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ग्राम कुसमी में ‘खेत बचाओ अभियान’ का सफल आयोजन, किसानों को टिकाऊ खेती के लिए किया गया जागरूक मिट्टी की उर्वरता, जल संरक्षण और जैविक खेती पर दिया गया जोर; कृषि अधिकारियों ने किसानों को बताए प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के उपाय

 गोविंद राम ब्यूरो चीफ
 बलौदा बाजार / पलारी :-
 बलौदा बाजार जिला के अंतर्गत पलारी ब्लाक  के ग्राम 


कुसमी में कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा संचालित राष्ट्रव्यापी ‘खेत बचाओ अभियान’ के अंतर्गत ग्राम पंचायत भवन कुसमी में जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने, प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण करने तथा टिकाऊ एवं पर्यावरण अनुकूल कृषि पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रेरित करना रहा।

कार्यक्रम ग्राम पंचायत कुसमी की सरपंच श्रीमती गोमती घृतलहरे एवं सहकारी समिति कुसमी के प्राधिकृत अधिकारी श्री लोकेश्वर वर्मा के आतिथ्य में संपन्न हुआ। इस अवसर पर कृषि विभाग से ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी श्री राजू कुमार टाण्डे, आत्मा योजना की बीटीएम श्रीमती पुष्पांजलि बंजारे तथा एटीएम श्री योगेश मढ़रिया उपस्थित रहे।

मिट्टी की सेहत सुधारने और प्राकृतिक खेती अपनाने पर जोर

कार्यक्रम में कृषि अधिकारियों ने किसानों को खेत बचाओ अभियान के उद्देश्यों की विस्तारपूर्वक जानकारी देते हुए बताया कि लगातार रासायनिक उर्वरकों के असंतुलित उपयोग से मिट्टी की गुणवत्ता और उर्वरता प्रभावित हो सकती है। ऐसे में मिट्टी की सेहत बनाए रखने के लिए संतुलित उर्वरक प्रबंधन, जैविक खादों के उपयोग तथा प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देना आवश्यक है।

अधिकारियों ने किसानों को मिट्टी की वास्तविक स्थिति के अनुसार उर्वरकों का उपयोग करने के लिए मृदा स्वास्थ्य कार्ड की उपयोगिता समझाई। साथ ही खेती में पानी का बेहतर प्रबंधन करने, जल संरक्षण अपनाने तथा प्राकृतिक संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग करने की अपील की।

जैविक खाद और जैव उर्वरकों के उपयोग की दी गई जानकारी

कृषकों को रासायनिक उर्वरकों एवं कीटनाशकों के अनावश्यक उपयोग को कम करने और खेती में जैविक एवं प्राकृतिक विकल्पों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया गया। इस दौरान हरी खाद, गोबर खाद, कंपोस्ट खाद, वर्मी कंपोस्ट, पीएसबी, राइजोबियम कल्चर तथा बीजीए (नील-हरित शैवाल) के उपयोग के संबंध में जानकारी दी गई।

कृषि अधिकारियों ने फसल अवशेषों को जलाने के बजाय उनका उचित प्रबंधन करने की सलाह दी। साथ ही वेस्ट डीकम्पोजर का घोल तैयार करने एवं खेतों में उसके उपयोग के बारे में भी किसानों को जागरूक किया गया। अधिकारियों ने कहा कि मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने और खेती की लागत को संतुलित करने के लिए वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों के साथ जैविक संसाधनों का समुचित उपयोग महत्वपूर्ण है।

30 नवंबर तक चलेगा खेत बचाओ अभियान

कार्यक्रम में जानकारी दी गई कि खेत बचाओ अभियान का वर्तमान चरण 22 अक्टूबर से 30 नवंबर 2026 तक संचालित किया जा रहा है। इससे पहले जून 2026 में भी अभियान का एक चरण आयोजित किया गया था। अभियान के माध्यम से किसानों तक मिट्टी के स्वास्थ्य, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और टिकाऊ कृषि से जुड़ी जानकारी पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।

जनप्रतिनिधियों और किसानों की रही सक्रिय भागीदारी

ग्राम कुसमी में आयोजित इस जागरूकता कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों, कृषि विभाग के अधिकारियों, किसान मित्र श्री जगमोहन वर्मा सहित बड़ी संख्या में किसानों ने भाग लिया। उपस्थित प्रमुख किसानों में नेमसिंह वर्मा, नरेंद्र कुमार वर्मा, कार्तिक राम वर्मा, अमरनाथ वर्मा, दीनदयाल घृतलहरे, भागचंद वर्मा, उभेराम, संतोष कुमार वर्मा, नंद कुमार साहू, कँवल सिंह, सहदेव रात्रे, लहाराम, विजय घृतलहरे, दर्शन कुमार, ईश्वरी वर्मा, रामेश्वर वर्मा, रूपेंद्र वर्मा, श्यामलाल वर्मा, किशोर कुमार वर्मा एवं मोहन वर्मा सहित अन्य कृषक उपस्थित रहे।

कार्यक्रम के माध्यम से किसानों को यह संदेश दिया गया कि स्वस्थ मिट्टी, सुरक्षित जल और संतुलित कृषि पद्धतियां ही टिकाऊ खेती की मजबूत नींव हैं। खेत बचाओ अभियान जैसी पहल किसानों को जागरूक करने के साथ ही कृषि भूमि की उर्वरता बनाए रखने और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्राकृतिक संसाधनों को सुरक्षित रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

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