राजधानी

परीक्षा ड्यूटी से लेकर शुल्क वसूली तक सवालों के घेरे में विद्यालय, पखवाड़ा बीता फिर भी कार्रवाई नहीं

प्रभारी प्राचार्य बनने के बाद  कक्षाओं से दूरी, प्रशासनिक लापरवाही पर उठे गंभीर सवाल—आखिर किसकेv संरक्षण में चल रहा है पूरा मामला, और लापरवाह प्रभारी प्राचार्य पर कार्रवाई कब?


 गोविंद राम ब्यूरो चीफ,


बलौदाबाजार

जिला मुख्यालय स्थित जिले के प्रमुख स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट हिन्दी माध्यम विद्यालय, शासकीय पं. चक्रपाणी शुक्ल उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में कथित लापरवाही और नियमों की अनदेखी के कई गंभीर मामले सामने आने के बावजूद अब तक किसी ठोस कार्रवाई का न होना शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े कर रहा है।

प्रभारी प्राचार्य वंदिनी श्रीवास्तव पर परीक्षा ड्यूटी में अनुपस्थित रहने, परीक्षा अवधि के दौरान निजी कार्यक्रम में शामिल होने, निर्धारित शुल्क से अधिक राशि वसूलने, शाला परिसर में बिना स्पष्ट शासकीय प्रक्रिया के कैंटीन संचालन कराने तथा वरिष्ठता की अनदेखी कर प्रभार ग्रहण करने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। परीक्षा ड्यूटी से जुड़े मामले में विभाग द्वारा शो-कॉज नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगे जाने की बात सामने आई है, लेकिन पखवाड़ा बीत जाने के बाद भी शिकायतकर्ताओं के अनुसार अब तक कोई ठोस कार्रवाई आगे नहीं बढ़ी हैं.

प्रभारी प्राचार्य बनने के बाद  कक्षाओं से दूरी

 प्रभारी प्राचार्य बनने के बाद बच्चों को किसी भी क्लास मे नहीं  पढ़ाने भी आरोप लगा है. जबकि समय सारणी में स्पष्ट रूप से उनका नाम उल्लेखित है लेकिन प्राप्त जानकारी के अनुसार बच्चों ने बताया कि मैडम के द्वारा कभी भी क्लास नहीं लिया जाता. जबकि उनका महत्वपूर्ण विषय भूगोल है लेकिन भूगोल विषय के लिए अलग से टीचर रखा गया है जिसको बच्चों के पलकों से फीस में अधिक पैसा वसूल कर  शिक्षकों का पैसा  पिछले 2 साल से वसूला जा रहा है और इस राशि को जो अतिरिक्त शिक्षक है उसको दिया जा रहा है.   इसके बावजूद भी इस प्रकार लापरवाही बढ़ती जा रही है जिससे बच्चों का भविष्य अंधकार में हैं. आखिर इतना बड़ा लापरवाही बरतने के बावजूद भी प्रभारी प्राचार्य के ऊपर कोई कार्रवाई का न होना मिली जुली सरकार तथा उच्च संरक्षण की ओर इशारा करती है,.जबकि जिला कलेक्टर के द्वारा उनकी लापरवाही को देखते हुए नोटिस जारी की गई  जिसमें सामने दो पत्रकार भी थे जिनके द्वारा लगातार खबर चलाई जा रही है उसके बावजूद भी कार्यवाही का न होना संदेह के घेरे में है.

परीक्षा ड्यूटी में अनुपस्थिति पर निष्पक्ष जांच की मांग

शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि परीक्षा ड्यूटी के दौरान प्रभारी प्राचार्य की अनुपस्थिति को लेकर अलग-अलग और विरोधाभासी स्पष्टीकरण दिए गए हैं। मामले की निष्पक्ष जांच के लिए स्कूल परिसर, संबंधित थाना क्षेत्र तथा निजी संस्थान के सीसीटीवी फुटेज की जांच की मांग की गई है, ताकि उस दिन की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके। शिकायतकर्ताओं ने पूरी जांच प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की है।

निर्धारित शुल्क से अधिक वसूली का गंभीर आरोप

पालकों ने विद्यालय में शासन द्वारा निर्धारित शुल्क से अधिक राशि वसूले जाने का आरोप लगाया है। उनके अनुसार हाईस्कूल के लिए निर्धारित शुल्क 500 रुपये तथा हायर सेकेंडरी के लिए 550 रुपये है, जबकि कुछ पालकों से लगभग 1200 रुपये तक वसूली किए जाने की शिकायत सामने आई है। साथ ही शुल्क जमा करने के बाद रसीद न दिए जाने का भी आरोप लगाया गया है। इस प्रकार पिछले वर्ष भी शाला प्रबंधन समिति का हवाला देते हुए अवैध रूप से राशि ली गई थी. इतना ही नहीं प्राप्त जानकारी के अनुसार ओपन परीक्षा फीस में भी निर्धारित राशि से ज्यादा की राशि  लेने के आरोप लगे हैं.इन सभी बिंदुओं पर विभागीय जांच की मांग तेज हो गई है।

बिना प्रक्रिया कैंटीन संचालन पर उठे सवाल

विद्यालय परिसर में संचालित कैंटीन को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े किए गए हैं। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि शासकीय संस्थानों में कैंटीन संचालन के लिए अनुमति, पारदर्शी चयन प्रक्रिया, अनुबंध, खाद्य सुरक्षा पंजीयन और दर निर्धारण जैसी अनिवार्य प्रक्रियाओं का पालन आवश्यक होता है। ऐसे में विद्यालय में संचालित कैंटीन की वैधता और प्रक्रिया की भी जांच की मांग की जा रही है। 

वरिष्ठता की अनदेखी कर प्रभार देने का आरोप

प्रभारी प्राचार्य की नियुक्ति को लेकर भी विद्यालय के वरिष्ठ शिक्षकों में असंतोष की स्थिति बताई जा रही है। शिकायतकर्ताओं के अनुसार विद्यालय में कई वरिष्ठ व्याख्याता कार्यरत होने के बावजूद कनिष्ठ व्याख्याता को प्रभारी प्राचार्य का दायित्व सौंपा गया। इस संबंध में वरिष्ठ व्याख्याताओं द्वारा जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में 21 अगस्त 2025 को आवेदन दिए जाने का दावा किया गया है, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं होने का आरोप है।

शिकायतकर्ताओं ने संभागीय संयुक्त संचालक, लोक शिक्षण संभाग रायपुर के वर्ष 2022 के निर्देशों का हवाला देते हुए कहा है कि प्राचार्य अथवा प्रधान पाठक का पद रिक्त होने की स्थिति में नियमानुसार वरिष्ठ कर्मचारी को ही प्रभार दिया जाना चाहिए।

कुल मिलाकर कई गंभीर आरोपों के बावजूद कार्रवाई न होने से अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि शिक्षा विभाग इन मामलों की निष्पक्ष जांच कब करेगा, और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदारी तय कर सख्त कार्रवाई कब सुनिश्चित की जाएगी. या किसी उच्च अधिकारी या नेता के दबाव में मामला यूं ही ठंडा बस्ता में छोड़ दिया जाएगा आगे क्या कार्यवाही होती है  उसकी जानकारी अगले प्रकाशन में दी जाएगी,,,

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