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दुर्ग- सरकारी हॉस्टलों के स्टूडेंट्स बारिश में धरने पर बैठे

दुर्ग-भिलाई

दुर्ग जिले में 5 से ज्यादा सरकारी हॉस्टलों के कॉलेज स्टूडेंट्स ने खराब व्यवस्था और कथित गड़बड़ी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। छात्र-छात्राओं ने मालवीय चौक पर बारिश के बीच प्रदर्शन किया। उनका कहना है कि छात्रावासों में लंबे समय से जरूरी सुविधाओं की कमी है, लेकिन अधिकारी उनकी समस्याओं पर ध्यान नहीं दे रहे हैं।

स्टूडेंट्स ने कलेक्टर को शिकायत देकर जिले के सभी छात्रावासों की व्यवस्था, निर्माण और मरम्मत के नाम पर खर्च की गई सरकारी राशि की जांच कराने की मांग की है। इसके अलावा छात्रावासों में मिलने वाला भोजन भत्ता 1200 रुपए से बढ़ाकर 3000 रुपए महीना करने की मांग की गई है।

स्टूडेंट्स की सबसे बड़ी मांग भोजन के लिए मिलने वाली राशि बढ़ाने की है। शिकायत के मुताबिक, अभी हर छात्र को खाने के लिए महीने में 1200 रुपए दिए जाते हैं। स्टूडेंट्स का कहना है कि महंगाई के समय इतनी कम राशि में अच्छा और भरपेट खाना देना मुश्किल है। उन्होंने इसे बढ़ाकर 3000 रुपए महीना करने की मांग की है।

स्टूडेंट्स का कहना है कि कॉलेजों में पूरे 12 महीने पढ़ाई होती है, लेकिन छात्रावासों में केवल 10 महीने का ही भोजन भत्ता मिलता है। बाकी 2 महीने खाने और दूसरी जरूरतों के लिए उन्हें खुद व्यवस्था करनी पड़ती है। इसलिए उन्होंने पूरे 12 महीने भोजन भत्ता देने की मांग की है।

स्टूडेंट्स ने छात्रावासों में टेबल, कुर्सी, पलंग, चादर, झाड़ू, पोछा, लाइट और पंखे जैसी जरूरी चीजें देने की मांग की है। बारिश के समय परिसर में पानी भरने की समस्या दूर करने के लिए पानी निकासी की व्यवस्था करने को भी कहा है।

स्टूडेंट्स का आरोप है कि पिछले करीब एक साल से छात्रावासों में कोई बड़ा निर्माण या मरम्मत का काम नहीं हुआ है, जबकि रखरखाव के नाम पर सरकारी पैसे खर्च किए गए हैं। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई करने की मांग की है।

छात्रों ने शिकायत की कॉपी मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री और जिले के प्रभारी मंत्री विजय शर्मा, आदिम जाति विकास मंत्री रामविचार नेताम, अनुसूचित जाति विकास मंत्री गुरु खुशवंत साहब और विभाग के सचिव को भी भेजी है।

आदिम जाति कल्याण विभाग के सहायक आयुक्त अविनाश श्रीवास ने कहा कि हॉस्टल की ये बुनियादी मांगें हैं। गर्मी की छुट्टियां होने के कारण 10 महीने का भोजन खर्च दिया जाता था। लेकिन अब सेमेस्टर सिस्टम हो गया है, तो इस बारे में विचार करेंगे। वार्डन की नियुक्ति की प्रक्रिया भी राज्य स्तर से होनी है। शिक्षकों के रिक्त पदों की पूर्ति भी कराई जाएगी।

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