडीएम, चार्ज अधिकारी के रूप में तहसीलदार तथा नगर चार्ज जनगणना अधिकारी के रूप में सीएमओ उपस्थित रहे।
पहाड़ी कोरवा जनजाति में महिला उत्पीड़न और उन्हें मुख्यधारा से जोड़ने के प्रयास
भारत की विविधतापूर्ण सांस्कृतिक विरासत में आदिवासी समुदायों का विशेष स्थान है। इन्हीं समुदायों में से एक है पहाड़ी कोरवा जनजाति, जिसे भारत सरकार ने अत्यंत संवेदनशील और पिछड़ी जनजातियों की श्रेणी में रखा है। यह जनजाति मुख्य रूप से छत्तीसगढ के जशपुर, सरगुजा, बलरामपुर और कोरिया जिलों के दुर्गम पहाड़ी एवं वन क्षेत्रों में निवास करती है।
पहाड़ी कोरवा समाज अपनी विशिष्ट परंपराओं और प्रकृति आधारित जीवन शैली के लिए जाना जाता है, लेकिन सामाजिक-आर्थिक पिछड़ेपन के कारण यहां की महिलाओं को अनेक प्रकार की कठिनाइयों और उत्पीड़न का सामना करना पड़ता है।
पहाड़ी कोरवा महिलाओं की स्थिति
पहाड़ी कोरवा समाज में महिलाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। वे परिवार के भरण-पोषण में पुरुषों के साथ बराबरी से काम करती हैं। जंगल से लकड़ी, महुआ, तेंदूपत्ता और अन्य वन उपज एकत्रित करना, खेतों में काम करना और परिवार की देखभाल करना उनकी दैनिक दिनचर्या का हिस्सा है।
इसके बावजूद सामाजिक संरचना और संसाधनों की कमी के कारण महिलाएं अक्सर शिक्षा, स्वास्थ्य और अधिकारों से वंचित रह जाती हैं।
महिला उत्पीड़न की प्रमुख समस्याएं
1. घरेलू हिंसा और सामाजिक दबाव
कई क्षेत्रों में शराबखोरी और आर्थिक अभाव के कारण घरेलू हिंसा की घटनाएं सामने आती हैं। महिलाएं कई बार सामाजिक दबाव के कारण शिकायत दर्ज नहीं करा पातीं।
2. शिक्षा की कमी
पहाड़ी कोरवा समुदाय में महिला साक्षरता दर बहुत कम है। दूरस्थ गांवों और संसाधनों की कमी के कारण लड़कियों की पढ़ाई अक्सर प्रारंभिक स्तर पर ही रुक जाती है।
3. आर्थिक शोषण
वन उपज एकत्रित करने के बावजूद महिलाओं को उसका उचित मूल्य नहीं मिल पाता। कई बार बिचौलियों द्वारा उनका आर्थिक शोषण किया जाता है।
4. स्वास्थ्य और पोषण की समस्या
दूरदराज के पहाड़ी इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी के कारण गर्भवती महिलाओं और बच्चों को समय पर इलाज नहीं मिल पाता। कुपोषण भी एक गंभीर समस्या है।
5. सामाजिक जागरूकता की कमी
कानूनी अधिकारों और सरकारी योजनाओं की जानकारी न होने के कारण महिलाएं अपने अधिकारों का उपयोग नहीं कर पातीं।
मुख्यधारा से जोड़ने के प्रयास
पिछले कुछ वर्षों में केंद्र और राज्य सरकारों के साथ-साथ कई सामाजिक संगठनों द्वारा पहाड़ी कोरवा समुदाय को मुख्यधारा से जोड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं।
1. शिक्षा को बढ़ावा
सरकार द्वारा आश्रम शालाओं, छात्रावासों और विशेष छात्रवृत्ति योजनाओं के माध्यम से आदिवासी बच्चों विशेषकर लड़कियों को शिक्षा से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
2. महिला स्व-सहायता समूह
ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए स्वयं सहायता समूह बनाए जा रहे हैं। इससे महिलाएं छोटे-छोटे व्यवसाय और आजीविका गतिविधियों से जुड़ रही हैं।
3. स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार
सरकार द्वारा मोबाइल हेल्थ यूनिट, आंगनबाड़ी और मातृ-शिशु स्वास्थ्य कार्यक्रमों के माध्यम से महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य सुधार पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
4. जागरूकता अभियान
सामाजिक संस्थाएं और प्रशासनिक अधिकारी गांव-गांव जाकर महिलाओं को उनके अधिकारों, शिक्षा और स्वास्थ्य के प्रति जागरूक कर रहे हैं।
5. आजीविका और कौशल विकास
वन उपज के उचित मूल्य और कौशल प्रशिक्षण के माध्यम से महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
समाज और प्रशासन की जिम्मेदारी
पहाड़ी कोरवा महिलाओं को सम्मानजनक जीवन देने के लिए केवल सरकारी योजनाएं ही पर्याप्त नहीं हैं। इसके लिए समाज, प्रशासन और सामाजिक संगठनों को मिलकर काम करना होगा।
महिला शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार, आर्थिक अवसरों की उपलब्धता और सामाजिक जागरूकता ही वह माध्यम हैं जिनसे इन महिलाओं को मुख्यधारा से जोड़ा जा सकता है।
निष्कर्ष
पहाड़ी कोरवा जनजाति की महिलाएं आज भी अनेक चुनौतियों से जूझ रही हैं, लेकिन सकारात्मक पहल और निरंतर प्रयासों से उनकी स्थिति में सुधार की उम्मीद दिखाई दे रही है। आवश्यकता इस बात की है कि विकास की धारा इन दूरस्थ पहाड़ी गांवों तक पहुंचे और वहां की महिलाओं को भी समान अवसर और सम्मानजनक जीवन मिल सके।
जब पहाड़ी कोरवा महिलाओं को शिक्षा, स्वास्थ्य और आर्थिक सशक्तिकरण के अवसर मिलेंगे, तभी वास्तविक अर्थों में आदिवासी समाज का समग्र विकास संभव होगा।
डाॅ. जतिंदरपाल सिंह
रासेयो सेजेस डोंगरीपाली का दिवा शिविर गौरडीह में हुआ आयोजन
सारंगढ़ बिलाईगढ़/ स्वामी आत्मानंद शासकीय उत्कृष्ट हिन्दी माध्यम विद्यालय डोंगरीपाली का रासेयो एक दिवसीय दिवा शिविर ग्राम गौरडीह में आयोजित किया गया। जिसमें स्वयंसेवकों ने ग्राम भ्रमण एवं घर-घर जाकर जनगणना 2027 के लिए ग्रामीणों को जागरूक किया।विदित हो कि राष्ट्रीय सेवा योजना वह सशक्त माध्यम है, जो सबसे पहले सामाजिक जन जागृति के लिए अपना कदम बढ़ाकार उपस्थिति दर्ज कराते चलती है। इन सबके लिए विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया जाता है, जिसमे दिवा शिविर एक प्रमुख पहल है। शहीद नंदकुमार पटेल विश्वविद्यालय रायगढ़ से संबद्ध राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई स्वामी आत्मानंद शासकीय उत्कृष्ट हिन्दी माध्यम विद्यालय डोंगरीपाली का एक दिवसीय दिवा शिविर गोद ग्राम गौरडीह में आयोजित किया गया। जिसमें रासेयो कार्यक्रम अधिकारी हेमलता मालाकार एवं सहयोगी साधना सिंह के नेतृत्व में ग्राम भ्रमण रैली में नारों के साथ स्वयंसेवकों ने घर-घर जाकर पूरे गांव में आगामी मई माह में आयोजित राष्ट्रीय जनगणना 2027 के तहत् अपने-अपने परिवार की जनगणना कराने की अपील कर बताया कि जनगणना हमारे देश के भविष्य के लिए कितना आवश्यक होता है? इसके माध्यम से नीतियो का निर्धारण कैसे संभव होता है? साथ ही स्वच्छता कार्य भी किये।वहीं द्वितीय सत्र में बौद्धिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसमें समाज में जमी नशे की जड़ के समाप्त करने के तरीके एवं नशा से दूर रहने तथा जनगणना 2027 के लिए अपेक्षित सहयोग करने की अपील की। इसी तारतम्य में कार्यक्रम को ग्राम पंचायत गोरडीह के सरपंच श्रीमती गुलापी बरिहा, रामप्यारे पटेल एवं संस्था के प्राचार्य उग्रसेन चैाधरी ने संबोधित तथा आभार ज्ञापन व्याख्यता डोलामणी मालाकार ने किया।समस्त कार्यक्रम के दौरान स्कूल समिति डोंगरीपाली से नारायण सागर, तेजराम पटेल, ग्राम गौरडीह से शोभाचन्द चैाधरी, रामकुमार चैाधरी, सेजेस डोंगरीपाली से व्याख्याता जसवंत सिंह, सहायक शिक्षिका श्रीमती गणेशी भोय, कु.रीना प्रधान,संकुल शैक्षिक समन्वयक गौरडीह यू.एस. चैाधरी, प्रधानपाठक प्रा.शा.लेन्धरजोरी त्रिलोचन बरिहा, शिक्षक मा.शा.कोकबहाल विनोद कुमार बरिहा एवं भरत यादव एम.डी.एम. आपरेटर सहित अनेक पालकों तथा गणमान्य नागरिकों सहित रासेयो स्वयंसेवकों की सराहनीय उपस्थिति रही।
तुस्मा में बच्चों को मानवाधिकारों की दी गई जानकारी, पढ़ाई और स्वच्छता पर दिया जोर
जिला — प्रदेश अध्यक्ष के आदेशानुसार राष्ट्रीय मानवाधिकार एवं अपराध नियंत्रण ब्यूरो छत्तीसगढ़ की टीम के संभाग उपाध्यक्ष रामकुमार साहू द्वारा आज नवीन प्राथमिक शाला तुस्मा का दौरा किया गया।
इस दौरान उन्होंने विद्यालय के बच्चों को मानव अधिकारों के बारे में विस्तार से जानकारी दी और बताया कि प्रत्येक बच्चे को शिक्षा, सुरक्षा और सम्मान के साथ जीवन जीने का अधिकार है।
कार्यक्रम के दौरान श्री साहू ने बच्चों से उनकी पढ़ाई के बारे में भी जानकारी ली और उन्हें मन लगाकर पढ़ाई करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा ही बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की सबसे मजबूत नींव है।
इसके साथ ही विद्यालय परिसर में साफ-सफाई, पेयजल व्यवस्था सहित अन्य मूलभूत सुविधाओं की भी जानकारी ली गई। बच्चों को स्वच्छता बनाए रखने और नियमित रूप से विद्यालय आने के लिए भी प्रेरित किया गया।
इस अवसर पर बच्चों ने उत्साह के साथ कार्यक्रम में भाग लिया और मानव अधिकारों से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त कीं
*ग्राम पंचायत सुरगुली के शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला सुरगुली में हर्षोल्लास के साथ मनाया विदाई समारोह*
छत्तीसगढ़ सारंगढ़ बिलाईगढ : जिले के अंतर्गत आने वाले वानांचल ग्राम सुरगुली जो जिले के अंतिम छोर पर बसे हुए हैं शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला सुरगुली में हर्षोल्लास साथ आयोजित हुआ विदाई समारोह,
कक्षा 6वी 7वीं के विद्यार्थियों द्वारा किया गया, जिसमें उन्होंने अपने वरिष्ठ साथियों को सम्मानपूर्वक विदाई दी।पुरे कार्यक्रम के दौरान विद्यायल का वातावरण उत्साह और भावनात्मक पलों से भरा रहा।
कार्यक्रम कि शुरुआत कक्षा 6वी एवं कक्ष 7वीं विद्यार्थियों द्वारा कक्षा 8वीं विद्यार्थियों के स्वागत के साथ हुई।
जूनियर विद्यार्थियों ने अपने सीनियर साथियों को शुभकामनाएं दी और उनके साथ बिताए गए यादगार पलों को साझा किया। इस अवसर पर कक्षा 8वीं के विद्यार्थियों ने भी अपने विद्यालय जीवन के अनुभव साझा करते हुए जूनियर विद्यार्थियों को अनुशासन, मेहनत, और शिक्षा महत्व के बारे में बताया तथा आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। इस कार्यक्रम में शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला सुरगुली के शिक्षक आदरणीय श्री फिरत राम साहू (प्रधान पाठक) श्री रामेश्वर सिंह धुव शिक्षक श्री देवेंद्र कुमार तोमर शिक्षक श्री मनीष कुमार पटेल शिक्षक श्री बुधलाल साहू शिक्षक सभी शिक्षकों का उपस्थित रहे, विद्यालय के प्रधान पाठक श्री फिरत राम साहू सर जी ने विद्यार्थियों को सम्बोधित करते हुए कहा विद्यायल जीवन भविष्य कि नींव तैयार करता है । उन्होंने ने विद्यार्थियों को लक्ष्य निर्धारित कर निरंतर मेहनत करने कि , और जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा दी
सारंगढ़ केजरी राइस मिल मे लगी आग हजरो क्विंटल धान शाम तक जलती रही
सारंगढ़ बिलाईगढ़ :- सारंगढ़-कटेली रोड पर स्थित केजरी राइस मिल में आज भीषण आग लगने से हड़कंप मच गया है। मिल परिसर में रखे हजारों क्विंटल धान आग की चपेट में आ गए हैं, जिससे भारी नुकसान की आशंका जताई जा रही है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, आग की लपटें इतनी तेज थीं कि पास के सड़क से गुजरने वाले राहगीरों में अफरा-तफरी मच गई। मिल के भीतर हजारों क्विंटल धान का ढेर लगा हुआ था, जो सूखे छिलकों (भूसे) की मौजूदगी के कारण आग के लिए ‘ईंधन’ का काम कर रहा है। इसी वजह से फायर ब्रिगेड की कई गाड़ियाँ आने के बावजूद आग पर काबू पाना चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।
आग इतनी भयानक है कि उसकी लपटें और धुएं का गुबार दूर से ही देखा जा सकता है। आग लगने के कारणों का अभी तक पता नहीं चल पाया है, लेकिन मिल में भारी मात्रा में धान का स्टॉक होने के कारण आग तेजी से फैल गई।
घटना की सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंच गई है। स्थानीय प्रशासन और मिल के कर्मचारी भी बचाव कार्य में जुटे रही ।