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भारत ने 65 साल पुराना सिंधु जल समझौता रोका:पाकिस्तानी नागरिकों का वीजा रद्द, अटारी बॉर्डर बंद; भारत के 5 बड़े फैसलों के मायने
नई दिल्ली/
पहलगाम हमले के दूसरे दिन भारत ने इसके लिए पाकिस्तान को जिम्मेदार माना है। पीएम नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई बैठक में पाकिस्तान को सबक सिखाने के लिए भारत ने 5 बड़े फैसले लिए हैं।
इसमें 65 साल पुरानी सिंधु जल संधि को रोका गया है। अटारी चेक पोस्ट बंद कर दिया गया है। वीजा बंद कर दिया गया और उच्चायुक्तों को हटा दिया है।
सिंधु जल समझौते का मकसद था कि दोनों देशों में जल को लेकर कोई संघर्ष न हो और खेती करने में बाधा न आए। हालांकि भारत ने हमेशा इस संधि का सम्मान किया, जबकि पाकिस्तान पर आतंकवाद को समर्थन देने के आरोप लगातार लगते रहे हैं। भारत के पाकिस्तान से तीन युद्ध हो चुके हैं, लेकिन भारत ने कभी भी पानी नहीं रोका था, लेकिन पाकिस्तान हर बार भारत में आतंकी हमले के लिए जिम्मेदार होता है। पाकिस्तान की 80% खेती सिंधु, झेलम और चिनाब नदियों के पानी पर निर्भर है। अब भारत की तरफ से इन नदियों का पानी रोक देने से पाकिस्तान में जल संकट गहराएगा। वहां की आर्थिक स्थिति बिगड़ेगी। इसके अलावा पाकिस्तान कई डैम और हाइड्रो प्रोजेक्ट्स से बिजली बनाता है। पानी की कमी से बिजली उत्पादन में गिरावट आ सकती है, जिससे आर्थिक और औद्योगिक गतिविधियों पर असर पड़ेगा।
2. अटारी चेक पोस्ट बंद होने से पाकिस्तानियों की आवाजाही नहीं हो सकेगी
अटारी चेक पोस्ट के बंद होने से पाकिस्तान के लोगों की आवाजाही तो बंद होगी ही, साथ ही छोटे सामानों को भारत निर्यात नहीं करेगा। इससे वहां के छोटे व्यापारियों को आर्थिक नुकसान होगा।
भारत आए पाकिस्तानी नागरिकों को इस रास्ते से लौटने के लिए 1 मई तक का वक्त दिया गया है। इसके बाद वह इस रास्ते से नहीं लौट पाएंगे।
साल 2019 में जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटाने के बाद से ही पाकिस्तान से द्विपक्षीय व्यापार बंद है। किसी तीसरे देश के माध्यम से भारत-पाकिस्तान के बीच आयात-निर्यात होता है। हालांकि दोनों देशों के बीच छोटे-मोटे सामानों का लेन देन होता है। जैसे- सेंधा नमक, चमड़े का सामान, मुल्तानी मिट्टी, तांबे का सामान, मिनरल मिल्स, ऊन और चूना हैं।
भारत ने पाकिस्तानियों के वीजा पर रोक लगा दी है। इतना ही नहीं, SAARC वीजा छूट योजना से भी पाकिस्तान के लोग भारत नहीं आ पाएंगे। पाकिस्तान के कई लोगों की रिश्तेदारी भारत में है। ऐसे में कई बार पाकिस्तानी लोग रिश्तेदार बनकर भारत आते हैं। इनके अलावा धार्मिक यात्राओं का बहाना करके भारत आते हैं और आतंकी हमलों को अंजाम देते हैं। ऐसे में वीजा सर्विस बंद होने से आतंकियों के भारत आने का रास्ता भी बंद हो जाएगा। भारत ने नई दिल्ली में स्थित पाकिस्तानी हाई कमीशन में तैनात पाकिस्तानी मिलिट्री, नेवी और एयर एडवाइजर्स को अवांछित व्यक्ति घोषित किया है। उनके पास भारत छोड़ने के लिए एक हफ्ते का समय है। 1 मई 2025 तक पाकिस्तान के हाई कमीशन में तैनात कर्मचारियों की संख्या 55 से घटाकर 30 की जाएगी। भारत ने आजादी के बाद से अब तक दिल्ली में पाकिस्तान के दूतावास को कभी भी बंद नहीं किया है।
पाकिस्तान के डिफेंस एडवाइजर्स हटाने के साथ ही भारत भी अपने मिलिट्री, नेवी और एयर एडवाइजर्स को इस्लामाबाद स्थित इंडियन हाई कमीशन से वापस बुलाएगा। संबंधित हाई कमीशन में ये पद निरस्त माने जाएंगे। दोनों उच्चायोगों से सर्विस एडवाइजर्स के 5 सपोर्ट स्टाफ को भी वापस बुलाया जाएगा।
पहलगाम हमले में 2 लोकल, 3 पाकिस्तानी आतंकी शामिल:जांच में खुलासा, सुरक्षा बलों ने कई लोगों को हिरासत में लिया
नई दिल्ली/श्रीनगर/
पहलगाम के बैसरन में आतंकी हमले के दूसरे दिन बुधवार को श्रीनगर से दिल्ली तक बैठकों का दौर चला। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में सुरक्षा मामलों की कैबिनेट ( CCS) की मीटिंग हुई।
पीएम आवास पर मोदी की अध्यक्षता में 2 घंटे से बैठक जारी है। इसमें रक्षामंत्री राजनाथ सिंह, गृहमंत्री अमित शाह, विदेश मंत्री एस जयशंकर, एनएस अजित डोभाल समेत कई अफसर मौजूद हैं।
पहलगाम हमले में 27 लोगों की मौत हुई है। 20 से ज्यादा लोग घायल हैं। हमला उस वक्त किया गया, जब बैसरन घाटी में बड़ी तादाद में पर्यटक मौजूद थे। मृतकों में UP, गुजरात, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु और ओडिशा के पर्यटक हैं। नेपाल और UAE के एक-एक टूरिस्ट और 2 स्थानीय भी मारे गए।
इधर, सुरक्षा और इंटेलिजेंस एजेंसियों ने पहलगाम अटैक के संदिग्ध आतंकियों के स्केच जारी किए हैं। इनके नाम आसिफ फौजी, सुलेमान शाह और अबु तल्हा बताए गए हैं।
इंटेलिजेंस सूत्रों ने बताया कि हमले का मास्टर माइंड लश्कर-ए तैयबा का डिप्टी चीफ सैफुल्लाह खालिद है, जो पाकिस्तान में मौजूद है। शुरुआती जांच में पता चला है कि हमले में 5 आतंकी शामिल थे। इनमें से दो लोकल और 3 पाकिस्तानी आतंकी थे।
पहलगाम अटैक के बाद जब भारतीय सेना के जवान बैसरन घाटी पहुंचे तो वहां मौजूद पर्यटकों ने उन्हें आतंकवादी समझ लिया। ऐसा इसलिए क्योंकि जिन आतंकवादियों ने फायरिंग की, वो भी वर्दी में थे। जवानों को देख महिलाएं और बच्चे हाथ जोड़कर रोने लगे। इसके बाद जवानों ने कहा कि हम इंडियन आर्मी में हैं। उन्होंने पर्यटकों को सुरक्षा का भरोसा दिलाया
इंटेलिजेंस सूत्रों ने बताया कि पहलगाम अटैक में तीन फॉरेन टेररिस्ट और दो लोकल आतंकी शामिल थे। सूत्रों ने कहा कि पहलगाम हमले का मास्टर माइंड सैफुल्लाह खालिद है। यह पाक अधिकृत कश्मीर (PoK) से ऑपरेट करता है। इसकी लोकेशन रावलकोट बताई गई है। सैफुल्लाह ने एक महीने पहले हमले की चेतावनी भी दी थी। इसका 2019 का एक वीडियो भी वायरल हुआ था। इस वीडियो में सैफुल्लाह ने कहा था कि कश्मीर का मसला ठंडा नहीं होने देना है। सुरक्षा एजेंसियों ने पहलगाम हमले के संदिग्ध आतंकियों के स्केच जारी किए हैं। एजेंसियों ने हमले के चश्मदीदों की मदद से ये स्केच बनाए हैं। एजेंसियों के सूत्रों ने बताया कि इस हमले में आसिफ फौजी, सुलेमान शाह और अबु तल्हा शामिल थे। हालांकि, कौन सी तस्वीर किसकी है, यह साफ नहीं हो पाया है।
तमिलनाडु के मंत्री का महिलाओं-हिंदू तिलक पर अश्लील कमेंट
नई दिल्ली/
मद्रास हाईकोर्ट ने तमिलनाडु के वन मंत्री के पोनमुडी से शैव, वैष्णव और सामान्य रूप से महिलाओं के खिलाफ सार्वजनिक रूप से अश्लील कमेंट करने पर सवाल किया। कोर्ट ने यह जानना चाहा कि तमिलनाडु पुलिस ने उनके खिलाफ क्या कार्रवाई की है।
हाईकोर्ट पोनमुडी को आय से अधिक संपत्ति के मामले में बरी किए जाने के खिलाफ 2023 में ली गई रिव्यू पिटीशन की सुनवाई कर रहा था। इसी दौरान जज ने महाधिवक्ता पीएस रमन को बुलाया और पोनमुडी की अश्लील और निंदनीय टिप्पणी पर नाराजगी जताई।
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो का हवाला देते हुए जज ने कहा कि ऐसा लगता है कि मंत्री ने पूरे होश-ओ-हवाश में ये बातें कही थीं। ऐसा नहीं लगता कि उनकी जुबान फिसली थी जो उन्होंने सार्वजनिक रूप से माफी मांगकर पूरे मामले को दरकिनार कर दिया।
मद्रास हाईकोर्ट ने पुलिस को चेतावनी दी है कि या तो तमिलनाडु के मंत्री पोनमुडी के खिलाफ FIR दर्ज करें या अवमानना का सामना करें। मामले की अगली सुनवाई 23 अप्रैल को होगी।
जस्टिस वेंकटेश ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने हेट स्पीच पर कड़ी कार्रवाई की है। पोनमुडी को भी एक केस में दोषी पाए जाने पर उनकी सजा, अच्छे आचरण की कुछ शर्तों के आधार पर सस्पेंड कर दी गई थी।
जस्टिस वेंकटेश ने अटॉर्नी जनरल से गुरुवार शाम तक पुलिस महानिदेशक से मंत्री के खिलाफ अब तक उठाए गए कदमों के बारे में बताने कहा है।
उपराष्ट्रपति बोले- अदालतें राष्ट्रपति को आदेश नहीं दे सकतीं
नई दिल्ली/
उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट की उस सलाह पर आपत्ति जताई, जिसमें उसने राष्ट्रपति और राज्यपालों को बिलों को मंजूरी देने की समय सीमा तय की थी।
धनखड़ ने कहा कि अदालतें राष्ट्रपति को आदेश नहीं दे सकतीं। उन्होंने कहा कि संविधान का अनुच्छेद 142 के तहत कोर्ट को मिला विशेष अधिकार लोकतांत्रिक शक्तियों के खिलाफ 24x7 उपलब्ध न्यूक्लियर मिसाइल बन गया है। जज सुपर पार्लियामेंट की तरह काम कर रहे हैं।
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने 8 अप्रैल को तमिलनाडु गवर्नर Vs राज्य सरकार के केस में गवर्नर के अधिकार की ‘सीमा’ तय कर दी थी। जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस आर महादेवन की पीठ ने कहा था, ‘राज्यपाल के पास कोई वीटो पावर नहीं है।’ सुप्रीम कोर्ट ने सरकार के 10 जरूरी बिलों को राज्यपाल की ओर से रोके जाने को अवैध भी बताया था।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि राज्यपाल की तरफ से भेजे गए बिल पर राष्ट्रपति को 3 महीने के भीतर फैसला लेना होगा। दरअसल, 8 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार और राज्यपाल के मामले में ऐतिहासिक फैसला लिया था। अदालत ने कहा था कि राज्यपाल को विधानसभा की ओर से भेजे गए बिल पर एक महीने के भीतर फैसला लेना होगा।
इसी फैसले के दौरान अदालत ने राज्यपालों की ओर से राष्ट्रपति को भेजे गए बिल पर भी स्थिति स्पष्ट की थी। यह ऑर्डर 11 अप्रैल को सार्वजनिक किया गया। 11 अप्रैल की रात वेबसाइट पर अपलोड किए गए ऑर्डर में सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 201 का हवाला दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अनुच्छेद 201 कहता है कि जब विधानसभा किसी बिल को पास कर दे। उसे राज्यपाल के पास भेजा जाए और राज्यपाल उसे राष्ट्रपति के पास विचार के लिए भेज दे। इस स्थिति में राष्ट्रपति को बिल पर मंजूरी देनी होगी या फिर बताना होगा कि मंजूरी नहीं दे रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आर्टिकल 201 के तहत राष्ट्रपति के निर्णय की न्यायिक समीक्षा की जा सकती है। अगर बिल में केंद्र सरकार के निर्णय को प्राथमिकता दी गई हो, तो कोर्ट मनमानी या दुर्भावना के आधार पर बिल की समीक्षा करेगा।
अदालत ने कहा कि बिल में राज्य की कैबिनेट को प्राथमिकता दी गई हो और राज्यपाल ने विधेयक को मंत्रिपरिषद की सहायता और सलाह के विपरीत जाकर फैसला किया हो तो कोर्ट के पास बिल की कानूनी रूप से जांच करने का अधिकार होगा। सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि जब कोई समय-सीमा तय हो, तो वाजिब टाइम लाइन के भीतर फैसला करना चाहिए। राष्ट्रपति को बिल मिलने के 3 महीने के भीतर फैसला लेना अनिवार्य होगा। यदि देरी होती है, तो देरी के कारण बताने होंगे।
अयोध्या में राम मंदिर को बम से उड़ाने की धमकी
अयोध्या/
अयोध्या के राम मंदिर को बम से उड़ाने की धमकी मिली है। 14 अप्रैल (सोमवार) की रात राम जन्मभूमि ट्रस्ट को एक ई-मेल आया था। इसमें लिखा है- बढ़ा लो मंदिर की सुरक्षा। ट्रस्ट के अकाउंट अफसर महेश कुमार ने मंगलवार को पुलिस की साइबर सेल में केस दर्ज कराया है।
धमकी मिलने के बाद जन्मभूमि परिसर और आसपास के इलाकों में सुरक्षा बलों की गश्त बढ़ा दी गई है। इलेक्ट्रॉनिक निगरानी प्रणाली को एक्टिव किया गया है। पुलिस ने मंदिर के पास सर्च ऑपरेशन चलाया।
वहीं, बाराबंकी, चंदौली और अलीगढ़ समेत कई जिलों के जिलाधिकारियों को भी धमकी भरा ई-मेल आया है। इसमें DM ऑफिस को बम से उड़ाने की धमकी मिली है। ये सभी मेल तमिलनाडु से भेजे गए हैं।
संदिग्ध ई-मेल की सूचना मिलते ही तमिलनाडु की साइबर सेल को भी अलर्ट कर दिया गया है। जिससे ई-मेल भेजे जाने की सटीक लोकेशन और इसके पीछे मौजूद शातिर की पहचान की जा सके। बता दें कि रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद से कई बार धमकी मिल चुकी है। खालिस्तानी आतंकी पन्नू भी कई बार धमकी दे चुका है।
अयोध्या पुलिस प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी अफवाह से बचें। किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत प्रशासन को दें।
अयोध्या का रहने वाले अब्दुल रहमान को 3 मार्च को फरीदाबाद से पकड़ा गया था। वह राम मंदिर पर हैंड ग्रेनेड से हमला करने की साजिश कर रहा था। वह हैंड ग्रेनेड की डिलीवरी लेने के लिए अयोध्या से फरीदाबाद गया था। वह साजिश को अंजाम दे पाता, इससे पहले ही पकड़ा गया। सुरक्षा एजेंसियों को पूछताछ के बाद पता चला कि अब्दुल रहमान ISI के इस्लामिक स्टेट खुरासान प्रोविंस (ISKP) मॉड्यूल से जुड़ा हुआ था।
जब अब्दुल रहमान को पकड़ा गया, तो उसके पास 2 हैंड ग्रेनेड भी थे। ये उसे ISI के हैंडलर ने दिए थे। गुजरात ATS ने बताया था- अब्दुल रहमान के सोशल मीडिया के जरिए आतंकवादी संगठन से जुड़े होने की जानकारी सामने आई थी।
राम मंदिर और आसपास ड्रोन प्रतिबंधित है। ड्रोन उड़ाने के लिए प्रशासन से अनुमति लेनी पड़ती है। यहां तक की राम मंदिर के ऊपर से विमान उड़ाने तक की अनुमति नहीं है। राम मंदिर की सुरक्षा की जिम्मेदारी SSF यानी स्पेशल सिक्योरिटी फोर्स के हाथों में हैं। 200 जवान मंदिर की सुरक्षा में तैनात हैं।
नेशनल हेराल्ड केस, ED ने पहली चार्जशीट दाखिल की
नई दिल्ली/
प्रवर्तन निदेशालय ED ने कांग्रेस के नेशनल हेराल्ड अखबार और एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (AJL) से जुडे मनी लॉन्ड्रिंग केस में मंगलवार को पहली चार्जशीट दाखिल कर दी। इसमें सोनिया गांधी, राहुल गांधी, सैम पित्रोदा और सुमन दुबे के नाम शामिल हैं।
मामले की सुनवाई 25 अप्रैल को दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट में होगी। कोर्ट ने ED से मामले की केस डायरी भी मांगी है। 2012 में भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने सोनिया, राहुल और उनकी सहयोगी कंपनियों से जुड़े लोगों के खिलाफ इस मामले की शिकायत की थी।
12 अप्रैल 2025 को जांच के दौरान कुर्क संपत्तियों को जब्त करने की कार्रवाई की गई। ED ने दिल्ली, लखनऊ और मुंबई में 661 करोड़ रुपए की अचल संपत्तियों को कब्जे में लेने के लिए नोटिस जारी किया था।
इससे पहले, मंगलवार को ही सांसद प्रियंका गांधी के पति रॉबर्ट वाड्रा प्रवर्तन निदेशालय (ED) के ऑफिस पहुंचे। जहां उनसे गुरुग्राम के शिकोहपुर लैंड घोटाले में पूछताछ हुई।
BJP ने कहा है कि जो लोग भ्रष्टाचार और सार्वजनिक संपत्ति की लूट में लिप्त थे, उन्हें अब इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा। राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनवाला बोले-अब ईडी का मतलब डकैती तथा वंशवाद का अधिकार नहीं है। वे जनता का पैसा, संपत्ति हड़प लेते हैं और कार्रवाई होने पर विक्टिम कार्ड खेलते हैं। उन्होंने नेशनल हेराल्ड मामले में भी जनता की संपत्ति को अपना बना लिया।
राउज एवेन्यू कोर्ट के स्पेशल जज (पीसी एक्ट) विशाल गोगने ने कहा- पीएमएलए 2002 की धारा 44 और 45 के तहत मनी लॉन्ड्रिंग के लिए ईडी ने एक नई शिकायत दायर की है। इसे धारा 3 के साथ धारा 70 के तहत डिस्क्राइब किया गया है। यह पीएमएलए, 2002 की धारा 4 के तहत दंडनीय है।
हालांकि इस मामले की सुनवाई राउज एवेन्यू कोर्ट में एडीशनल चीफ ज्यूडीशियल मजिस्ट्रेट के पास चल रही है। लेकिन जस्टिस गोगने ने कहा कि की PMLA की धारा 44(1)(C) के तहत सुनवाई उसी अदालत में की जानी चाहिए जिसने PMLA की धारा 3 के तहत मनी लॉन्ड्रिंग केस पर संज्ञान लिया है। दोनों अपराधों का फैसला एक ही क्षेत्राधिकार में किया जाना चाहिए।
दिल्ली के हेराल्ड हाउस (5A, बहादुर शाह जफर मार्ग), मुंबई के बांद्रा (ईस्ट) और लखनऊ के विशेश्वर नाथ रोड स्थित AJL की बिल्डिंग पर नोटिस चिपकाए गए थे। 661 करोड़ की इन अचल संपत्तियों के अलावा AJL के 90.2 करोड़ रुपए के शेयरों को ED ने नवंबर 2023 में अपराध की आय को सुरक्षित करने और आरोपी को इसे नष्ट करने से रोकने के लिए कुर्क किया था।
मोदी ने कमिश्नर से पूछा-गैंगरेप केस में क्या हुआ
वाराणसी/
पीएम नरेंद्र मोदी शुक्रवार सुबह 10 बजकर 7 मिनट पर वाराणसी पहुंचे। एयरपोर्ट पर उतरते ही पीएम ने पुलिस कमिश्नर मोहित अग्रवाल से छात्रा से गैंगरेप केस को लेकर सवाल-जवाब किए। उन्होंने कमिश्नर से वारदात की पूरी जानकारी ली। कहा- सभी दोषियों पर सख्त एक्शन हो। साथ ही, ऐसी घटना दोबारा न होने पाए। यह घटना 15 दिन पहले की है।
कमिश्नर ने पीएम मोदी को केस की पूरी स्टेटस रिपोर्ट बताई। उन्होंने कहा कि इस मामले में मुख्य आरोपी समेत 9 लोगों को जेल भेजा जा चुका है। तीनों और आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। मुख्य आरोपी का कैफे सील कर दिया गया है।
दरअसल, वाराणसी में ग्रेजुएशन की छात्रा से 23 लड़कों ने 7 दिन तक गैंगरेप किया था, फिर उसे सड़क पर फेंक कर भाग गए थे। छात्रा बदहवास हालत में घर पहुंची और दो दिन तक बेहोश रही थी।
एयरपोर्ट से पीएम हेलिकॉप्टर से मेहंदी गंज पहुंचे। यहां सीएम योगी ने उनका स्वागत किया। उन्हें कमल छतरी भेंट की। पीएम ने यहां 3,884 करोड़ के 44 प्रोजेक्ट्स का लोकार्पण और शिलान्यास किया। अब पीएम जनसभा को संबोधित कर रहे हैं। पीएम बनने के बाद मोदी का यह काशी का 50वां दौरा है। वह अपने संसदीय क्षेत्र में करीब ढाई घंटे रहेंगे।
18 साल की ग्रेजुएशन की छात्रा 29 मार्च को घर लौट रही थी, तभी रास्ते में उसका दोस्त राज विश्वकर्मा मिल गया। उसे घुमाने ले गया। राज उसको लेकर एक होटल में रुका। उसने होटल में छात्रा के साथ रेप किया। वीडियो बना लिया।
30 मार्च को छात्रा घर जाने लगी तो राज के जानने वाले समीर,आयुष सिंह समेत कुछ और लड़के होटल में पहुंच गए। उन्होंने छात्रा को जबरन होटल में रोक लिया। फिर वीडियो वायरल करने की धमकी देकर सभी ने उसके साथ रेप किया।
अगले दिन उन लड़कों ने अपने अन्य दोस्तों सोहेल, अनमोल, दानिश, साजिद और जाहिर को भी बुला लिया। इन लोगों ने छात्रा को नशीला पदार्थ सुंघा दिया, फिर गाड़ी में बैठाकर कांटिनेंटल कैफे ले गए। वहां बेहोशी की हालत में छात्रा से रेप किया।
3 अप्रैल की रात साजिद ने छात्रा को कार वाले के साथ बैठा दिया। कार में 5-6 लड़के पहले से मौजूद थे। उन लड़कों ने चलती कार में छात्रा के साथ रेप किया। फिर उसे सड़क पर फेंक कर भाग गए। इसके बाद छात्रा बदहवास हालात में घर पहुंची और उसने पूरी कहानी बताई।
ममता बोलीं- काबिल टीचर्स के लिए कोर्ट का फैसला अन्यायपूर्ण
पश्चिम बंगाल /की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोमवार को उन शिक्षकों और स्टाफर्स से मुलाकात की, जिनकी भर्ती सुप्रीम कोर्ट ने निरस्त कर दी है। ममता बनर्जी ने कहा कि हम कोर्ट के आदेश से बंधे हुए हैं। यह फैसला उन कैंडिडेट्स के लिए अन्याय है, जो काबिल शिक्षक थे।
ममता ने यह मुलाकात कोलकाता के नेताजी इनडोर स्टेडियम में की। इस दौरान उन्होंने कहा, "आप लोग यह मत समझिए कि हमने फैसले को स्वीकार कर लिया है। हम पत्थरदिल नहीं हैं। मुझे ऐसा कहने के लिए जेल भी डाल सकते हैं, लेकिन मुझे फर्क नहीं पड़ता है। "
दरअसल, 3 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने स्कूल भर्ती घोटाले से जुड़े कोलकाता हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखा। हाईकोर्ट ने पश्चिम बंगाल स्कूल सर्विस कमीशन (WBSSC) की 2016 में 25,752 शिक्षकों और स्टाफर्स की नियुक्ति को अवैध बताते हुए भर्ती रद्द कर दी थी। अदालत ने कहा था कि भर्ती प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां थीं।
भाजपा लगातार इस मामले में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के इस्तीफे और उन्हें जेल भेजने की मांग कर रही है। पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता विपक्ष सुवेंदु अधिकारी ने सोमवार को भाजपा विधायकों के साथ मिलकर ममता सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया।
इस दौरान अधिकारी ने कहा- ममता बनर्जी को जेल जाना होगा। वह मुख्य आरोपी हैं। उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी ने नौकरियों के बदले 700 करोड़ रुपए की रिश्वत ली है।
वहीं, केंद्रीय मंत्री और पश्चिम बंगाल भाजपा अध्यक्ष सुकांत मजूमदार ने दावा किया कि ममता बनर्जी शिक्षक भर्ती घोटाला मामले में जेल जाने वाली दूसरी मुख्यमंत्री होंगी। हरियाणा के चार बार मुख्यमंत्री रहे दिवंगत ओम प्रकाश चौटाला ऐसे ही एक मामले में 2013 में जेल गए थे ममता ने कहा- वह व्यक्तिगत रूप से सुप्रीम कोर्ट के फैसले को स्वीकार नहीं करती हैं, लेकिन उनकी सरकार इसे लागू करेगी और चयन प्रक्रिया को फिर से दोहराएगी। उन्होंने सवाल किया कि क्या विपक्षी BJP और CPM चाहते हैं कि बंगाल की शिक्षा व्यवस्था ध्वस्त हो जाए।
ममता बनर्जी पर टिप्पणी करते हुए भाजपा सांसद और प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा कि अगर भाजपा राज्य में सत्ता में आती है तो बनर्जी को कानून से कोई नहीं बचा पाएगा। उन्हें अब सत्ता में रहने का कोई अधिकार नहीं है। अगर उनमें जरा भी जिम्मेदारी बची है, तो उन्हें पद छोड़ देना चाहिए।
पात्रा ने कहा- फैसले के बाद बनर्जी की विश्वसनीयता और वैधता खत्म हो गई है। वे निश्चित रूप से जेल जाएंगी। अगर वे सुप्रीम कोर्ट का आदेश नहीं मान रही हैं तो उन पर अदालत की अवमानना का मामला चलना चाहिए। बर्खास्त किए गए निर्दोष कर्मचारियों को मुख्यमंत्री राहत कोष से वेतन दिया जाना चाहिए।
दंतेवाड़ा दौरे के बाद रायपुर लौटे केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह, गृह विभाग की लेंगे अहम बैठक
रायपुर। दंतेवाड़ा के बस्तर पंडुम कार्यक्रम में शामिल होने के बाद केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह रायपुर लौट आए हैं। शाह आज देर रात गृह विभाग की एक उच्चस्तरीय बैठक लेंगे, जिसमें छत्तीसगढ़पुलिस विभाग के बड़े अफसर मौजूद रहेंगे।
माना जा रहा है कि बैठक में नक्सल उन्मूलन, आंतरिक सुरक्षा और हालिया अभियानों की समीक्षा की जाएगी। बता दें कि आज सुबह अमित शाह दंतेवाड़ा दौरे पर गए थे जहां वे “बस्तर पंडुम“ कार्यक्रम में शामिल हुए। और कार्यक्रम को संबोधित किया। इसके बाद वे जवानों से मिलने कैम्प पहुंचे थे।
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को प्रयागराज डेवलपमेंट अथॉरिटी को 2021 में मकान गिराने पर फटकार लगाई।
कोर्ट ने अधिकारियों की इस बुलडोजर एक्शन को अमानवीय, अवैध बताया और कहा कि इस कार्रवाई के दौरान दूसरों की भावनाओं और अधिकारों का ख्याल नहीं रखा गया।
जस्टिस अभय एस ओका और जस्टिस उज्जवल भुइयां की बेंच ने कहा कि देश में लोगों के रिहायशी घरों को इस तरह से नहीं गिराया जा सकता है। इसने हमारी अंतरआत्मा को झकझोर दिया है।
प्रयागराज प्रशासन ने 2021 में गैंगस्टर अतीक की प्रापर्टी समझकर एक वकील, प्रोफेसर और 3 अन्य के मकान गिरा दिए थे। सुप्रीम कोर्ट में वकील जुल्फिकार हैदर, प्रोफेसर अली अहमद और अन्य लोगों ने याचिका दाखिल की थी। ये वो लोग हैं, जिनके मकान तोड़े गए थे। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इनकी याचिकाएं ठुकरा दी थीं।सुप्रीम कोर्ट ने डेवलपमेंट अथॉरिटी को आदेश दिया कि जिनके मकान गिराए गए हैं, उन्हें 6 हफ्तों के भीतर 10-10 लाख रुपए मुआवजा दिया जाए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा- राइट टू शेल्टर नाम भी कोई चीज होती है। उचित प्रक्रिया नाम की भी कोई चीज होती है। इस तरह की कार्रवाई किसी तरह से भी ठीक नहीं है।सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस उज्जल भुईयां ने फैसले के दौरान उस घटना का जिक्र किया। उन्होंने कहा, "यूपी के अंबेडकर नगर 24 मार्च की घटना का जिक्र करते हुए कहा कि अतिक्रमण विरोधी अभियान के दौरान एक तरफ झोपड़ियों पर बुलडोजर चलाया जा रहा था तो दूसरी तरफ एक 8 साल की बच्ची अपनी किताब लेकर भाग रही थी। इस तस्वीर ने सबको शॉक्ड कर दिया था।"
सुप्रीम कोर्ट में जब पहले इस केस की सुनवाई हुई तो पीड़ितों की तरफ से वकील अभिमन्यु भंडारी ने दलील दी। उन्होंने कहा था, "अतीक अहमद नाम का एक गैंगस्टर था, जिसकी 2023 में हत्या कर दी गई थी। अफसरों ने पीड़ितों की जमीन को अतीक की जमीन समझ लिया। उन्हें (राज्य को) अपनी गलती स्वीकार कर लेनी चाहिए।" इस दलील पर यूपी सरकार ने कहा था कि हमने याचिकाकर्ताओं को नोटिस का जवाब देने के लिए उचित समय दिया गया था।
इस बहस पर जस्टिस ओका सहमत नहीं हुए। उन्होंने कहा, "नोटिस इस तरह क्यों चिपकाया गया? कूरियर से क्यों नहीं भेजा गया? कोई भी इस तरह नोटिस देगा और तोड़फोड़ करेगा। ये तोड़फोड़ का एक ऐसा मामला है, जिसमें अत्याचार शामिल है।"
इससे पहले इलाहाबाद हाई कोर्ट ने यह याचिका खारिज कर दी थी। हाई कोर्ट ने राज्य सरकार के इस बयान के आधार पर कहा था कि वह भूमि नजूल लैंड थी। उसे सार्वजनिक कार्यों के लिए इस्तेमाल किया जाना था।
1906 से जारी लीज 1996 में खत्म हो चुका था। याचिकाकर्ताओं ने लीज होल्ड को फ्री-होल्ड करने का आवेदन दिया था। उन आवेदनों को 2015 और 2019 में खारिज किया जा चुका है। ऐसे में बुलडोजर कार्रवाई के जरिए अवैध कब्जे को हटाया गया था।