जिला

स्वयं सहायता समूहों से बदली महिलाओं की तकदीर - सूरजपुर की रिंकू और रीता बनी आत्मनिर्भरता की मिसाल सफलता की कहानीे

बिहान छत्तीसगढ़ प्रतापपुर संवाददाता सुरज निर्मलकर


सूरजपुर/25 जुलाई 2025/ कलेक्टर सूरजपुर श्री एस. जयवर्धन के मार्गदर्शन एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत श्रीमती कमलेश नंदिनी साहू के सक्रिय प्रयासों से जिले में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत महिला सशक्तिकरण की दिशा में उल्लेखनीय परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से ग्रामीण महिलाएं आज आर्थिक और सामाजिक रूप से आत्मनिर्भर बन रही हैं। इसी प्रेरणादायक यात्रा की दो मिसालें हैं रिंकु गुप्ता एवं रीता मांझी, जिन्होंने साधारण गृहिणी से सफल उद्यमी बनने का प्रेरक सफर तय किया है।

 रिंकु गुप्ता- पोल्ट्री फार्मिंग के जरिये आर्थिक मजबूती

ग्राम पंचायत झासी की निवासी रिंकु गुप्ता, लक्ष्मी महिला स्वयं सहायता समूह की सक्रिय सदस्य हैं। एक समय वे पूरी तरह से गृहकार्य तक सीमित थीं। समूह से जुड़ने के बाद उन्होंने वित्तीय अनुशासन, बचत और सामूहिकता का महत्व समझा। समूह के माध्यम से उन्हें ₹2,00,000 का बैंक लिंकेज ऋण प्राप्त हुआ, जिससे उन्होंने पोल्ट्री फार्मिंग (मुर्गी पालन) का व्यवसाय प्रारंभ किया।

मुर्गियों की देखभाल, आहार प्रबंधन और बिक्री व्यवस्था को कुशलतापूर्वक संचालित करते हुए आज रिंकु को हर माह ₹15,000 से ₹20,000 की शुद्ध आय हो रही है। इस आमदनी से उन्होंने अपने बच्चों की पढ़ाई, पारिवारिक खर्च और भविष्य के लिए बचत की आधारशिला रखी है।

 रीता मांझी- दोहरी उद्यमिता से दोहरी कामयाबी

ग्राम पंचायत संजयनगर की रीता मांझी, राधिका महिला स्वयं सहायता समूह की सक्रिय सदस्य हैं। समूह से जुड़ने से पहले वे पूरी तरह से घरेलू जिम्मेदारियों तक सीमित थीं। एसएचजी से मिली जानकारी, प्रशिक्षण और आर्थिक सहायता से उन्होंने स्वरोजगार की दिशा में कदम बढ़ाया।

उन्हें सीआईएफ से ₹60,000, बैंक लिंकेज से ₹50,000 और मुद्रा लोन से ₹2,00,000 की राशि प्राप्त हुई, कुल मिलाकर ₹3,10,000 की सहायता से उन्होंने मनिहारी दुकान और सिलाई कार्य प्रारंभ किया। दोनों व्यवसायों को वे दक्षता से संचालित कर रही हैं और प्रतिमाह ₹15,000 से ₹20,000 की आय अर्जित कर रही हैं। रीता ने न केवल आर्थिक मजबूती पाई है, बल्कि समाज में अपनी पहचान और आत्मविश्वास भी मजबूत किया है।

 निष्कर्षः

रिंकु गुप्ता और रीता मांझी की यह सफलता की कहानियाँ इस बात की सशक्त मिसाल हैं कि जब ग्रामीण महिलाओं को सही मार्गदर्शन, प्रशिक्षण और वित्तीय संसाधन मिलते हैं, तब वे अपने जीवन में सार्थक बदलाव ला सकती हैं। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से सूरजपुर जिले की महिलाएं आज आत्मनिर्भर भारत की मजबूत आधारशिला रख रही हैं।

Leave Your Comment

Click to reload image