महिंद्रा स्कॉर्पियो-N की सुरक्षा पर बड़ा सवाल! भीषण हादसे में नहीं खुला एक भी एयरबैग, दो परिवारों की खुशियां उजड़ीं संबलपुर-कटक हाईवे पर दर्दनाक दुर्घटना में दो लोगों की मौत, कई घायल; दो मासूम बच्चियों के सिर से उठा पिता का साया और इक बेटी के सिर से उठा माँ का साया , महिंद्रा कंपनी की एयरबैग प्रणाली की निष्पक्ष जांच की मांग
प्रद्युम्न शुक्ल, ब्यूरो चीफ
रायपुर/ओडिशा। एक तरफ देश की बड़ी वाहन निर्माता कंपनियां आधुनिक तकनीक, मजबूत बॉडी और अत्याधुनिक सुरक्षा सुविधाओं से लैस गाड़ियों का प्रचार करती हैं, वहीं दूसरी ओर ओडिशा के संबलपुर-कटक हाईवे पर हुई एक दर्दनाक सड़क दुर्घटना ने महिंद्रा की लोकप्रिय और महंगी SUV स्कॉर्पियो-N की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। *16 अक्टूबर 2026 की रात हुई इस भीषण दुर्घटना में दो लोगों की जान चली गई, जबकि कई लोग घायल हो गए। सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि इतनी गंभीर दुर्घटना और वाहन के पलटने के बावजूद गाड़ी का एक भी एयरबैग नहीं खुला।
इस हादसे में श्रीमती पायल दासगुप्ता (42 वर्ष )और शेखर कुमार महाराज (40 वर्ष ) की मृत्यु हो गई। वहीं शेखर कुमार महाराज की पत्नी सुरभि महाराज और उनकी बड़ी बेटी नविका महराज (7 वर्ष ) जो गंभीर रूप से घायल हो गईं। परिवार के अन्य सदस्यों को भी चोटें आईं। घटना ने दो परिवारों को ऐसा गहरा जख्म दिया है, जिसकी भरपाई जीवनभर संभव नहीं है।

रायपुर से कोलकाता की यात्रा बनी जिंदगी की सबसे दर्दनाक रात
प्राप्त जानकारी के अनुसार, दिनांक 16 अक्टूबर 2026 को सुब्रोतो दासगुप्ता (51 वर्ष ), उनकी पत्नी पायल दासगुप्ता (42 वर्ष ), उनकी बेटी मिताली दासगुप्ता (21 वर्ष) तथा उनके पारिवारिक मित्र शेखर कुमार महाराज (40 वर्ष), उनकी पत्नी सुरभि महाराज (38 वर्ष)और उनकी दो बेटियां नाविका महराज (7 वर्ष ) एवं शनाया महराज (3 वर्ष ) रायपुर से कोलकाता के लिए रवाना हुए थे।

सभी लोग शेखर कुमार महाराज की महिंद्रा स्कॉर्पियो-N वाहन क्रमांक CG 04 PF 8999 में सवार थे। वाहन स्वयं शेखर कुमार महाराज चला रहे थे।
सभी लोग शाम करीब 5 बजे रायपुर से निकले थे। यात्रा सामान्य रूप से चल रही थी। रात लगभग 11:15 बजे संबलपुर से आगे संबलपुर-कटक हाईवे पर सभी ने रात्रि भोजन किया। भोजन के बाद सभी पुनः कोलकाता की ओर रवाना हुए। किसी को भी अंदाजा नहीं था कि कुछ ही मिनटों बाद यह यात्रा एक भयावह दुर्घटना में बदल जाएगी।
सामने से गलत दिशा में आ रहा था ट्रक, बचने के प्रयास में डिवाइडर से टकराई SUV
रात लगभग 11:25 से 11:30 बजे के बीच जामताल नामक स्थान के आसपास अचानक सामने से एक ट्रक गलत दिशा (Wrong Side) में आता दिखाई दिया।
सामने से आ रहे ट्रक को देखकर चालक शेखर कुमार महाराज ने संभावित टक्कर से बचने के लिए वाहन को दाहिनी ओर मोड़ा। लेकिन बताया गया है कि ट्रक भी उसी दिशा में आगे बढ़ने लगा। ऐसी अचानक और गंभीर परिस्थिति में शेखर कुमार महाराज ने ट्रक से बचने के लिए गाड़ी को और दाहिनी ओर मोड़ने का प्रयास किया।

इसी दौरान महिंद्रा स्कॉर्पियो-N डिवाइडर से जोरदार टकरा गई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि वाहन हवा में उछल कर इक राउंड घूमी और अनियंत्रित होकर पलट गई और सड़क के दूसरी ओर उल्टी अवस्था में जा गिरा।वाहन की डिवाइडर से टक्कर इतनी जोरदार थी कि श्रीमती पायल दासगुप्ता दाहिने दरवाज़े के खिड़की के कांच को तोड़ते हुए सड़क के दूसरी ओर जा गिरी
देखते ही देखते परिवार के सात सदस्यों की यात्रा चीख-पुकार और अफरा-तफरी में बदल गई। दुर्घटना के दौरान सुब्रोतो दासगुप्ता के मोबाइल (आई फ़ोन 16) से फ़ोन में आपातकालीन सुविधा ऐक्टिव होने के कारण स्वतः डिजास्टर नम्बर पर आपातकालीन कॉल भी चला गया।
अंदर फंसे थे दोनों परिवार के बाक़ी सदस्य कुछ समय बाद जब सुब्रोतो दासगुप्ता को होश आया, तो उन्होंने देखा कि उनकी पत्नी सड़क पर पड़ी हुई हैं। उनकी बेटी मिताली वाहन के पिछले हिस्से में फंसी हुई थी और दर्द से चिल्ला रही थी। शेखर कुमार महाराज की छोटी बेटी भी वाहन के अंदर थी। उसे एक उंगली में चोट आई थी। बड़ी बेटी का हाथ गाड़ी में फ़सने के कारण हाथ में गहरी चोंट आई ।
इस भयावह स्थिति में सुब्रोतो दासगुप्ता ने सबसे पहले स्वयं को संभाला। उन्होंने अपनी सीट बेल्ट खोली और वाहन के पीछे का शीशा टूटने के कारण बने रास्ते से अपनी बेटी को बाहर निकलने के लिए कहा। बाहर मौजूद एक युवक की मदद से उन्होंने शेखर कुमार महाराज की छोटी बेटी को भी सुरक्षित बाहर निकलवाया। इसके बाद वे स्वयं भी टूटे हुए शीशे से बाहर निकले।
उन्होंने तत्काल पुलिस और एंबुलेंस को सूचना दी। घटनास्थल पर मौजूद स्थानीय लोगों ने भी बचाव कार्य में मदद की और वाहन में फंसी मिताली को बाहर निकाला। शेखर कुमार महाराज की पत्नी सुरभि महाराज को भी लोगों की मदद से बाहर निकाला गया।
शेखर कुमार महाराज को बचाने के लिए किया गया संघर्ष
इस हादसे का सबसे दर्दनाक पहलू यह था कि शेखर कुमार महाराज वाहन के सीट बेल्ट को लोगों के द्वारा ना खोल पाने के कारण अंदर ही बेहोशी की हालत में फंसे हुए थे।
सुब्रोतो दासगुप्ता और घटनास्थल पर मौजूद लोगों ने उन्हें बाहर निकालने का काफी प्रयास किया, लेकिन उनकी सीट बेल्ट का बकल अंदर की ओर फंस गया था, जिसके कारण उसे खोलने में कठिनाई हो रही थी।
लोगों ने वाहन को सीधा करने का प्रयास भी किया, ताकि शेखर कुमार महाराज को बाहर निकाला जा सके। लेकिन सीट बेल्ट फंसे होने के कारण उन्हें निकालना आसान नहीं था।
इस बीच सुब्रोतो दासगुप्ता अपनी पत्नी पायल के पास पहुंचे। उन्होंने उन्हें सीधा किया और उठाने का प्रयास किया। उस समय पायल जी ने अपनी आंखें खोलीं और कुछ बोलने की कोशिश की। सुब्रोतो जी को लगा कि शायद उनकी पत्नी की स्थिति ठीक है और वे बच जाएंगी। लेकिन कुछ ही देर बाद जब वे दोबारा अपनी पत्नी को देखे तो उनके मुंह से सफेद झाग निकल रहा था। स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही थी।
लगभग रात 1:30 बजे पहुंची पुलिस और एंबुलेंस, एम्बुलेंस के विलंब से पहुँचने के कारण दो लोगों ने तोड़ा दम
लगभग रात 1:30 बजे पुलिस और एंबुलेंस घटनास्थल पर पहुंचीं। पहली एंबुलेंस में पायल दासगुप्ता, उनकी बेटी मिताली और शेखर कुमार महाराज की दोनों बेटियों को अस्पताल के लिए रवाना किया गया।
कुछ समय बाद दूसरी एंबुलेंस पहुंची, इस दौरान सुब्रोतो दासगुप्ता एवं पुलिस व अन्य मौजूद स्थानीय लोगों की सहायता से बड़ी मसक्कत के बाद शेखर कुमार महाराज को गाड़ी के सीट बेल्ट को निकाल कर गाड़ी से बाहर निकालकर सुब्रतो दासगुप्ता के साथ शेखर महराज की पत्नी सुरभि महराज को अस्पताल ले जाया गया।
अस्पताल पहुंचने से पहले ही सुब्रोतो दासगुप्ता की बेटी ने उन्हें फोन कर बताया कि उनकी मां पायल दासगुप्ता अब इस दुनिया में नहीं रहीं।
अस्पताल पहुंचने पर चिकित्सकीय अधिकारियों ने पायल दासगुप्ता एवं शेखर कुमार महाराज को मृत घोषित कर दिया।
इस प्रकार एक ही दुर्घटना में दो लोगों की जान चली गई और दो परिवारों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।
रायपुर स्थित कालड़ा अस्पताल में जिंदगी से संघर्ष कर रही हैं मां-बेटी
दुर्घटना में शेखर कुमार महाराज की पत्नी सुरभि महाराज और उनकी बड़ी बेटी नविका गंभीर रूप से घायल हुई हैं। जानकारी के अनुसार, दोनों का उपचार कालड़ा अस्पताल में जारी है। परिवार के अन्य सदस्यों को भी चोटें आई हैं।
एक ओर शेखर कुमार महाराज की पत्नी अपने पति को खोने के दर्द से गुजर रही हैं, वहीं उनकी दोनों मासूम बच्चियों के सिर से पिता का साया उठ चुका है। दूसरी ओर पायल दासगुप्ता के निधन से उनकी बेटी और उनका परिवार भी गहरे सदमे में है।
इस दुर्घटना ने केवल दो जिंदगियां ही नहीं छीनीं, बल्कि कई लोगों के भविष्य, सपनों और पारिवारिक खुशियों को भी प्रभावित कर दिया है।
सबसे बड़ा और गंभीर सवाल: आखिर क्यों नहीं खुले महिंद्रा स्कॉर्पियो-N के एयरबैग?
इस पूरी घटना में सबसे अधिक चिंता का विषय महिंद्रा स्कॉर्पियो-N के इक भी एयरबैग का नहीं खुलना है।
महिंद्रा स्कॉर्पियो-N को कंपनी की आधुनिक और प्रीमियम SUV के रूप में जाना जाता है। ग्राहक इस प्रकार के वाहन को खरीदने के लिए लाखों रुपये खर्च करते हैं। उनके मन में यह विश्वास रहता है कि वाहन में उपलब्ध सुरक्षा सुविधाएं किसी भी अप्रत्याशित दुर्घटना के समय उनके परिवार की सुरक्षा में मदद करेंगी।
लेकिन जब इतनी गंभीर दुर्घटना में वाहन डिवाइडर से टकराकर हवा में उछाल मारी और घूमकर पलट जाती है और उसके बावजूद एक भी एयरबैग सक्रिय नहीं होता, तो स्वाभाविक रूप से वाहन की सुरक्षा प्रणाली पर सवाल उठना लाजिमी है।
यहां सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि क्या वाहन की एयरबैग प्रणाली सही तरीके से काम कर रही थी? क्या क्रैश सेंसर और एयरबैग कंट्रोल यूनिट में कोई तकनीकी खराबी थी?
क्या वाहन की निर्माण गुणवत्ता और सुरक्षा प्रणाली की जांच सही तरीके से की गई थी?
एयरबैग का सक्रिय होना टक्कर की दिशा, तीव्रता, सेंसर से प्राप्त संकेत और सिस्टम की निर्धारित कार्यप्रणाली पर निर्भर करता है। इसलिए बिना तकनीकी जांच के किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा। लेकिन इतनी भीषण दुर्घटना में एक भी एयरबैग का नहीं खुलना अपने आप में एक गंभीर जांच का विषय है।
क्या एयरबैग खुलने से बच सकती थीं दो जिंदगियां?
यह सवाल आज हर उस व्यक्ति के मन में उठ रहा है, जो इस दुर्घटना के बारे में जान रहा है।
क्या यदि दुर्घटना के समय एयरबैग सक्रिय होते, तो पायल दासगुप्ता और शेखर कुमार महाराज की जान बचाई जा सकती थी? क्या उनकी चोटों की गंभीरता कम हो सकती थी? क्या वाहन की सुरक्षा प्रणाली ने निर्धारित परिस्थितियों में सही तरीके से काम किया?
इन सवालों का जवाब केवल वैज्ञानिक और निष्पक्ष तकनीकी जांच से ही मिल सकता है।
यह कहना अभी उचित नहीं होगा कि एयरबैग खुलने से दोनों की जान निश्चित रूप से बच जाती। लेकिन यह जरूर आवश्यक है कि कंपनी और संबंधित जांच एजेंसियां इस बात का स्पष्ट जवाब दें कि दुर्घटना के दौरान एयरबैग क्यों नहीं खुले।
महिंद्रा कंपनी की जवाबदेही तय करने की उठी मांग
: इस दुर्घटना के बाद महिंद्रा एंड महिंद्रा कंपनी से मांग की जानी चाहिए कि वह मामले को गंभीरता से लेते हुए दुर्घटनाग्रस्त वाहन की स्वतंत्र तकनीकी जांच कराए।
जांच में निम्नलिखित बिंदुओं को विशेष रूप से शामिल किया जाना चाहिए:
1. वाहन की एयरबैग कंट्रोल यूनिट (ACU) की विस्तृत जांच।
2. सभी क्रैश सेंसर और एयरबैग वायरिंग की जांच।
3. सीट बेल्ट लॉकिंग सिस्टम एवं प्री-टेंशनर की जांच।
4. वाहन में उपलब्ध EDR एवं अन्य इलेक्ट्रॉनिक क्रैश डेटा को सुरक्षित रखना और उसका विश्लेषण करना।
5. दुर्घटना के समय वाहन की गति, टक्कर की दिशा और प्रभाव का वैज्ञानिक अध्ययन।
6. यह पता लगाना कि एयरबैग सिस्टम में कोई तकनीकी या निर्माण संबंधी दोष तो नहीं था।
7. जांच की निष्पक्ष रिपोर्ट पीड़ित परिवार को उपलब्ध कराना।
8. यदि तकनीकी खामी या निर्माण संबंधी दोष प्रमाणित होता है, तो कंपनी की जवाबदेही तय कर पीड़ित परिवार को उचित सहायता एवं मुआवजा दिलाना।
साथ ही पुलिस और संबंधित परिवहन एवं वाहन सुरक्षा अधिकारियों को भी दुर्घटना की परिस्थितियों तथा वाहन की सुरक्षा प्रणाली की जांच करानी चाहिए।
यह केवल एक परिवार का मामला नहीं, हजारों वाहन मालिकों की सुरक्षा का सवाल है
आज देश में लाखों लोग अपनी मेहनत की कमाई से महंगी और आधुनिक गाड़ियां खरीदते हैं। वे कंपनियों के सुरक्षा संबंधी दावों पर भरोसा करते हैं और अपने परिवार के साथ लंबी यात्राएं करते हैं।
ऐसे में यदि किसी गंभीर दुर्घटना में वाहन की सुरक्षा प्रणाली के काम करने पर सवाल उठते हैं, तो उसकी निष्पक्ष जांच होना अत्यंत आवश्यक है।
किसी भी वाहन निर्माता कंपनी की सबसे बड़ी जिम्मेदारी केवल वाहन का निर्माण और बिक्री करना नहीं, बल्कि ग्राहकों को सुरक्षित वाहन उपलब्ध कराना भी है।
यदि इस मामले में किसी प्रकार की तकनीकी खामी या निर्माण संबंधी दोष सामने आता है, तो कंपनी को उसकी जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाने चाहिए, ताकि भविष्य में किसी दूसरे परिवार को ऐसी पीड़ा से न गुजरना पड़े।
दो परिवारों के लिए कभी न भरने वाला जख्म
16 अक्टूबर की वह रात दो परिवारों के लिए कभी न भूल पाने वाला दर्द बन गई। रायपुर से कोलकाता के लिए निकले लोग अपनी मंजिल तक पहुंचने का सपना लेकर चले थे, लेकिन रास्ते में ही एक भयावह दुर्घटना ने सब कुछ बदल दिया।
पायल दासगुप्ता और शेखर कुमार महाराज अब इस दुनिया में नहीं हैं। पीछे रह गए उनके परिवार, रिश्तेदार और मासूम बच्चे आज उस अपूरणीय क्षति का
सामना कर रहे हैं, जिसे शब्दों में व्यक्त करना कठिन है।
अब आवश्यकता केवल संवेदना व्यक्त करने की नहीं, बल्कि दुर्घटना के हर पहलू की निष्पक्ष जांच कराने और सच्चाई सामने लाने की है।
महिंद्रा कंपनी को भी आगे आकर इस मामले में अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए और स्पष्ट करना चाहिए कि इतनी भीषण दुर्घटना के बावजूद स्कॉर्पियो-N का एक भी एयरबैग क्यों नहीं खुला।
आखिरकार सवाल केवल एक गाड़ी के एयरबैग का नहीं, बल्कि उन परिवारों की सुरक्षा और भरोसे का है, जो अपनी जिंदगी की सबसे अनमोल पूंजी—अपने परिवार—को लेकर इन वाहनों में सफर करते हैं।
धटना स्थल पर आपातकालीन सुविधाओं का अत्यधिक विलंब से पहुँचना
उक्त सड़क दुर्घटना में एम्बुलेंस का अत्यधिक लेट से पहुंचने के कारण 2 लोगों की जान चली गई ।
अगर समय रहते उनको अस्पताल पहुँचा दिया जाता और सही समय पर उपचार मिल जाता तो शायद उन दोनों को बचाया जा सकता था । यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण बात है साथ ही आपातकालीन सुविधाओं की पोल खुलते नज़र आ रही है ।