नेपाल–भारत पर्यटन सहयोग को नई ऊँचाई देने की पहल: नेपाल–भारत पर्यटन परिषद् की स्थापना दोनों देशों के ऐतिहासिक संबंधों, खुली सीमा और विशाल पर्यटन बाजार को अवसरों में बदलने का उद्देश्य
परिकल्पनाकार: सोम नाथ सापकोटा
नेपाल–भारत पर्यटन परिषद् (NITC) स्थापना अभियान – 2026
नेपाल और भारत के बीच सदियों से कायम ऐतिहासिक, धार्मिक, सांस्कृतिक, सामाजिक तथा आर्थिक संबंधों को पर्यटन के माध्यम से और अधिक मजबूत बनाने के उद्देश्य से नेपाल–भारत पर्यटन परिषद् (Nepal–India Tourism Council – NITC) की स्थापना की परिकल्पना प्रस्तुत की गई है। दोनों देशों के निकट संबंधों, लगभग 1,781 किलोमीटर लंबी खुली सीमा और 1.4 अरब से अधिक आबादी वाले विशाल बाजार को पर्यटन विकास के साझा अवसर में बदलना इस पहल का मुख्य लक्ष्य है।

नेपाल और भारत दोनों देशों में प्राकृतिक सुंदरता, धार्मिक एवं आध्यात्मिक स्थल, ऐतिहासिक धरोहर, सांस्कृतिक विविधता, वन्यजीव, साहसिक पर्यटन तथा स्वास्थ्य और योग पर्यटन की अपार संभावनाएँ हैं। नेपाल के हिमालय, झीलें, ट्रेकिंग मार्ग, भगवान बुद्ध की जन्मस्थली लुम्बिनी, पशुपतिनाथ, मुक्तिनाथ, जनकपुर तथा चितवन जैसे पर्यटन स्थल और भारत के बोधगया, सारनाथ, कुशीनगर, अयोध्या, वाराणसी, हरिद्वार तथा ऋषिकेश जैसे धार्मिक एवं सांस्कृतिक स्थलों को जोड़कर संयुक्त पर्यटन को बढ़ावा दिया जा सकता है।
प्रस्तावित परिषद् नेपाल और भारत के बीच पर्यटन व्यवसाय, निवेश, बाजार विस्तार, सूचना आदान-प्रदान तथा व्यावसायिक साझेदारी के लिए एक साझा अंतरराष्ट्रीय मंच के रूप में कार्य करेगी। इसकी सदस्यता किसी एक देश की नागरिकता या भौगोलिक सीमा तक सीमित नहीं होगी। विश्वभर में रहने वाले नेपाली और भारतीय मूल के लोग, गैरआवासीय नेपाली (NRN), गैरआवासीय भारतीय (NRI), पर्यटन व्यवसायी, होटल एवं रिसॉर्ट संचालक, ट्रैवल एवं टूर ऑपरेटर, निवेशक, पर्यटन विशेषज्ञ, शोधकर्ता, लेखक, पत्रकार, मीडिया कर्मी, प्राध्यापक, युवा तथा पर्यटन में रुचि रखने वाले सभी इच्छुक व्यक्ति परिषद् के विधान और सदस्यता नीति के अनुसार इसमें सहभागी बन सकेंगे।

परिषद् का प्रस्तावित केंद्रीय कार्यालय नेपाल के भरतपुर, चितवन में रहेगा। संस्था को नेपाल और भारत दोनों देशों के प्रचलित कानूनों एवं आवश्यक प्रक्रियाओं के अनुसार उपयुक्त कानूनी संरचना के तहत पंजीकृत और संचालित करने की योजना है। इस उद्देश्य से नेपाल स्थित भारतीय दूतावास, भारत स्थित नेपाली दूतावास, नेपाल पर्यटन बोर्ड, भारत के संबंधित पर्यटन निकायों, स्थानीय सरकारों, पर्यटन व्यवसायी संगठनों तथा निजी क्षेत्र के साथ सहयोग और समन्वय किया जाएगा। परिषद् को एक स्वतंत्र, गैर-सरकारी और गैर-राजनीतिक संस्था के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव है। संबंधित सरकारी निकायों के साथ सहयोग संस्थागत संवाद और आवश्यक स्वीकृति के आधार पर किया जाएगा।
परिषद् के प्रमुख कार्यक्रमों में नेपाल और भारत के विभिन्न शहरों में पर्यटन प्रचार अभियान, पर्यटन रोड शो, पर्यटन व्यवसायियों के बीच बी2बी (B2B) बैठकें, पर्यटन मेले, परिचयात्मक यात्राएँ (FAM Tours), पत्रकारों एवं पर्यटन लेखकों के भ्रमण, डिजिटल प्रचार-प्रसार तथा संयुक्त पर्यटन पैकेजों का निर्माण प्राथमिकता में रहेगा। नेपाल के पर्यटन स्थलों को भारतीय बाजार में और भारत के पर्यटन स्थलों को नेपाली तथा अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रचारित करना इसका प्रमुख उद्देश्य होगा।
विशेष रूप से बौद्ध पर्यटन सर्किट के अंतर्गत लुम्बिनी, कपिलवस्तु, कुशीनगर, सारनाथ और बोधगया को जोड़ा जा सकता है। रामायण सर्किट के अंतर्गत जनकपुर, अयोध्या, वाराणसी तथा अन्य संबंधित धार्मिक स्थलों को शामिल किया जा सकता है। इसी प्रकार हिमालयी पर्यटन, आध्यात्मिक पर्यटन, प्राकृतिक एवं वन्यजीव पर्यटन, सांस्कृतिक विरासत तथा योग एवं वेलनेस पर्यटन के संयुक्त पैकेज विकसित किए जा सकते हैं। पर्यटकों के समय और रुचि के अनुसार 3, 5, 7, 10 और 14 दिनों के पर्यटन पैकेज तैयार करने का लक्ष्य भी रखा गया है।
नेपाल–भारत पर्यटन विस्तार के लिए सीमावर्ती क्षेत्रों में पर्यटक-अनुकूल सुविधाएँ, यातायात एवं हवाई संपर्क, पर्यटक वाहनों की आवाजाही, सीमा संबंधी प्रक्रियाएँ, यात्रा सूचना, सुरक्षा तथा आपातकालीन सहायता जैसे विषय महत्वपूर्ण हैं। इन विषयों पर संबंधित सरकारी निकायों के समक्ष तथ्य-आधारित सुझाव और नीतिगत सिफारिशें प्रस्तुत करने के लिए परिषद् के अंतर्गत नीति एवं पैरवी समिति गठित करने का प्रस्ताव है। इससे दोनों देशों के पर्यटन व्यवसायियों के सामने आने वाली व्यावहारिक समस्याओं की पहचान और उनके समाधान के लिए संवाद का वातावरण तैयार होगा।
पर्यटन पत्रकारिता, लेखन, शोध और संचार को भी परिषद् महत्वपूर्ण प्राथमिकता देगी। नेपाल और भारत के पर्यटन लेखकों तथा मीडिया कर्मियों के बीच आदान-प्रदान, पर्यटन संबंधी लेख, वृत्तचित्र, फोटो प्रदर्शनी, प्रकाशन और डिजिटल सामग्री के माध्यम से दोनों देशों के पर्यटन स्थलों की सकारात्मक पहचान को व्यापक बनाया जा सकेगा। इसके साथ ही पर्यटन शिक्षा, कौशल विकास, युवा सहभागिता, स्थानीय एवं सामुदायिक पर्यटन तथा सतत पर्यटन को बढ़ावा देने वाले कार्यक्रम भी संचालित किए जाएंगे।
पर्यटन में निवेश की नई संभावनाओं की पहचान करने के लिए होटल, रिसॉर्ट, परिवहन, साहसिक पर्यटन, वेलनेस, सामुदायिक पर्यटन तथा अन्य पर्यटन अवसंरचनाओं में निवेशकों के बीच सहयोग और व्यावसायिक संबंधों का विस्तार किया जाएगा। इसके लिए पर्यटन निवेश सम्मेलन, व्यावसायिक बैठकें तथा साझेदारी कार्यक्रम आयोजित किए जा सकते हैं।
परिषद् का एक अन्य महत्वपूर्ण प्रस्ताव प्रत्येक छह महीने में नेपाल या भारत में बारी-बारी से प्रमुख पर्यटन सम्मेलन, शिखर बैठक अथवा व्यावसायिक पर्यटन कार्यक्रम आयोजित करना है। इन प्रमुख आयोजनों के बीच पर्यटन प्रचार, व्यावसायिक बैठकें, परिचयात्मक यात्राएँ, शोध, नीतिगत संवाद तथा संयुक्त पर्यटन पैकेजों के निर्माण जैसी गतिविधियाँ निरंतर जारी रहेंगी। इससे परिषद् केवल औपचारिक कार्यक्रम आयोजित करने वाली संस्था न रहकर पूरे वर्ष सक्रिय रहने वाला पर्यटन सहयोग मंच बन सकेगी।
इस अभियान को सफल बनाने के लिए नेपाल और भारत दोनों देशों के पर्यटन व्यवसायियों, संगठनों, होटल एवं रिसॉर्ट संचालकों, ट्रैवल एवं टूर ऑपरेटरों, पर्यटन विशेषज्ञों, निवेशकों, पत्रकारों, लेखकों, शोधकर्ताओं तथा विश्वभर में फैले नेपाली और भारतीय समुदाय की सक्रिय भागीदारी आवश्यक होगी। संस्था की भावी संरचना में दोनों देशों का संतुलित प्रतिनिधित्व, अंतरराष्ट्रीय सलाहकार परिषद्, कार्यसमिति, विभिन्न विषयगत समितियाँ तथा देश एवं क्षेत्रीय समन्वयकों की व्यवस्था करने का प्रस्ताव है।
नेपाल–भारत पर्यटन परिषद् की परिकल्पना केवल किसी एक देश के पर्यटन प्रचार तक सीमित नहीं है। इसका मूल उद्देश्य दोनों देशों के पर्यटन स्थलों, व्यवसायियों, समुदायों और बाजारों को जोड़कर पारस्परिक लाभ, रोजगार, निवेश, व्यावसायिक अवसर तथा आर्थिक समृद्धि की नई संभावनाएँ पैदा करना है। इस पहल को सफल बनाने के लिए इच्छुक व्यक्तियों और संस्थाओं से स्थापना अभियान में शामिल होकर अपने अनुभव, ज्ञान, कौशल, नेटवर्क और योगदान के माध्यम से सहयोग करने का आह्वान किया गया है।
हमारा उद्देश्य केवल नेपाल को भारत में या भारत को नेपाल में प्रचारित करना नहीं है; बल्कि दोनों देशों के पर्यटन उद्योग को जोड़कर पारस्परिक लाभ, व्यावसायिक अवसर, रोजगार और आर्थिक समृद्धि की नई संभावनाएँ पैदा करना है।