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सुप्रीम कोर्ट बोला- कैंसर दवाओं की ऊंची कीमत नरसंहार जैसी

नई दिल्ली

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से सवाल किया कि ₹2700 की कैंसर की दवा पर MRP ₹27,000 क्यों है। कोर्ट ने दवाओं की कीमतों पर नाराजगी जताते हुए कहा कि यह नरसंहार है। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने मंगलवार को दवाओं की कीमत और जेनेरिक दवाओं से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई की। सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता मौजूद थे। कोर्ट ने कहा- यह नरसंहार है। यह कैसे हो रहा है? कॉर्पोरेट किसी को नहीं बख्शते, शव भी बाहर नहीं जाने देते।

अगर मरीज सरकारी योजना में इलाज करा रहा है तो इतनी बढ़ी हुई कीमत का भुगतान कौन करता है। इसका बोझ सरकारी खजाने और टैक्सपेयर्स पर ही पड़ता है। प्राइवेट हॉस्पिटल इंडस्ट्री की तरह काम कर रहे हैं। वे अपनी फार्मेसी से ही दवा खरीदने को मजबूर करते हैं।

सरकार की ओर से तुषार मेहता ने कहा- फार्मा कंपनियां लाभ कमाने वाली नहीं हैं। ऐसा लगता है कि लाभ कमाने वाले निजी अस्पताल हैं। जिन दवाओं की कीमत सरकार तय करती है, उनका बाजार में हिस्सा कम है। जिनकी कीमत सरकार तय नहीं करती, उनकी करीब 80% से ज्यादा हिस्सेदारी है।

इससे दवाओं की कीमत और मरीजों के इलाज का खर्च बढ़ सकता है। कई मरीज इलाज के लिए अपनी संपत्ति या गहने तक बेचने को मजबूर होते हैं।

इससे पहले 22 सितंबर की सुनवाई के दौरान जस्टिस संदीप मेहता ने कहा- “यह मरीजों के साथ दिनदहाड़े डकैती है। जरूरी दवाओं के लिए ऐसी कीमतें कैसे तय करने दी जा सकती हैं।”

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