करोड़ों खर्च लेकिन सड़क ध्वस्त, पहली बारिस, गिरसा–किसड़ा मार्ग गिरसा–किसड़ा मार्ग पर गड्ढे, डामर उखड़ा, ग्रामीणों में नाराजगी, स्वतंत्र तकनीकी जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग।
सरसींवा (सारंगढ़-बिलाईगढ़):-
कभी कीचड़ और धूल से परेशान रहने वाले गिरसा–किसड़ा मार्ग के ग्रामीणों ने जब नई सड़क बनते देखी तो लगा कि वर्षों की परेशानी अब खत्म हो गई। लगभग 4 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित 12–13 किलोमीटर लंबी सड़क क्षेत्रवासियों के लिए विकास की नई उम्मीद लेकर आई थी। लेकिन यह खुशी ज्यादा दिनों तक टिक नहीं सकी। सड़क बनने के महज 6–7 महीने बाद ही इसकी हालत देखकर लोग हैरान हैं। पहली ही बारिश ने सड़क की मजबूती की असलियत सामने ला दी है। जगह-जगह डामर उखड़ चुका है, गहरे गड्ढे बन गए हैं और उनमें पानी भर गया है। ऐसा लग रहा है मानो सड़क वर्षों पुरानी हो, जबकि इसे बने अभी कुछ ही महीने हुए हैं।
सवाल यह है कि क्या करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद सड़क इतनी कमजोर बनाई गई कि पहली ही बारिश में जवाब दे गई? यदि निर्माण कार्य पूरी गुणवत्ता और तकनीकी मानकों के अनुरूप हुआ होता, तो इतनी कम अवधि में सड़क की यह दुर्दशा शायद ही देखने को मिलती। स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क निर्माण के दौरान गुणवत्ता की अनदेखी की गई। ग्रामीणों का आरोप है कि यदि निर्माण एजेंसी और संबंधित विभाग के अधिकारियों ने समय-समय पर प्रभावी निरीक्षण किया होता, तो आज यह स्थिति नहीं बनती। लोगों का कहना है कि सड़क पर बने ये गड्ढे केवल टूटी हुई सड़क नहीं, बल्कि निर्माण व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि यह मार्ग रोजाना दोपहिया, चारपहिया और भारी वाहनों के आवागमन का प्रमुख रास्ता है। सड़क पर बने गड्ढे किसी भी समय दुर्घटना का कारण बन सकते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते मरम्मत नहीं कराई गई तो आने वाले दिनों में सड़क की स्थिति और भी खराब हो सकती है।
अब क्षेत्रवासियों की मांग है कि पूरे सड़क निर्माण की स्वतंत्र तकनीकी जांच कराई जाए, गुणवत्ता की जांच हो, यदि कहीं अनियमितता या लापरवाही पाई जाए तो दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए और सड़क की तत्काल मरम्मत कराई जाए। करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी यदि सड़क पहली ही बारिश में टूटने लगे, तो यह केवल एक सड़क का मामला नहीं, बल्कि जनता के टैक्स के पैसे के उपयोग और निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर उठता एक बड़ा सवाल है। इसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है ताकि वास्तविक कारण सामने आ सके।