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छात्राओं की शिकायत पर भड़के बिलासपुर कलेक्टर:

बिलासपुर

बिलासपुर जिले के मल्हार स्थित शासकीय उच्चतर माध्यमिक स्कूल की छात्राओं ने शिक्षकों पर अभद्र व्यवहार और पढ़ाई में लापरवाही के आरोप लगाते हुए प्रदर्शन किया था। इस घटना से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। मीटिंग हॉल में छात्राओं ने संबंधित शिक्षकों पर कार्रवाई और प्राचार्य को हटाने की मांग की। इस दौरान कलेक्टर संजय अग्रवाल छात्राओं पर भड़क गए।

वीडियो में कलेक्टर कहते सुनाई दे रहे हैं कि, हमारे पास इतने टीचर्स नहीं है। उन्हें निलंबित कर दिया जाएगा, तो उनकी जगह शिक्षक कहां से लाएंगे। आप बताइए कि किस स्कूल से 4 टीचर लाएं। दूसरे स्कूल से टीचर लाए गए, तो उनके बच्चे भी चक्काजाम करेंगे। अपने टीचर नहीं जाने देंगे, क्या वे यही सीखेंगे। वहीं, एडिशनल कलेक्टर शिव बनर्जी कह रहे हैं कि, आप लोगों की यह ऊंची भाषा सही नहीं है। बाहर निकल जाइए।

छात्राओं के प्रदर्शन के बाद प्राचार्य कल्याण संघ प्राचार्य और शिक्षकों के समर्थन में उतर आया। संघ ने कलेक्टर और जिला शिक्षा अधिकारी को ज्ञापन सौंपकर मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। संघ का कहना है कि छात्राओं को भड़काया जा रहा है।

छात्राओं ने एएफ प्रभारी शिक्षिका संगीता यादव पर पिछले 3 साल का रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराने और राशि के हिसाब में गड़बड़ी का आरोप लगाया है। छात्राओं का कहना है कि शिकायत करने पर प्रोजेक्ट के अंक काटने और परीक्षा में फेल करने की धमकी दी जाती है। छात्राओं ने संस्कृत व्याख्याता संजय दुबे पर कक्षा में पढ़ाई के दौरान लापरवाही बरतने, अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने और अश्लील टिप्पणियां करने का आरोप लगाया है।

छात्राओं ने गणित व्याख्याता काजल सोन पर कक्षा 10वीं में गणित नहीं पढ़ाने और शासन की ओर से मिलने वाले नि:शुल्क सैनिटरी पैड के वितरण में अनियमितता का आरोप लगाया है।

कलेक्टर की मंजूरी के बाद डीईओ ने 9 अक्टूबर को आदेश जारी किए। इसके तहत प्राचार्य वेदप्रकाश शुक्ला को मस्तूरी विकासखंड के शासकीय हाई स्कूल कुकुर्दीकेरा, व्याख्याता रश्मि गुप्ता को शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय पचपेड़ी और व्याख्याता संजय दुबे को शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय ओखर भेजने के निर्देश दिए गए।

इस कार्रवाई से असंतुष्ट छात्राओं ने 14 अक्टूबर को 13 दिनों के भीतर दूसरी बार कलेक्ट्रेट पहुंचकर उग्र विरोध प्रदर्शन किया। छात्राओं ने प्राचार्य और शिक्षकों को केवल हटाने या ट्रांसफर करने के बजाय उन्हें निलंबित (सस्पेंड) करने और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की।

प्राचार्य कल्याण संघ के मुताबिक, मल्हार स्कूल के प्राचार्य ने नवंबर 2025 में पद संभालने के बाद पढ़ाई की गुणवत्ता सुधारने, अनुशासन बनाए रखने और स्कूल की व्यवस्था बेहतर करने की कोशिश की।

संघ का दावा है कि स्कूल के कुछ व्याख्याता और कर्मचारी इन सुधारों में सहयोग नहीं कर रहे हैं। इससे स्टाफ के बीच तालमेल की कमी बढ़ी है, जिसका असर अब विद्यार्थियों और शिक्षकों के संबंधों पर भी दिखाई देने लगा है।

संजय शर्मा ने बताया कि संबंधित प्राचार्य दिव्यांग हैं और उनकी नौकरी का एक साल से भी कम समय बचा है। इसके बावजूद वे नियमित रूप से स्कूल आ रहे हैं और स्कूल की व्यवस्था व पढ़ाई की गुणवत्ता सुधारने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे में उनका पक्ष सुने बिना उनके खिलाफ कार्रवाई करना सही नहीं होगा।

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