क्राइम

26.87 लाख की सरकारी राशि की अनधिकृत निकासी, 10 महीने बाद FIR CM पोर्टल में शिकायत के बाद मुंगेली पुलिस ने दर्ज किया मामला, अब सवाल—आरोपी की गिरफ्तारी कब?

इमरान खोखर ब्यूरो चीफ मुंगेली 


मुंगेली। सरकारी खाते से कथित तौर पर 26 लाख 87 हजार रुपए की अनधिकृत निकासी के मामले में आखिरकार करीब 10 महीने बाद पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर ली है। मामला सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की मुंगेली शाखा से जुड़ा है, जहां आरोप है कि बैंक कर्मचारी ने अधिकारियों की आईडी का कथित दुरुपयोग कर सरकारी खाते से राशि निकाल ली थी। बैंक की आंतरिक जांच में एक कर्मचारी की भूमिका सामने आने के बाद उसे निलंबित किया गया था तथा निकाली गई राशि सरकारी खाते में वापस जमा करा दी गई थी। इसके बावजूद लंबे समय तक एफआईआर दर्ज नहीं होने को लेकर सवाल उठते रहे।

अब मुख्यमंत्री सीएम पोर्टल में शिकायत किए जाने के बाद पुलिस ने मामले में अपराध दर्ज किया है। एफआईआर के बाद मामला एक बार फिर चर्चा में है और सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब अपराध दर्ज करने में करीब 10 महीने लग गए तो आरोपी तक कानून का हाथ कब पहुंचेगा और गिरफ्तारी कब होगी?

बैंक की जांच में कर्मचारी की भूमिका सामने आई

बताया गया है कि सरकारी खाते से राशि निकाले जाने के मामले की जानकारी सामने आने के बाद बैंक स्तर पर आंतरिक जांच कराई गई। जांच में बैंक कर्मचारी टिकेश कुमार की भूमिका सामने आने की बात कही जा रही है। बैंक ने कार्रवाई करते हुए संबंधित कर्मचारी को निलंबित कर दिया और निकाली गई राशि को सरकारी खाते में वापस जमा कराया।

बैंक की जांच में कर्मचारी को जिम्मेदार माने जाने के बावजूद पुलिस में दी गई शिकायत में आरोपी का नाम स्पष्ट रूप से दर्ज नहीं किए जाने को लेकर भी सवाल उठे। यही वजह रही कि मामले में एफआईआर की प्रक्रिया लंबे समय तक आगे नहीं बढ़ सकी।

13 मार्च को आवेदन देने का दावा

मामले को लेकर अपर कलेक्टर जी.एल. यादव का कहना है कि 13 मार्च को ही थाना सिटी कोतवाली में आवेदन देकर एफआईआर दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई थी। उनका कहना था कि पुलिस आवश्यक जांच कर बैंक से संबंधित जानकारी प्राप्त कर नियमानुसार कार्रवाई करे।

वहीं, सिटी कोतवाली थाना प्रभारी कार्तिकेश्वर जांगड़े का पक्ष अलग रहा। उनका कहना था कि प्रारंभिक आवेदन में घटना से जुड़े तथ्य और आंकड़े स्पष्ट नहीं थे। पुलिस द्वारा संबंधित विभाग से बार-बार आवश्यक दस्तावेज और बैंकिंग प्रक्रिया से जुड़ी जानकारी मांगी गई। इसके बाद संशोधित दस्तावेज उपलब्ध कराए गए।

थाना प्रभारी के अनुसार शिकायत अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ दी गई थी, जबकि बैंक की जांच में एक कर्मचारी का नाम सामने आया था। ऐसे में नामित व्यक्ति के बावजूद अज्ञात के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की प्रक्रिया को लेकर पुलिस ने आपत्ति जताई।

10 महीने तक दस्तावेजों के फेर में अटका मामला

मामले में शिकायतकर्ता संदीप सिंह ठाकुर ने मुख्यमंत्री सीएम पोर्टल में शिकायत कर पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि जिस मामले में बैंक की आंतरिक जांच में कर्मचारी की भूमिका सामने आ चुकी थी, उसमें एफआईआर दर्ज करने में इतना लंबा समय नहीं लगना चाहिए था।

उनका आरोप है कि पुलिस करीब 10 महीने तक संबंधित विभाग से कभी एक दस्तावेज तो कभी दूसरा दस्तावेज मांगती रही। इसी वजह से मामला लंबा खिंचता गया। मुख्यमंत्री सीएम पोर्टल में शिकायत किए जाने के बाद आखिरकार एफआईआर दर्ज होने से अब पुलिस की पूर्व कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

एफआईआर के बाद गिरफ्तारी पर नजर

मामले में अब एफआईआर दर्ज होने के बाद लोगों की नजर पुलिस की अगली कार्रवाई पर है। सवाल यह है कि क्या पुलिस बैंक की जांच रिपोर्ट और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर नाम सामने आए कर्मचारी से पूछताछ करेगी? क्या सरकारी खाते से राशि निकालने की पूरी प्रक्रिया की जांच होगी? और क्या इस मामले में अन्य बैंक अधिकारियों या कर्मचारियों की भूमिका भी सामने आती है?

सरकारी राशि की अनधिकृत निकासी के मामले में केवल राशि वापस जमा हो जाना ही पर्याप्त नहीं माना जा सकता। यह भी जांच का विषय है कि राशि किस प्रक्रिया से निकाली गई, किसकी आईडी या लॉगिन का उपयोग हुआ, किस स्तर पर बैंकिंग प्रक्रिया में चूक हुई और इसमें किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका थी या नहीं।

अब कार्रवाई की रफ्तार पर सवाल

करीब 10 महीने तक एफआईआर नहीं होने के बाद अब मामला दर्ज होने से शिकायतकर्ता को कार्रवाई की उम्मीद जगी है। हालांकि, अब सवाल एफआईआर से आगे बढ़कर आरोपी की गिरफ्तारी और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच को लेकर है।

लोगों के बीच यह चर्चा भी है कि यदि एफआईआर दर्ज करने में ही 10 महीने लग गए तो आरोपी तक पुलिस कब पहुंचेगी। साथ ही यह भी देखना होगा कि जांच के दौरान बैंक की आंतरिक जांच रिपोर्ट, अधिकारियों की आईडी के कथित दुरुपयोग और राशि निकासी की पूरी प्रक्रिया की पड़ताल कितनी गंभीरता से की जाती है।

फिलहाल एफआईआर दर्ज होने के बाद मामले में पुलिस की अगली कार्रवाई का इंतजार है। 26.87 लाख रुपए की सरकारी राशि से जुड़े इस मामले में अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या पुलिस जल्द आरोपी तक पहुंचेगी या जांच फिर दस्तावेजों और प्रक्रियाओं के बीच लंबी खिंचेगी? इसका जवाब आने वाले दिनों में पुलिस की कार्रवाई से ही सामने आएगा।

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