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मोदी सरकार का इमरजेंसी अलर्ट सिस्टम! मोबाइल पर बजा ‘खतरे का सायरन’, घबराएं नहीं- ये सुरक्षा की तैयारी है

-:मोदी सरकार का इमरजेंसी अलर्ट सिस्टम! मोबाइल पर बजा ‘खतरे का सायरन’, घबराएं नहीं- ये सुरक्षा की तैयारी है:-

 छत्तीसगढ़ सहित देशभर में अचानक मोबाइल फोन पर तेज सायरन जैसी आवाज के साथ एक इमरजेंसी अलर्ट पहुंचने से लोग चौंक गए। कई लोगों ने इसे खतरे का संकेत समझ लिया, लेकिन यह दरअसल केंद्र सरकार द्वारा किए जा रहे एक बड़े सुरक्षा अभ्यास का हिस्सा है। दूरसंचार विभाग और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) मिलकर सेल ब्रॉडकास्ट सिस्टम की टेस्टिंग कर रहे हैं, ताकि आपदा के समय लोगों तक तुरंत और प्रभावी सूचना पहुंचाई जा सके।

Emergency Alert System: क्या है यह इमरजेंसी अलर्ट?

यह अलर्ट एक विशेष प्रकार का संदेश है, जो तेज ध्वनि और वाइब्रेशन के साथ मोबाइल स्क्रीन पर फ्लैश होता है। इसका उद्देश्य किसी संभावित आपदा या खतरे की स्थिति में लोगों को तुरंत सतर्क करना है। फिलहाल यह केवल परीक्षण (टेस्टिंग) के तौर पर भेजा गया है।

घबराने की जरूरत नहीं, यह सिर्फ टेस्टिंग है

सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह कोई वास्तविक खतरा नहीं है। यह केवल यह जांचने के लिए किया जा रहा है कि भविष्य में किसी आपात स्थिति में अलर्ट सिस्टम सही तरीके से काम करता है या नहीं। इसलिए नागरिकों से अपील की गई है कि वे इस तरह के संदेश से घबराएं नहीं।

सेल ब्रॉडकास्ट टेक्नोलॉजी क्या है?

सेल ब्रॉडकास्ट एक आधुनिक संचार तकनीक है, जिसके जरिए एक साथ किसी विशेष क्षेत्र के सभी मोबाइल फोन पर अलर्ट भेजा जा सकता है। यह SMS की तरह एक-एक नंबर पर निर्भर नहीं करता, बल्कि सीधे मोबाइल टॉवर से प्रसारित होता है, जिससे संदेश तुरंत पहुंचता है।

SMS से कैसे अलग है यह सिस्टम?

पहले आपदाओं से जुड़े संदेश SMS के जरिए भेजे जाते थे, लेकिन इसमें देरी या नेटवर्क जाम की समस्या हो सकती थी। खासकर बिजली गिरना, सुनामी या गैस लीक जैसी आपात स्थितियों में समय बेहद महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में सेल ब्रॉडकास्ट टेक्नोलॉजी ज्यादा प्रभावी साबित होती है क्योंकि यह बिना देरी के एक साथ सभी तक पहुंचती है।

स्वदेशी तकनीक C-DOT की बड़ी उपलब्धि

इस अत्याधुनिक तकनीक को सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ टेलीमैटिक्स (C-DOT) द्वारा विकसित किया गया है। यह पूरी तरह स्वदेशी प्रणाली है, जो भारत की डिजिटल सुरक्षा क्षमताओं को मजबूत करती है। इसकी खास बात यह है कि यह कमजोर नेटवर्क में भी काम कर सकती है और सीधे टॉवर से मोबाइल तक अलर्ट पहुंचाती है।

आपदा प्रबंधन में होगा बड़ा बदलाव

इस तकनीक के लागू होने से भविष्य में किसी भी प्राकृतिक या मानवजनित आपदा के दौरान लोगों को समय पर चेतावनी मिल सकेगी। इससे जान-माल के नुकसान को काफी हद तक कम करने में मदद मिलेगी।

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