क्राइम

सचिन तेंदुलकर-निर्मला सीतारमण के नाम पर 45 लाख ठगे

दुर्ग-भिलाई

छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के भिलाई में 45 लाख की ठगी का मामला सामने आया है। ठगों ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर और समाजसेवी सुधा मूर्ति के नाम के विज्ञापन दिखाकर निवेश से जुड़े कई दावे किए और एक रिटायर्ड बीएसपी कर्मचारी से पैसे ऐंठ लिए।

मामला भिलाई नगर थाना क्षेत्र का है। पुलिस ने मध्यप्रदेश के बैतूल से आरोपी विशाल नागले (24) को गिरफ्तार किया है। अभी मास्टरमाइंड की तलाश जारी है। ठगों ने बीएसपी कर्मचारी को लिंक भेजा था, जिसमें रजिस्ट्रेशन फीस, ट्रेडिंग, मार्जिन, सोने-तेल में निवेश और टैक्स के नाम पर अलग-अलग किस्तों में पैसे लिए। इस तरह कुल 45 लाख 18 हजार 998 रुपए की ठगी की।

पुलिस के मुताबिक, आरोपी विशाल 9वीं फेल है और पेशे से मजदूर है। वह साल 2020 में मजदूरी के लिए पुणे गया था। वहां पर लॉट में ऑनलाइन अकाउंट खुलवाया गया था। उसके इसी अकाउंट में ठगी के पैसे आए। हालांकि पुलिस अभी मामले की जांच कर रही है।

इसमें वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, सचिन तेंदुलकर और सुधा मूर्ति जैसे बड़े नामों का इस्तेमाल किया गया था। विज्ञापन देखकर उन्हें लगा कि यह निवेश योजना भरोसेमंद है। उन्होंने विज्ञापन में दिए लिंक पर क्लिक कर रजिस्ट्रेशन कर दिया।

रजिस्ट्रेशन के बाद उनकी बात कृतिका नाम की महिला से हुई। उसने खुद को निवेश प्रक्रिया से जुड़ा बताया। कृतिका ने पीड़ित के वरिष्ठ नागरिक होने की बात कहते हुए 18,998 रुपए रजिस्ट्रेशन फीस मांगी। पीड़ित ने ऑनलाइन यह रकम जमा कर दी। इसके बाद ठगों ने अलग-अलग बहाने बनाकर उनसे पैसे ऐंठने का सिलसिला शुरू कर दिया।

पुलिस के मुताबिक 26 मार्च को पीड़ित की बातचीत करण तनेजा नाम के व्यक्ति से कराई गई। उसने ईरान, अमेरिका और इजराइल के बीच चल रहे युद्ध का हवाला देते हुए सोने के भाव में तेजी आने की बात कही और इसमें निवेश को फायदे का सौदा बताया।

इसके बाद पीड़ित ने 27 मार्च को 25 लाख रुपए और निवेश कर दिए। वहीं 9 अप्रैल को ऑयल में निवेश के नाम पर 5 लाख रुपए और 16 अप्रैल को 4 लाख रुपए और जमा कराए। इस तरह अलग-अलग बैंक खातों में रकम जमा कराते-कराते पीड़ित द्वारा कुल 45,18,998 रुपए निवेश किए गए।

जब पीड़ित ने अपनी रकम वापस मांगी तो आरोपियों ने कहा कि उसका ट्रेडिंग अकाउंट बंद करना होगा। इसके बाद ट्रेडिंग अकाउंट में 2,71,275.68 अमेरिकी डॉलर का लाभ और मूल रकम मिलाकर रकम दिखाई गई।

पीड़ित ने करीब 2,70,000 अमेरिकी डॉलर निकालने के लिए अपने बैंक खाते की जानकारी दी। आरोपियों ने कहा कि यह क्रॉस बॉर्डर ट्रांजेक्शन है, इसलिए रकम आने में दो-तीन दिन लगेंगे।

20 अप्रैल को जब पीड़ित ने रकम के बारे में जानकारी ली तो आरोपियों ने नया पेंच डाल दिया। उन्होंने कहा कि 2,70,000 अमेरिकी डॉलर की रकम निकालने के लिए 15 प्रतिशत टैक्स, यानी 34 लाख रुपए से अधिक की राशि जमा करनी होगी।

पीड़ित ने टैक्स की रकम काटकर शेष राशि देने को कहा। इसके बाद आरोपियों ने मांग घटाकर 12 लाख रुपए कर दी और कहा कि यह राशि जमा करने के बाद आंशिक भुगतान किया जाएगा। इसके बाद समीर नाम के व्यक्ति ने भी पीड़ित से बातचीत कर टैक्स जमा करना जरूरी बताया।

22 अप्रैल को आरोपियों ने दावा किया कि पीड़ित की रकम तैयार है और टैक्स जमा करते ही भुगतान कर दिया जाएगा। इसके बाद उसे अरुणाचल प्रदेश के एक बैंक खाते में आरटीजीएस करने के लिए कहा गया।

यहीं पीड़ित को पूरे मामले पर संदेह हुआ। उसे महसूस हुआ कि ऑनलाइन ट्रेडिंग के नाम पर उसके साथ साइबर ठगी की जा रही है। इसके बाद उसने तत्काल 1930 साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराई और बैंक को भी सूचना दी।

शिकायत के आधार पर भिलाई नगर थाने में अपराध क्रमांक 217/2026 दर्ज किया गया। पुलिस ने मामले में धारा 318(4) बीएनएस के तहत केस दर्ज कर जांच शुरू की। जांच के दौरान पुलिस ने अलग-अलग बैंक खातों में हुए लेन-देन, तकनीकी सबूत और डिजिटल जानकारी खंगाली।

जांच में पुलिस को आरोपी के बारे में अहम सुराग मिले। इसके बाद पुलिस टीम आरोपी की तलाश में मध्यप्रदेश के बैतूल पहुंची, जहां से 24 वर्षीय विशाल नागले को गिरफ्तार कर लिया गया।

पुलिस ने आरोपी के पास से एक बैंक की चेकबुक, आधार कार्ड और ठगी में इस्तेमाल किया गया मोबाइल फोन जब्त किया है। आरोपी को कोर्ट में पेश कर दिया गया है।

अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि ठगी की रकम किन-किन बैंक खातों में पहुंची और इस पूरे ठगी के नेटवर्क में कितने लोग शामिल हैं।

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