पुरी रथयात्रा, तीनों रथ गुंडिचा मंदिर पहुंचे:अब तीनों देवता 7 दिन मौसी के घर रहेंगे, दूसरे दिन 9 लाख श्रद्धालु जुटे
पुरी
ओडिशा के पुरी में भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा के रथ शुक्रवार दोपहर श्री गुंडिचा मंदिर पहुंच गए। अब तीनों देवता अगले 7 दिन अपनी मौसी के घर रहेंगे। इसके साथ ही रथयात्रा पूरी हुई। परंपरा के अनुसार, मूर्तियां रात भर अपने रथों पर ही रहेंगी और शनिवार शाम को उन्हें श्री गुंडिचा मंदिर ले जाया जाएगा, जिसे इन भाई-बहनों का जन्मस्थान माना जाता है।
वापसी रथ यात्रा, जिसे बहुडा यात्रा कहा जाता है, 24 जुलाई को होगी।
इसके पहले शुक्रवार को सुबह करीब 9.45 बजे भगवान बलभद्र के रथ को खींचने के साथ रथ यात्रा दूसरे दिन शुरू हुई। बारिश और उमस के बीच 9 लाख श्रद्धालु फिर से रथ खींचने के लिए ग्रैंड रोड पर जुटे।
गुरुवार को पाहंडी अनुष्ठान में हुई देरी और अंधेरा होने के कारण तीनों रथ गुंडिचा मंदिर तक नहीं पहुंच सके थे। तीनों देवता रातभर अपने-अपने रथों पर ही विराजमान रहे।
बारिश और उमस के बावजूद लाखों श्रद्धालु "जय जगन्नाथ" और "हरि बोल" के जयघोष के बीच रथ खींचते रहे। ग्रैंड रोड पर झांझ, नगाड़ों, शंख और तुरहियों की गूंज के बीच श्रद्धालु नाचते-गाते नजर आए।
बारिश का पानी जमा न हो, इसके लिए ग्रैंड रोड पर विशेष इंतजाम किए गए, ताकि रथयात्रा बिना रुकावट आगे बढ़ सके।
पाहंडी के दौरान भगवान जगन्नाथ के पारंपरिक फूलों के मुकुट 'तहिया' के नहीं दिखने पर अरविंद पाधी ने बताया कि बारिश से भीगकर यह भारी हो गया था। इसलिए उसे हटा दिया गया।
उन्होंने यह भी कहा कि भगवान, बलभद्र और सुभद्रा शुक्रवार रात भी रथों पर ही रहेंगे। इसके बाद शनिवार को गुंडिचा मंदिर में प्रवेश की रस्म पूरी की जाएगी। धार्मिक मान्यता के अनुसार, गुंडिचा मंदिर को इन तीनों देवताओं का जन्मस्थान माना जाता है।
पाहंडी के दौरान भगवान जगन्नाथ के पारंपरिक फूलों के मुकुट 'तहिया' के नहीं दिखने पर अरविंद पाधी ने बताया कि बारिश से भीगकर यह भारी हो गया था। इसलिए उसे हटा दिया गया।
उन्होंने यह भी कहा कि भगवान, बलभद्र और सुभद्रा शुक्रवार रात भी रथों पर ही रहेंगे। इसके बाद शनिवार को गुंडिचा मंदिर में प्रवेश की रस्म पूरी की जाएगी। धार्मिक मान्यता के अनुसार, गुंडिचा मंदिर को इन तीनों देवताओं का जन्मस्थान माना जाता है।
- मान्यता है कि गुंडिचा मंदिर भगवान जगन्नाथ की मौसी का घर है। साल में सिर्फ एक बार रथयात्रा में भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा यहां आते हैं। तीनों देवता यहां 7 दिन तक विराजमान रहते हैं।इसके बाद आठवें दिन बहुड़ा यात्रा के जरिए वापस जगन्नाथ मंदिर लौटते हैं।
- मान्यता है कि राजा इंद्रद्युम्न ने ही जगन्नाथ मंदिर का निर्माण कराया था। इसलिए मंदिर का नाम राजा इंद्रद्युम्न की पत्नी रानी गुंडिचा के नाम पर पड़ा। साल में सिर्फ रथयात्रा के दौरान 7 दिन तक भगवान जगन्नाथ यहां विराजमान होते हैं।