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कॉकरोच पार्टी 16 अक्टूबर को दिल्ली में प्रदर्शन करेगी:दीपके बोले- जेल में डाल दो, परवाह नहीं;
नई दिल्ली
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के फाउंडर अभिजीत दीपके ने 16 अक्टूबर को प्रदर्शन का ऐलान किया। दीपके ने बुधवार को वीडियो मैसेज जारी कर कहा कि, सभी लोग 16 अक्टूबर को शाम 5 बजे तिरंगा लेकर कनॉट प्लेस पहुंचे। ये लोग मुझे भी जेल में डाल सकते हैं लेकिन मुझे परवाह नहीं।
दीपके बुधवार दोपहर दिल्ली पहुंचे थे। एयरपोर्ट से बाहर निकलते समय भीड़ उन पर चिल्लाने लगी। एक पैसेंजर ने कहा- क्यों देश को खराब कर रहा भाई। इस पर दीपके ने बस थम्स अप का इशारा किया और चुपचाप चले गए।
उधर सीजेपी प्रवक्ता आशुतोष रांका और सौरव दास को दिल्ली की स्पेशल कोर्ट ने 5 दिन की न्यायिक हिरासत में तिहाड़ जेल भेज दिया है। इन्हें मंगलवार सुबह जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिया गया था।
- राहुल गांधी- जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण विरोध में तिरंगा लहराना जुर्म नहीं है। इसके लिए युवाओं को जेल भेजना कायरता है। स्टूडेंट्स, युवा, पत्रकार, इंडिया ब्लॉक। अलग-अलग बैनर, एक मकसद। सभी विरोध एक हैं। जंतर-मंतर भारत के लोगों का है। हम इसे वापस लेंगे।
- CJP फाउंडर अभिजीत दीपके- अगर सरकार देश में इमरजेंसी लगाना चाहती है तो खुलकर आधिकारिक तौर पर लगाए। यह अघोषित इमरजेंसी क्यों?
- कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे- गृह मंत्री द्वारा SIR में बाहर 13.3 करोड़ भारतीयों को घुसपैठिया घोषित करना भारतीयता का अपमान है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बावजूद, जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थल से हटाकर…पहले वोट चोरी फिर विरोध करने के अधिकार की चोरी भाजपाई तानाशाही का प्रमाण है।
CJP ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर और SIR के विरोध में 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन बुलाया था। पुलिस ने CJP फाउंडर अभिजीत दीपके, प्रवक्ता सौरव दास और आशुतोष रांका को दिल्ली एयरपोर्ट पर फ्लाइट से ही हिरासत में लिया था।
तीनों को 11 अक्टूबर को दिल्ली कैंट की विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट अदालत में पेश किया गया था। इसके बाद उन्हें 50-50 हजार रुपए के जमानती मुचलके पर रिहा कर दिया गया।
रिहाई की शर्त के मुताबिक, तीनों को एक साल तक शांति बनाए रखनी थी, ऐसा कोई काम नहीं करना था, जिससे शांति भंग हो। इसके लिए बॉन्ड साइन करने की बात सामने आई थी।
केंद्र सरकार ने 12 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थल की लिस्ट से हटा दिया। इसे 33 साल पहले प्रदर्शन की जगहों में शामिल किया गया था। यहीं पर अन्ना आंदोलन, पहलवानों का प्रदर्शन, कॉकरोच पार्टी का धरना हुआ था।
गृह मंत्रालय की बनाई कमेटी की सिफारिश पर दिल्ली का रामलीला मैदान, बुराड़ी ग्राउंड और पूर्वी दिल्ली का CBD ग्राउंड प्रदर्शन स्थल बनाए गए हैं।
CJP ने 12 अक्टूबर को ही CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और SIR पर रोक की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की परमिशन मांगी थी, लेकिन पुलिस ने इनकार कर दिया था।
पहली बार विपक्ष का सुप्रीम कोर्ट तक मार्च:
राहुल, प्रियंका, खड़गे के साथ अन्य विपक्षी सांसद सोमवार शाम अचानक सुप्रीम कोर्ट के अंदर पहुंचे। पहले विपक्षी सांसदों ने दिल्ली के बाराखंभा रोड से सुप्रीम कोर्ट की ओर मार्च निकाला था। उन्हें 500 मीटर पहले रोक दिया गया था। यह पहली बार है जब विपक्षी नेताओं ने किसी मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट तक मार्च निकाला।
SIR में गड़बड़ी के खिलाफ विपक्ष ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है, जिसमें राहुल गांधी, अखिलेश यादव, तेजस्वी यादव समेत 11 विपक्षी नेता याचिकाकर्ता हैं।
मार्च के पहले राहुल गांधी ने 40 मिनट प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इसमें उन्होंने कहा था कि विपक्ष का मार्च शिवजी की बारात की तरह है, इसमें कोई भी शामिल हो सकता है।
रविवार को विपक्षी सांसदों ने चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत को पत्र लिखा था और ज्ञापन सौंपने के लिए समय मांगा था। लेकिन सीजेआई ने मिलने से इनकार कर दिया और याचिका दाखिल करने के लिए कहा था।
मार्च से पहले राहुल बोले- सरकार ज्ञानेश कुमार को बचा रही
तेजस्वी यादव ने कहा, देश की जनता उन्हें नहीं भूलेगी। हम सभी लोकतंत्र और संविधान को बचाने के लिए एकजुट हुए हैं। अब उन्हें सजा देने का समय आ गया है।
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने INDIA ब्लॉक के सुप्रीम कोर्ट तक मार्च के दौरान कहा, लोकतंत्र की रक्षा किसी भी राजनीति से ऊपर है। नागरिकों से उनके वोट देने का अधिकार छीन लिया गया है।
कांग्रेस के प्रदर्शन के चलते सुरक्षा कारणों से बंद किए गए सभी मेट्रो स्टेशनों के एंट्री-एग्जिट गेट फिर से खोल दिए गए हैं।
अखिलेश यादव ने कहा- आंदोलन और धरना जारी रहेगा। लोकतंत्र को बचाना हमारी जिम्मेदारी है। BJP, चुनाव आयोग के साथ मिलकर संविधान और लोकतंत्र को खत्म करना चाहती है। वह हमेशा सत्ता में बने रहना चाहती है। वे फर्जी वोटर लिस्ट बनाते हैं, फर्जी वोट डालते हैं और चुनाव के नतीजे तैयार करते हैं।
सरकार प्रदर्शन की जगह बदलकर खुद को नहीं बचा सकती और न ही प्रदर्शन स्थल बदलने से कथित गड़बड़ियां छिप सकती हैं। हम लोकतंत्र के लिए अपनी आवाज उठाते रहेंगे। संघर्ष जारी रहेगा।
राहुल गांधी की लीगल टीम सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई। टीम ने नई दिल्ली में जारी प्रदर्शन और ECI में गड़बड़ी से जुड़े मुद्दों पर याचिका दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय मांगा है।
भाजपा नेता अनुराग ठाकुर ने कहा- राहुल हवा-हवाई नेता हैं। वे बस झूठ बोलते रहते हैं। अब तो सड़क छाप भाषा पर उतर आए। राहुल गांधी देश को शोर नहीं सच चाहिए। आरोप नहीं सबूत चाहिए। आप राष्ट्रपति के पास गए तो कहा गया कि सबूत दिखाएं। सुप्रीम कोर्ट ने साफ कह दिया कि कोर्ट का आप राजनीति का रणक्षेत्र नहीं बना सकते।
विपक्षी सांसदों ने 6, 7, 8 और 9 अक्टूबर को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और SIR के विरोध में प्रदर्शन किया था। इस दौरान तीन बार राहुल और प्रियंका गांधी को पुलिस ने हिरासत में भी लिया।
6 राज्यों में राज्यपाल बदले, इनमें एक महिला
राष्ट्रपति ने सोमवार को 6 राज्यों में नए राज्यपाल नियुक्त किए हैं। इनमें एक महिला हैं। ओम प्रकाश माथुर को केरल का राज्यपाल बनाश गया है। वहीं तमिलनाडु के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर होंगे।
डॉ. सुधा यादव को कर्नाटक की राज्यपाल बनाया गया है। वहीं बृज मोहन राम ओडिशा, डॉ. ढाल सिंह बिसेन उत्तराखंड और दुष्यंत गौतम सिक्किम के गर्वनर होंगे।
ओम प्रकाश माथुर भाजपा के वरिष्ठ नेता और अनुभवी संगठनकर्ता हैं। उनका जन्म 2 जनवरी 1952 को राजस्थान के पाली जिले के बेड़ल गांव में हुआ था। उन्होंने राजस्थान विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई की। वे भाजपा में कई संगठनात्मक जिम्मेदारियां निभा चुके हैं और पार्टी की केंद्रीय चुनाव समिति के सदस्य भी रहे हैं। जुलाई 2024 में उन्होंने सिक्किम के राज्यपाल का पद संभाला था।
राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर का जन्म 23 अप्रैल 1954 को गोवा के पणजी में हुआ था। उन्होंने वाणिज्य में स्नातक की पढ़ाई की और 1989 में भाजपा से जुड़े। वे गोवा भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष, गोवा विधानसभा के अध्यक्ष और राज्य सरकार में वन एवं पर्यावरण तथा पंचायती राज मंत्री रह चुके हैं। उन्होंने हिमाचल प्रदेश और बिहार के राज्यपाल के रूप में भी काम किया। जनवरी 2025 में उन्होंने केरल के राज्यपाल का पद संभाला।
बृज मोहन राम भाजपा के नेता और पूर्व सांसद हैं। उनका जन्म 1 जनवरी 1958 को तत्कालीन बिहार के पलामू क्षेत्र में हुआ था, जो अब झारखंड में है। वे 1991 से 1995 तक बिहार विधानसभा के सदस्य रहे। इसके बाद 1996 से 2004 तक उन्होंने पलामू लोकसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया।
डॉ. सुधा यादव भाजपा की वरिष्ठ नेता हैं। उनका जन्म 16 अक्टूबर 1965 को हरियाणा के रेवाड़ी जिले में हुआ था। उन्होंने रसायन विज्ञान में एमएससी और पीएचडी की डिग्री हासिल की। वे 1999 में महेंद्रगढ़ से लोकसभा सांसद चुनी गईं और 2004 तक इस पद पर रहीं। बाद में वे राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग की सदस्य बनीं। अगस्त 2022 में उन्हें भाजपा के संसदीय बोर्ड में शामिल किया गया।
डॉ. ढाल सिंह बिसेन मध्य प्रदेश के भाजपा नेता हैं। उनका जन्म 14 मई 1952 को सिवनी जिले के पिपरिया में हुआ था। वे पेशे से डॉक्टर हैं। उन्होंने 1990 से 2008 के बीच मध्य प्रदेश विधानसभा में चार कार्यकाल पूरे किए और 2003 से 2005 तक राज्य सरकार में मंत्री रहे। 2019 में वे बालाघाट लोकसभा सीट से सांसद चुने गए और 2024 तक इस पद पर रहे।
दुष्यंत गौतम भाजपा के नेता और सामाजिक कार्यकर्ता हैं। उनका जन्म 24 मई को आगरा में हुआ था। वे बचपन से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की गतिविधियों से जुड़े रहे और बाद में भाजपा के प्रचार, संगठन तथा डिजिटल अभियानों में सक्रिय हुए। मार्च 2026 में उन्हें भारतीय खेल प्राधिकरण का सदस्य नियुक्त भी बनाया गया।
ख़ामोशी की दहाड़ : सरकार भले विरोध का स्वर दबा दे, मगर दुनिया सुन रही है
भारतीय जनता पार्टी की नींद उड़ गई है। उसे हर तरफ़ विरोधी दिख रहे हैं, विरोधियों का भूत सता रहा है। दिल्ली पुलिस, बंगाल पुलिस, गुजरात पुलिस, मध्य प्रदेश पुलिस, हर राज्य और शहर की पुलिस गली-गली चक्कर लगा रही है, हर नौजवान को आंखों से सूंघ रही है कि कहीं वह 10 तारीख़ को जंतर-मंतर के प्रदर्शन में तो नहीं भाग लेनेवाला!
दिल्ली की किसी भी सड़क पर चलने वाले के कदमों को दिल्ली पुलिस भांपने की कोशिश कर रही है कि कहीं वे जंतर-मंतर की तरफ़ तो नहीं मुड़ने जा रहे। इस वक़्त हर व्यक्ति सरकार के लिए एक संभावित प्रदर्शनकारी है।
दिल्ली छावनी में तब्दील कर दी गई है। पश्चिम बंगाल, जम्मू और कश्मीर, छत्तीसगढ़ से रिज़र्व पुलिस के जवानों को हवाई जहाज़ से दिल्ली लाया जा रहा है। कोई 20,000 पैरा मिलिट्री के जवान पहले से दिल्ली में तैनात हैं। और 12,000 को दिल्ली में उतारा जा रहा है।
ताज़ा खबर के मुताबिक़, केंद्रीय सैन्य पुलिस बल की 221 कंपनियां दिल्ली लेस को मुहैया कराई जा रही हैं। 10 डिटेंशन सेंटर तैयार किए गए हैं, जहां गिरफ़्तार लोगों को रखा जाएगा। ओला, उबर जैसी टैक्सी कंपनियों को कहा जा रहा है कि वे 10 अक्तूबर और उसके आस पास दिल्ली की सड़कों पर न रहें। होटलों को कहा जा रहा है कि वे अतिथियों को जगह न दें। दिल्ली के दो मुख्य रेलवे स्टेशनों को बंद कर दिया गया है। उनकी तरफ़ आने वाली और वहां से जाने वाली ट्रेनें रद्द कर दी गई हैं। 57 मेट्रो स्टेशन बंद कर दिए गए हैं। दिल्ली की लगभग हर सड़क पर बैरिकेड लगा दिए गए हैं। दुकानों और रेस्तरांओं को जल्दी काम ख़त्म करने को कहा गया है।
दिल्ली के बड़े हिस्से में इंटरनेट बंद कर दिया है। लेकिन दिल्ली विश्वविद्यालय के कॉलेजों में कक्षाएं ऑनलाइन कर दी गई हैं।और इंटरनेट के बिना वे कैसे चलेंगी? कोई जवाब नहीं। परिसरों के आस-पास भारी पुलिस बंदोबस्त है।
राजनीतिक दलों के दफ़्तरों के बाहर भारी पुलिस का बंदोबस्त है। कई यूट्यूबर आरोप लगा रहे हैं कि उन्हें फोन करके जंतर-मंतर जाकर सरकार के पक्ष में वीडियो बनाने को कहा जा रहा है और इसके लिए पैसे दिए जा रहे हैं।
साफ़ है कि सरकार को अपने लोगों पर भरोसा नहीं रह गया है। या कहें लोगों पर, क्योंकि उसके अपने लोग खुलेआम वीडियो बना रहे हैं और जंतर-मंतर के आस पास चक्कर लगा रहे हैं। धमकी दे रहे हैं कि वे सरकार के विरोधियों को सबक़ सिखलाने को तैयार हैं।
पुलिस हिंसा की धमकी देने वाले इन गुंडों को क्यों गिरफ़्तार नहीं कर रही? वह जगह-जगह से उन तमाम लोगों को तो पकड़ रही है, जिन पर उसे शक है कि वे प्रदर्शन में भाग लेंगे लेकिन इन गुंडों को उसने खुला छोड़ रखा है. क्या इसलिए कि ये गुंडे पुलिस के साथी हैं? ये वे लोग हैं, जो नारा लगाते हैं : दिल्ली पुलिस लट्ठ चलाओ, हम तुम्हारे साथ हैं।
तो आज लट्ठ बजाने वाले गुंडे आज़ाद हैं और सिर्फ़ विचारों से लैस लोग गिरफ़्तार है। सैकड़ों युवाओं को गिरफ़्तार कर लिया गया है, बल्कि कहना चाहिए, पुलिस उठाकर ले गई है। कई लोगों के घरों पर पुलिस के लोग डेरा जमा कर बैठ गए हैं। यह बिल्कुल ग़ैरक़ानूनी है।
लेकिन अदालतों को इस पर कोई एतराज नहीं है। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका को न्यायमूर्तियों ने परे खिसका दिया। कहा कि पुलिस इन लोगों को उनके मां-बाप के पास भेज दे। सोचिए, नाबालिग़ लोगों को बिना किसी प्रक्रिया के पुलिस ने ग़ायब कर दिया है और अदालत को यह बात बुरी नहीं लग रही है। बल्कि वह 13 अक्टूबर तक इंतज़ार करने को कह रही है। यानी पुलिस आपको जब मर्ज़ी, जितने दिन मर्ज़ी, ग़ायब कर सकती है।
उसी तरह सर्वोच्च न्यायालय को उचित लग रहा है कि सरकार दिल्ली को पूरी तरह जाम कर दे। नागरिकों की आवाजाही की आज़ादी के अधिकार का अब कोई मतलब नहीं, क्योंकि अदालत सरकार के किसी तरह बचे रहने के अधिकार को लेकर अधिक चिंतित है। अदालत ने यह कहा कि अगर विरोध प्रदर्शन की अनुमति नहीं ली गई है, तो वह ग़ैर क़ानूनी है और सरकार उसे रोकने को आज़ाद है। उसे शहर को ठप्प करना भी ठीक ही लग रहा है।
अगर पूरा राज्य अपनी सारी ताक़त के साथ आपके ख़िलाफ़ खड़ा हो जाए तो क्या साबित होता है? कौन अधिक ताकतवर है? कौन डरा हुआ है? जो डरा हुआ है, वह नारा लगाने वालों को डंडे और बंदूक से डरा रहा है।
नारे, लेकिन लग रहे हैं। सरकार भले अपने कान में बंदूक की गोली ठूंस ले, नारे लग रहे हैं और वह न सुन रही हो, बाक़ी सब सुन रहे हैं।
आज जंतर-मंतर पर अगर गला दबा दिया जाए और खामोशी ही खामोशी हो, तो इस खामोशी की दहाड़ ही सबको सुनाई देगी।
(आलेख : अपूर्वानंद)
अंबा प्रसाद का भानु प्रताप शाही पर तीखा तंज, बोलीं— झारखंड की बेटी बंगाल की सह-प्रभारी बनी तो पेट में दर्द हो गया?
रांची
कांग्रेस की राष्ट्रीय सचिव एवं पश्चिम बंगाल की सह-प्रभारी अंबा प्रसाद ने भाजपा झारखंड के प्रदेश उपाध्यक्ष और विधायक भानु प्रताप शाही पर तीखा तंज कसा है।
शुक्रवार को जारी एक वीडियो में उन्होंने व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा,
“क्या भानु जी!
झारखंड की बेटी बंगाल की सह-प्रभारी बनी तो पेट में दर्द हो गया।”
उन्होंने भानु प्रताप शाही को टैग करते हुए सवालिया लहजे में कहा,
“का जी श्री शाही जी?”
अंबा प्रसाद का यह बयान पश्चिम बंगाल की सह-प्रभारी के रूप में उनकी भूमिका को लेकर सामने आई कथित प्रतिक्रिया के संदर्भ में आया है।
वह भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की राष्ट्रीय सचिव होने के साथ-साथ पश्चिम बंगाल प्रदेश कांग्रेस की सह-प्रभारी भी हैं।
बड़कागांव की पूर्व विधायक अंबा प्रसाद ने यह वीडियो कांग्रेस झारखंड और कांग्रेस सेवा दल के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल के साथ साझा किया।
सोशल मीडिया पर चर्चा में आया वीडिय....
अंबा प्रसाद के इस बयान के बाद वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया है।
उनके समर्थक इसे उनकी बेबाकी के रूप में देख रहे हैं,
वीडियो के जरिए अंबा प्रसाद ने सीधे भाजपा विधायक भानु प्रताप शाही पर निशाना साधा है।
झारखंड के मुद्दों पर भी मुखर रही हैं अंबा प्रसाद
अंबा प्रसाद झारखंड के स्थानीय मुद्दों, महिलाओं के अधिकारों और आदिवासी हितों से जुड़े विषयों पर अपनी बात रखती रही हैं।
इस बार उन्होंने अपने बयान के जरिए भाजपा नेता पर निशाना साधते हुए राजनीतिक बहस को नया मोड़ दिया है।
गुजरात के कच्छ में सड़क हादसे में 7 की मौत:
कच्छ
गुजरात के कच्छ में शुक्रवार सुबह ट्रक और पिकअप बोलेरो की टक्कर में बोलेरो में सवार सात मजदूरों की मौत हो गई। वहीं, 20 लोग घायल हैं। सभी घायलों को भुज सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
बोलेरो का केबिन चकनाचूर हो गया था और ट्रक उसके नीचे दब गया था, जिससे लोग असहनीय दर्द से चीख रहे थे। कच्छ कलेक्टर अनिल राणावासिया ने कहा कि बोलेरो में करीब 30 लोग सवार थे। दुर्घटनास्थल पर आरी पार्क चेकपोस्ट पर तैनात चीनी पुलिसकर्मी तुरंत मौके पर पहुंचे और आसपास के औद्योगिक क्षेत्र से क्रेन की व्यवस्था करके ट्रक के नीचे फंसे मजदूरों को बाहर निकाला।
कांग्रेस सांसद बिमोल अकोइजाम 11 छात्राओं से उत्पीड़न के दोषी:JNU ने प्रोफेसर पद से हटाया;
जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) ने प्रोफेसर और इनर मणिपुर से कांग्रेस लोकसभा सांसद डॉ. अंगोमचा बिमोल अकोइजाम को बर्खास्त कर दिया है।
यूनिवर्सिटी ने उन्हें 11 छात्राओं के यौन उत्पीड़न का दोषी पाया। बर्खास्तगी तत्काल प्रभाव से लागू की गई है।
यह कार्रवाई यूनिवर्सिटी की इंटरनल कमेटी (IC) की जांच के निष्कर्षों के आधार पर की गई। IC ने बिमोल अकोइजाम के खिलाफ बड़ी सजा की सिफारिश की थी।
अकोइजाम को हटाने की कार्रवाई से पहले दिल्ली कमीशन फॉर विमेन (DCW) ने मामले पर JNU प्रशासन से रिपोर्ट मांगी थी। आयोग ने 11 छात्राओं के आरोपों पर सितंबर में यह रिपोर्ट मांगी थी।
छात्राओं ने आरोप लगाया था कि उन्होंने मई 2026 में JNU की वाइस चांसलर संतिश्री धुलिपुड़ी पंडित को प्रोफेसर के खिलाफ शिकायत दी थी।
छात्राओं का आरोप था कि उस समय उनकी शिकायत पर उचित कार्रवाई नहीं की गई। गुप्ता ने यूनिवर्सिटी प्रशासन से तीन दिन में रिपोर्ट देने को कहा था।
अंगोम बिमोल अकोइजाम जेएनयू (JNU) के प्रोफेसर और सामाजिक कार्यकर्ता रहे हैं। वे मणिपुर के रहने वाले हैं और राज्य के सामाजिक व मानवाधिकार मुद्दों पर लंबे समय से मुखर आवाज रहे हैं।
2023 में मणिपुर हिंसा के बाद उन्होंने सक्रिय राजनीति में कदम रखा। बिमोल की सांसदी पर फिलहाल कोई खतरा नहीं है, क्योंकि कानून के मुताबिक सांसदी तभी रद्द होती है जब किसी आपराधिक मामले में अदालत कम से कम 2 साल की जेल की सजा सुनाए।
संसद में वे मणिपुर में शांति बहाली, पीड़ितों के पुनर्वास और पूर्वोत्तर के अधिकारों पर अपने तीखे व प्रभावशाली भाषणों के लिए जाने जाते हैं।
19 साल की छात्रा के साथ कैंपस के पास छेड़छाड़ हुई, जिसके बाद भारी विरोध हुआ।
अक्टूबर 2024: फ्रेशर्स पार्टी के दौरान हुई घटना को लेकर 47 छात्राओं ने मिलकर सामूहिक शिकायत दर्ज कराई।
नाना पाटेकर का पार्थिव शरीर पुणे पहुंचा
नाना पाटेकर का गुरुवार सुबह 75 साल की उम्र में निधन हो गया। उन्हें गोवा स्थित घर में कार्डियक अरेस्ट हुआ था। उन्हें करीब 45 मिनट तक CPR दी गई, लेकिन बचाया नहीं जा सका।
नाना का पार्थिव शरीर पुणे के डोंजे गांव स्थित उनके घर पहुंच गया है, जहां उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।
मणिपाल हॉस्पिटल के डॉ. शेखर सालकर के मुताबिक नाना पाटेकर का सुबह 5:20 बजे निधन हुआ। घटना के वक्त नाना के साथ घर पर परिवार का कोई सदस्य नहीं था। उनके दोस्त और केयरटेकर मौजूद थे।
नाना पाटेकर का 4 दिन पुराना आखिरी वीडियो सामने आया है। इसमें नाना पाटेकर ड्रम बजाते, डांस करते और मस्ती करते नजर आ रहे हैं। इस दौरान उन्होंने कहा था, “हम सभी को एक दिन जाना है। पता नहीं मैं कल यहां रहूंगा या नहीं।”
नाना पाटेकर ने 100 से ज्यादा फिल्में कीं। 1989 की फिल्म ‘परिंदा’ में नाना ने अन्ना का किरदार निभाया, जिसके लिए उन्हें बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर का नेशनल फिल्म अवॉर्ड मिला। 1994 की ‘क्रांतिवीर’ के लिए उन्हें बेस्ट एक्टर का नेशनल अवॉर्ड मिला।
1996 की ‘अग्निसाक्षी’ के लिए भी उन्हें बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर का नेशनल अवॉर्ड मिला। इस तरह उन्हें करियर में 3 नेशनल फिल्म अवॉर्ड मिले। भारतीय सिनेमा में योगदान के लिए नाना पाटेकर को 2013 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया। अपने लंबे फिल्मी करियर में उन्होंने हिंदी के साथ मराठी फिल्मों में भी काम किया।
डॉ. शेखर ने बताया कि रात करीब 2:30 बजे नाना ने एक दोस्त को मैसेज कर तबीयत ठीक नहीं लगने की बात कही थी। दोस्त ने उस समय मैसेज नहीं देखा। बाद में फोन करने पर वह करीब 4 बजे नाना के घर पहुंचा। उस वक्त नाना को काफी पसीना आ रहा था। उनकी हालत बिगड़ रही थी। कुछ देर बाद वह बेहोश होने लगे।
इसके बाद केयरटेकर को अस्पताल भेजा गया और एंबुलेंस बुलाई गई। इमरजेंसी टीम घर पहुंची तो नाना पूरी तरह नॉन-रिएक्टिव थे। टीम ने तुरंत कार्डियक मसाज शुरू की। उन्हें सुबह करीब 4:20 से 4:30 बजे के बीच मणिपाल अस्पताल लाया गया। डॉक्टरों के मुताबिक, उन्हें मृत अवस्था में अस्पताल लाया गया था।
ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष का लगातार तीसरे दिन प्रदर्शन
नई दिल्ली
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और SIR के विरोध में विपक्ष ने दिल्ली में गुरुवार को लगातार तीसरे दिन प्रदर्शन किया। राहुल-प्रियंका गांधी और INDIA ब्लॉक के सांसदों ने पहले कनॉट प्लेस में लंच किया, फिर बसों से राजघाट पहुंचे।
प्रदर्शन को देखते हुए भारी सुरक्षा व्यववस्था की गई थी। राजघाट पर करीब एक घंटे इंतजार के बाद उन्हें अंदर जाने दिया। यहां सांसदों ने बापू को श्रद्धांजलि दी।
इससे पहले खड़गे ने कहा था कि वे गांधीजी से प्रार्थना करेंगे कि सरकार को सद्बुद्धि दे। वह लोगों का वोट देने का अधिकार न छीने।
दिल्ली में पिछले दो दिनों से धरने का एक ही पैटर्न दिखा। कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे विपक्षी सांसदों को लंच पर बुलाते हैं, सांसद खाना खाते हैं, फिर बसों में बैठकर निकल जाते हैं। फर्क इतना है कि बुधवार को मंजिल जंतर-मंतर थी और गुरुवार को राजघाट। इससे पहले विपक्ष ने संसद से चुनाव आयोग तक मार्च निकाला था।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा और SIR और मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों को लेकर INDIA ब्लॉक का 10 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से राष्ट्रपति भवन में मुलाकात करेगा। राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे के प्रतिनिधिमंडल में शामिल होने की खबर है। ऐसी भी खबर है कि विपक्ष शुक्रवार को लगातार चौथे दिन भी प्रदर्शन कर सकता है।
कॉकरोच जनता पार्टी ने ऐलान किया है कि वह 10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करेगी। पार्टी ने 7 अक्टूबर को दिल्ली पुलिस को प्रदर्शन की सूचना दी थी, लेकिन पुलिस ने इसकी अनुमति नहीं दी है। इसके बावजूद संगठन ने प्रदर्शन करने की बात कही है।
प्रेमानंदजी के शिष्य का चौथा वीडियो:धोती पकड़े कमरे से लड़खड़ाते निकले; कौन जारी कर रहा सुसाइड के CCTV फुटेज
मथुरा
वृंदावन में संत प्रेमानंद के शिष्य रसिक दुलारी शरण का सुसाइड से पहले का चौथा वीडियो सामने आया है। इसमें वे कमरे से निकलकर सीढ़ियों की तरफ जाते दिख रहे हैं। उन्होंने सफेद रंग का हाफ कुर्ता और पीले रंग की धोती पहन रखी है।
25 साल के रसिक दुलारी लड़खड़ाते और धोती को ठीक करते हुए गैलरी की तरफ धीरे-धीरे बढ़ रहे हैं। देखने से ऐसा लग रहा है कि जैसे उनके पैर या शरीर में कहीं चोट लगी है। वे 19 कदम चलते हैं, फिर सीढ़ियों पर चढ़ने के लिए गैलरी से दूसरी तरफ मुड़ जाते हैं।
रसिक दुलारी ने 25 सितंबर की सुबह केली कुंज ट्रस्ट की बिल्डिंग की चौथी मंजिल से कूदकर जान दे दी थी। 26 सितंबर को यमुना किनारे उनका अंतिम संस्कार किया गया। पिछले 9 दिनों में उनके सुसाइड से जुड़े चार वीडियो सामने आए हैं।

सभी CCTV फुटेज व्हाट्सएप ग्रुप पर वायरल हुए हैं। रसिक दुलारी के सुसाइड मामले में पुलिस केली कुंज आश्रम से जुड़े 30 से ज्यादा लोगों से पूछताछ कर चुकी है।
4 अक्टूबर को सामने आए 33 सेकंड के तीसरे वीडियो में रसिक दुलारी शरण सीढ़ियों से चढ़ते हुए छत पर जाते हुए दिख रहे हैं। उनकी धोती पर खून के निशान दिखाई दे रहे हैं। सीढ़ियों पर चढ़ते वक्त ऐसा लग रहा कि उनको चलने में थोड़ी दिक्कत हो रही।
5 अक्टूबर को 12 सेकेंड का वीडियो सामने आया। इसमें रसिक दुलारी कमरे से बाहर निकलते दिख रहे हैं। उन्होंने सफेद रंग का हाफ कुर्ता और पीले रंग की धोती पहनी हुई है। माथे पर सफेद रंग का चंदन लगा रखा है। उन्होंने पैरों में चप्पल या खड़ाऊ भी नहीं पहनी हुई है। वह लड़खड़ाते हुए और कपड़े ठीक करते हुए धीरे-धीरे चल रहे हैं। फिर सीढ़ियों पर चढ़ने के लिए गैलरी से दूसरी तरफ मुड़ जाते हैं।
रसिक दुलारी वृंदावन के वाराह घाट इलाके की 4 मंजिला गुरु कृपा कुंज बिल्डिंग में 3 महीने से रहते थे। बिल्डिंग की छत से कूदकर उन्होंने जान दे दी थी। पुलिस के मुताबिक, रसिक दुलारी शरण को गंभीर हालत में सर्वोदय अस्पताल ले जाया गया, जहां उनकी मौत हो गई।
प्रत्यक्षदर्शियों ने दावा किया था कि रसिक दुलारी के प्राइवेट पार्ट से खून बह रहा था। कमरे में एक ग्राइंडर मिला है, जिस पर खून लगा था। आशंका है कि शिष्य ने ग्राइंडर से प्राइवेट पार्ट को नुकसान पहुंचाया था।
8 घंटे के धरने के बाद राहुल-प्रियंका हिरासत में
नई दिल्ली
दिल्ली पुलिस ने राहुल गांधी और प्रियंका गांधी को हिरासत में ले लिया है। हिरासत में लिए गए सभी 250 लोगों को किंग्सवे कैंप पुलिस स्टेशन ले जाया जा रहा है। SIR के विरोध और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर दोनों 8 घंटे से ज्यादा समय से आकाशवाणी भवन परिसर में धरने पर बैठे थे।
राहुल ने कहा था, “वे ज्ञानेश कुमार से मिले बिना कहीं नहीं जाएंगे।" पुलिस जब उन्हें हटाने पहुंची, तो कार्यकर्ताओं ने उन्हें घेर लिया।
मंगलवार सुबह 10 बजे संसद के मकर द्वार से शुरू हुआ विपक्षी दलों का ‘सेव डेमोक्रेसी मार्च’ पुलिस ने दोपहर 12:30 बजे आकाशवाणी के पास रोक दिया था।
इसके बाद राहुल-प्रियंका को बस में बैठाया गया, लेकिन दोनों उतरकर परिसर में धरने पर बैठ गए।
राहुल का दावा था कि 20 विपक्षी पार्टियों के 300 से ज्यादा सांसद मौजूद थे। इनमें अखिलेश यादव, मल्लिकार्जुन खड़गे, अभिषेक बनर्जी शामिल रहे।
चुनाव आयोग का कहना है कि शाम 4 बजे तक किसी भी राजनीतिक दल ने अपने प्रतिनिधियों के जरिए आयोग से मिलने का औपचारिक अनुरोध नहीं किया। प्रेस नोट में यह भी लिखा है कि दिल्ली पुलिस ने उन्हें बताया था कि राहुल गांधी सांसदों के साथ चुनाव आयुक्त से मिलना चाहते हैं।
गांधी जयंती पर मोदी-राहुल बच्चों से मिले;
नई दिल्ली
महात्मा गांधी की 157वीं जयंती पर सत्ता और विपक्ष के सांसद संविधान सदन (पुराने संसद भवन) पहुंचे। यहां उन्होंने महात्मा गांधी श्रद्धांजलि दी।
इस कार्यक्रम में स्कूली बच्चों को भी इनवाइट किया गया था। पीएम मोदी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने वहां स्कूली बच्चों से बात की। पीएम छात्रों के एक ग्रुप के पास पहुंचे, स्टूडेंट के कंधे पर हाथ रखकर हालचाल जाना।
वहीं राहुल ने एक बच्ची को अपने पास बिठाया और उसे अपने मोबाइल में कुछ दिखाया। इस दौरान बच्ची और राहुल दोनों हंसते नजर आए।
इससे पहले सभी नेताओं ने नई दिल्ली में महात्मा गांधी के समाधि स्थल राजघाट पर श्रद्धांजलि दी।
महात्मा गांधी के अलावा आज लालबहादुर शास्त्री की भी 122वीं जयंती है। शास्त्री का जन्म 2 अक्टूबर 1904 में यूपी के मुगलसराय में हुआ था।
शाम को गांधी स्मृति पर प्रार्थना सभा हुई। इसमें प्रधानमंत्री मोदी भी पहुंचे और पुष्पांजलि दी
केंद्रीय कोयला और खान मंत्री जी किशन रेड्डी ने 2 अक्टूबर गांधी जयंती से लेकर 31 अक्टूबर को सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती तक, 30 दिनों के राष्ट्रव्यापी स्वच्छता अभियान का आह्वान किया। उन्होंने नागरिकों, सरकारी और निजी संस्थानों, शैक्षणिक संस्थानों, NGOs और अन्य संगठनों से इसमें भाग लेने की अपील की।
जंतर-मंतर के 68 दिन बाद मुंबई में CJP का प्रदर्शन
मुंबई/दिल्ली
कॉकरोच जनता पार्टी ने शुक्रवार को मुंबई के शिवाजी पार्क में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे के लिए प्रदर्शन किया। इस दौरान स्टेज पर मौजूद सभी लोग गांधी जी की फोटो वाली टी-शर्ट पहनकर पहुंचे।
इससे पहले CJP ने 19 जून से 25 जुलाई तक दिल्ली के जंतर-मंतर पर धर्मेंद्र प्रधान (पूर्व शिक्षा मंत्री) के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन किया था। 36 दिन के विरोध के बाद प्रधान ने इस्तीफा दे दिया था।
CJP के फाउंडर अभिजीत दीपके ने कहा- जब भारत के प्रधानमंत्री अमेरिका जाते हैं, तब भी वहां कहा जाता है कि ये गांधी के देश से आए हैं। गांधी देश की आत्मा हैं, आंबेडकर रीढ़ की हड्डी और नेहरू दिमाग हैं।
कॉकरोच जनता पार्टी ने यह भी कहा कि मुंबई पुलिस ने हमारा प्रदर्शन शांतिपूर्ण होने दिया। मुंबई तो सिर्फ ट्रेलर है, जो करना है कर लो, फाइनल तो हम जंतर-मंतर पर ही खेलेंगे।
राहुल गांधी ने X पर पोस्ट कर कहा कि हजारों नौजवान वोट चोरी के खिलाफ अपने संवैधानिक अधिकार के साथ शांतिपूर्वक सड़कों पर हैं। उनकी मांग साफ है कि ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें और लोकतंत्र बचे।
मुंबई में विरोध प्रदर्शन के दौरान CJP नेता सौरव दास ने कहा कि दिल्ली पुलिस ने फिर से बर्बरता की है, सुधर जाओ वरना हम तुम्हें सुधार देंगे।
CJP के विरोध प्रदर्शन में अभिनेत्री शबाना आजमी ने कहा, "आप सभी का हार्दिक स्वागत है। चूंकि मैं मुंबई से हूं, इसलिए आप सभी को इतनी बड़ी संख्या में यहां देखकर मुझे अपार खुशी हो रही है। हमारा वोट हमारा अधिकार है, हमारी आवाज है। जब मतदाता सूची से हमारे नाम हटा दिए जाएं, तो हम क्या करेंगे?''
प्रदर्शन के दौरान CJP ने कहा कि मुंबई पुलिस ने हमारा प्रदर्शन शांतिपूर्ण होने दिया। लेकिन दिल्ली पुलिस भूल गई है कि वो जनता की पुलिस है, भाजपा की पुलिस नहीं। तो उन्हें हम कहना चाहेंगे कि मुंबई तो सिर्फ ट्रेलर है, जो करना है कर लो, फाइनल तो हम जंतर-मंतर पर ही खेलेंगे।
राहुल बोले- पिछले कई चुनावों में फिक्सिंग हुई
नई दिल्ली
कांग्रेस वर्किंग कमेटी की मंगलवार को ढाई घंटे बैठक हुई। इसमें राहुल गांधी ने कहा, “मुख्य चुनाव आयुक्त पूरी तरह समझौता कर चुके हैं और देश की चुनाव व्यवस्था ‘फिक्स’ है। हाल के सभी चुनाव अवैध हैं।”
राहुल ने कहा, "चाहे EVM हो या मतदाता सूची, दोनों से छेड़छाड़ की गई है। दोनों का इस्तेमाल भाजपा चुनाव जीतने की रणनीति के तौर पर कर रहे है।"
बैठक में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार तत्काल इस्तीफा दें। SIR तत्काल रोकी जाए। हटाए गए 13 करोड़ 30 लाख नाम बहाल किए जाएं, प्रस्ताव पास किए गए। बैठक में 68 सदस्यों ने हिस्सा लिया।
कांग्रेस ने कहा कि उनकी पार्टी वोटर लिस्ट और चुनाव प्रक्रिया में कथित गड़बड़ी के मुद्दों को संसद में उठाएगी और प्रदर्शन करेगी।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा, “मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार मोदी सरकार की कठपुतली बन गए हैं। उन्हें तुरंत हटाया जाना चाहिए। मोदी सरकार ने व्यवस्थित रूप से उस मजबूत लोकतांत्रिक नींव को खोखला कर दिया है जिसे हमारे पूर्वजों ने बनाया था। युवाओं को वोट देने से रोकने की साजिश- PM मोदी ने युवाओं को वोट देने से रोकने की साजिश रची है। फॉर्म 6 से जुड़े नियमों में गैरकानूनी तरीके से बदलाव किया गया।”
कांग्रेस सांसद कुमारी सैलजा ने कहा, “लोकतंत्र को बचाने के लिए पूरी कांग्रेस पार्टी और हमारा मानना है कि पूरे देश को खड़ा होना होगा। हम राहुल गांधी के साथ खड़े हैं। पूरी कांग्रेस पार्टी उनके साथ है और इस लड़ाई में सभी मिलकर आगे बढ़ेंगे।"
सुप्रीम कोर्ट बोला- कैंसर दवाओं की ऊंची कीमत नरसंहार जैसी
नई दिल्ली
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से सवाल किया कि ₹2700 की कैंसर की दवा पर MRP ₹27,000 क्यों है। कोर्ट ने दवाओं की कीमतों पर नाराजगी जताते हुए कहा कि यह नरसंहार है। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने मंगलवार को दवाओं की कीमत और जेनेरिक दवाओं से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई की। सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता मौजूद थे। कोर्ट ने कहा- यह नरसंहार है। यह कैसे हो रहा है? कॉर्पोरेट किसी को नहीं बख्शते, शव भी बाहर नहीं जाने देते।
अगर मरीज सरकारी योजना में इलाज करा रहा है तो इतनी बढ़ी हुई कीमत का भुगतान कौन करता है। इसका बोझ सरकारी खजाने और टैक्सपेयर्स पर ही पड़ता है। प्राइवेट हॉस्पिटल इंडस्ट्री की तरह काम कर रहे हैं। वे अपनी फार्मेसी से ही दवा खरीदने को मजबूर करते हैं।
सरकार की ओर से तुषार मेहता ने कहा- फार्मा कंपनियां लाभ कमाने वाली नहीं हैं। ऐसा लगता है कि लाभ कमाने वाले निजी अस्पताल हैं। जिन दवाओं की कीमत सरकार तय करती है, उनका बाजार में हिस्सा कम है। जिनकी कीमत सरकार तय नहीं करती, उनकी करीब 80% से ज्यादा हिस्सेदारी है।
इससे दवाओं की कीमत और मरीजों के इलाज का खर्च बढ़ सकता है। कई मरीज इलाज के लिए अपनी संपत्ति या गहने तक बेचने को मजबूर होते हैं।
इससे पहले 22 सितंबर की सुनवाई के दौरान जस्टिस संदीप मेहता ने कहा- “यह मरीजों के साथ दिनदहाड़े डकैती है। जरूरी दवाओं के लिए ऐसी कीमतें कैसे तय करने दी जा सकती हैं।”
CISF जवान ने साथियों पर गोली चलाई, 4 की मौत:जम्मू के कठुआ में विवाद के बाद फायरिंग;
कठुआ
जम्मू-कश्मीर के कठुआ में CISF जवान ने अपने साथियों पर गोली चला दी। मंगलवार शाम 7.30 बजे हुई इस घटना में 4 CISF जवानों की मौत हो गई। मृतकों में एक असिस्टेंट कमांडेंट भी शामिल हैं।
इनके नाम असिस्टेंट कमांडेंट अंकित कुमार पांडे, एसआई लक्ष्मण सिंह, कॉन्स्टेबल रफीक अहमद और कॉन्स्टेबल संदीप कुमार हैं।
ये जवान हिमाचल प्रदेश की सीमा से सटे बसोहली के पावर प्रोजेक्ट की सुरक्षा में तैनात थे। दो जवानों के बीच बहस हुई, इसी दौरान एक ने फायरिंग कर दी।
कठुआ पुलिस ने आरोपी जवान को गिरफ्तार कर लिया है। CISF के सीनियर अधिकारी भी घटनास्थल पर पहुंच गए हैं।
सूत्रों के मुताबिक, आरोपी हेड कॉन्स्टेबल अभिदेश कुमार सिंह ने ऑफिस के परिसर में घुसकर अपनी सरकारी AK-47 राइफल से अंधाधुंध फायरिंग की। उनके पास 150 राउंड गोलियां थीं।
आरोपी 2009 बैच का है, CISF हेडक्वॉर्टर ने मामले की कोर्ट ऑफ इंक्वायरी के आदेश दिए हैं सेवा-3 प्रोजेक्ट बसोहली तहसील में रावी नदी पर बना है। इसे 1993 में शुरू किया गया था। 2013 की बाढ़ में इसका 300 मीटर लंबा हिस्सा बह गया था। तब से ये पूरी तरह बंद है।
CWC बैठक में चुनाव आयोग और वोटर लिस्ट पर मंथन
नई दिल्ली स्थित AICC कार्यालय में मंगलवार को कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) की बैठक हुई। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की अध्यक्षता में हुई बैठक में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी समेत पार्टी के शीर्ष नेता शामिल हुए। छत्तीसगढ़ से पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, राज्यसभा सांसद फूलोदेवी नेताम और ताम्रध्वज साहू भी बैठक में मौजूद रहे।
बैठक में चुनाव आयोग की भूमिका, मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई की मांग और मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों को लेकर कांग्रेस की आगे की रणनीति पर चर्चा हुई। कांग्रेस इन मुद्दों को लेकर लगातार चुनाव आयोग और केंद्र सरकार पर सवाल उठाती रही है।
CWC की बैठक में मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हुई। कांग्रेस का आरोप है कि वोटर लिस्ट में गड़बड़ियों से चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। पार्टी इस मुद्दे को लेकर आगे राजनीतिक और संगठनात्मक अभियान चलाएगी, इपर भी चर्चा हुई। बैठक में मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई की मांग और चुनाव आयोग की भूमिका पर भी वरिष्ठ नेताओं ने अपने विचार रखे।
खड़गे ने कहा कि इन मुद्दों पर पार्टी आगे की राजनीतिक कार्ययोजना तैयार कर रही है। बैठक में वरिष्ठ नेताओं ने चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दों के साथ संगठन की आगामी रणनीति और राजनीतिक कार्यक्रमों पर भी चर्चा की।
CWC की बैठक में राहुल गांधी समेत कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए। बैठक में चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों पर पार्टी के रुख को लेकर चर्चा हुई। इन मुद्दों पर संसद और सड़क पर आगे की रणनीति पर भी विचार-विमर्श किया गया।
छत्तीसगढ़ से पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, राज्यसभा सांसद फूलोदेवी नेताम और ताम्रध्वज साहू भी बैठक में मौजूद रहे। प्रदेश कांग्रेस इससे पहले भी मतदाता सूची और चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दों को लेकर प्रदर्शन और राजनीतिक कार्यक्रम कर चुकी है।