रायपुर
रायपुर में 8वीं कक्षा में पढ़ने वाली छात्रा आकांक्षा सेन ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। वह छत्तीसगढ़ नगर स्थित सरस्वती शिक्षा मंदिर में पढ़ती थी। छात्रा की मौत के बाद परिजनों ने स्कूल प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
परिजनों का आरोप है कि, स्कूल में बच्ची को डांटा-फटकारा गया और मानसिक रूप से परेशान किया गया। इसी से परेशान होकर उसने आत्मघाती कदम उठाया। मामले में टिकरापारा थाने में शिकायत की गई है। मामला टिकरापारा थाना इलाके का है।
इस मामले में परिजनों और स्थानीय लोगों ने स्कूल के बाहर जाकर प्रदर्शन भी किया है। स्कूल पहुंचे पूर्व पार्षद देवेंद्र यादव ने कहा कि, छात्रा की मां सोमवार शाम करीब 4 बजे स्कूल पहुंची थीं, लेकिन उन्हें गेट से ही वापस भेज दिया गया।
वहीं, स्कूल की प्रिंसिपल इंद्राणी दुबे ने बच्चों को प्रताड़ित करने के आरोप से इनकार किया है। उनका कहना है कि एक टीचर पर कमेंट की शिकायत पर बच्चियों से बात की गई थी और उन्हें अगले दिन अपने पैरेंट्स के साथ आने के लिए कहा गया था।
दरअसल, स्कूल प्रबंधन के मुताबिक, शुक्रवार (9 अक्टूबर) को लंच के दौरान खेलते समय 8वीं क्लास की 4 बच्चियों ने स्कूल की टीचर गंगोत्री के लिए अपशब्द कहे थे। जिसमें आकांक्षा भी शामिल थी। ये बात छठवीं के कुछ बच्चों ने सुनी और इसकी शिकायत शिक्षिका से की।
शिक्षिका के शिकायत के बाद प्रिंसिपल ने चारों बच्चियों को बुलाकर इस बारे में पूछा। प्रिंसिपल ने बताया कि, उनसे पूछा गया कि क्या उन्होंने टीचर के लिए ऐसी कोई बात कही है, जिससे उन्हें दुख पहुंचा हो। उन्होंने बच्चियों को शिक्षकों और बड़ों का सम्मान करने की समझाइश भी दी। प्रिंसिपल के मुताबिक, बच्चियां चुप रहीं और उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया।
इसके बाद छठवीं कक्षा के उन बच्चों को बुलाया गया, जिन्होंने टीचर के लिए अपशब्द कहे जाने की शिकायत की थी। प्रिंसिपल ने कहा कि इसके बाद बच्चियों को अगले दिन अपने माता-पिता के साथ स्कूल आने के लिए कहा गया था। उन्होंने बच्चियों को प्रताड़ित करने के आरोप से इनकार किया है। उनका कहना है कि बच्चों से बातचीत के दौरान इतनी ही बात हुई थी।
पूर्व पार्षद देवेंद्र यादव के मुताबिक, शनिवार को स्कूल में पैरेंट्स-टीचर मीटिंग थी। इसमें आकांक्षा सेन के पिता भी पहुंचे थे, लेकिन उस समय उनसे इस मामले पर कोई बात नहीं की गई। सोमवार को बच्चियों को फिर बुलाकर कहा गया कि वे अपने माता-पिता को लेकर नहीं आई हैं। उन्होंने कहा कि सोमवार शाम करीब 4 बजे आकांक्षा की मां स्कूल पहुंचीं, लेकिन उन्हें गेट से वापस भेज दिया गया। उनसे मुलाकात तक नहीं की गई। सोमवार (12 अक्टूबर) की शाम करीब साढे़ 6 से 7 बजे घर में बच्ची की लाश फंदे पर झूलते मिली।
इसके बाद मंगलवार को परिजन, स्थानीय नेता और बाकी लोग स्कूल के बाहर पहुंचे और प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी की। सरस्वती शिक्षा मंदिर स्कूल के खिलाफ टिकरापारा थाने में शिकायत की। उनका कहना है कि, स्कूल प्रबंधन का रेसीडेंस भी स्कूल कैंपस में है।
प्रबंधन के लोग अगर चाहते तो आकांक्षा की माता से बात कर लेते तो शायद बच्ची इतना बड़ा कदम नहीं उठाती। यादव ने कहा कि हो सकता है कि बच्ची को लगा हो उनके माता का अपमान हुआ है उन्हें स्कूल से भगा दिया गया है। इस बात से आहत होकर बच्ची ने ऐसा कदम उठाया हो।
परिजन के मुताबिक, शाम को ऑफिस से घर पहुंचने के बाद उन्होंने अपनी बेटी से इस बारे में पूछा। बेटी ने कहा कि पापा, ऐसी कोई बात नहीं हुई है। उन्हें दोपहर 12 से साढ़े 12 बजे के बीच स्कूल बुलाया गया था।
मीटिंग में प्रिंसिपल और स्कूल प्रबंधन के अन्य लोग मौजूद थे। जिस टीचर को लेकर टिप्पणी करने की शिकायत थी, वे भी वहां थीं, लेकिन उन्होंने कुछ नहीं कहा। उनके मुताबिक, मीटिंग में इतनी ही बात हुई थी, इसके अलावा कोई दूसरी बात नहीं हुई।
आकांक्षा पढ़ाई में अच्छी थी और हर कक्षा में फस्ट आती थी। छात्रा की मौत के बाद परिजनों ने स्कूल प्रबंधन के व्यवहार पर सवाल उठाए हैं। छात्रा की मौत के बाद परिजनों ने टिकरापारा थाने में शिकायत की है। पुलिस घटना से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रही है।