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संसाधन नदारद, ऑनलाइन कामों का अंबार! निजी जेब से कब तक व्यवस्था चलाएंगे छात्रावास अधीक्षक HMS पोर्टल की व्यावहारिक समस्याओं को लेकर अधीक्षक संघ बलौदाबाजार ने आयुक्त के नाम सौंपा ज्ञापन

 गोविंदराम ब्यूरो चीफ.

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बलौदाबाजार 16 अक्टूबर 2026

आदिम जाति एवं अनुसूचित जाति विकास विभाग के अंतर्गत संचालित छात्रावासों एवं आश्रमों में कार्यरत अधीक्षकों के सामने आ रही तकनीकी, आर्थिक एवं प्रशासनिक समस्याओं को लेकर छात्रावास अधीक्षक संघ जिला बलौदाबाजार-भाटापारा ने मोर्चा खोल दिया है। संघ ने 15 अक्टूबर को आयुक्त, आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग, छत्तीसगढ़ शासन के नाम सहायक आयुक्त, जिला बलौदाबाजार को ज्ञापन सौंपकर एचएमएस पोर्टल की व्यवस्था को व्यावहारिक बनाने और संस्थाओं के संचालन के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने की मांग की है।

संघ का कहना है कि विभाग द्वारा डिजिटल व्यवस्था के तहत विद्यार्थियों की प्रतिदिन उपस्थिति दर्ज करने, निर्धारित प्रारूप में फोटो अपलोड करने, विद्यार्थियों की व्यक्तिगत प्रोफाइल तैयार करने तथा व्यय संबंधी विवरण ऑनलाइन दर्ज करने जैसे कार्य अनिवार्य किए जा रहे हैं। लेकिन दूसरी ओर, इन कार्यों को सुचारु रूप से संपादित करने के लिए आवश्यक कंप्यूटर, स्कैनर, इंटरनेट सुविधा और कुशल कंप्यूटर ऑपरेटर जैसी बुनियादी व्यवस्थाओं का अभाव है। ऐसे में अधीक्षकों को अपने निजी मोबाइल, इंटरनेट और जेब से खर्च कर विभागीय कार्यों का निर्वहन करना पड़ रहा है।

डिजिटल व्यवस्था पर ऐतराज नहीं, लेकिन संसाधन भी दे विभाग

अधीक्षक संघ ने स्पष्ट किया है कि उसे पारदर्शिता और ऑनलाइन व्यवस्था से कोई विरोध नहीं है। विरोध उस व्यवस्था से है, जिसमें आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए बिना संपूर्ण जिम्मेदारी अधीक्षकों पर डाल दी जाती है। संघ ने प्रत्येक संस्था में आवश्यकतानुसार कंप्यूटर, स्कैनर, इंटरनेट तथा कंप्यूटर ऑपरेटर की व्यवस्था करने की मांग की है। साथ ही, सुविधाएं उपलब्ध होने तक अधीक्षकों पर निजी खर्च का आर्थिक बोझ नहीं डालने का आग्रह किया है।

विद्यार्थियों की उपस्थिति सार्वजनिक करने पर भी उठाए सवाल

ज्ञापन में एचएमएस पोर्टल पर विद्यार्थियों की उपस्थिति एवं संबंधित विवरणों की सार्वजनिक उपलब्धता को लेकर भी गंभीर चिंता व्यक्त की गई है। संघ ने मांग की है कि इन जानकारियों तक पहुंच कलेक्टर, सहायक आयुक्त और अन्य अधिकृत विभागीय अधिकारियों तक सीमित रखी जाए, ताकि निगरानी और जवाबदेही के साथ विद्यार्थियों की निजता भी सुरक्षित रह सके।
विशेषकर कन्या छात्रावासों में विद्यार्थियों से संबंधित सूचनाओं के सार्वजनिक प्रदर्शन को लेकर संघ ने सावधानी बरतने की आवश्यकता जताई है। संघ का मानना है कि तकनीकी त्रुटियों अथवा अपूर्ण विवरणों को आधार बनाकर अधीक्षकों के विरुद्ध अनावश्यक आरोप लगाए जा सकते हैं। 

बिस्तर से लेकर झाड़ू-पोछा तक, निजी खर्च पर निर्भरता खत्म करने की मांग

छात्रावासों एवं आश्रमों के संचालन में आवश्यक सामग्री और दैनिक खर्च की समस्या को भी संघ ने प्रमुखता से उठाया है। ज्ञापन के अनुसार, चादर, कंबल, गद्दे और बिस्तर जैसी सामग्री की आपूर्ति तथा उन्हें संस्थाओं तक पहुंचाने की जिम्मेदारी विभाग को सुनिश्चित करनी चाहिए। इसके अलावा रजिस्टर, स्टेशनरी, झाड़ू, पोछा, हार्पिक, फिनाइल और अन्य सफाई सामग्री की खरीद के लिए पर्याप्त एवं नियमित बजट उपलब्ध कराने की मांग की गई है।
संघ ने सवाल उठाया है कि जब आवश्यक अभिलेख और सामग्री समय पर उपलब्ध नहीं कराई जाती, तब अधीक्षकों से संपूर्ण रिकॉर्ड संधारण एवं व्यवस्था संचालन की अपेक्षा करना कितना व्यावहारिक है? संघ का आग्रह है कि संस्थाओं की वास्तविक जरूरतों के अनुरूप बजट निर्धारित किया जाए, ताकि अधीक्षकों को बार-बार अपनी जेब से खर्च न करना पड़े।

बीमार विद्यार्थियों के लिए पोर्टल में मेडिकल अवकाश का विकल्प ही नहीं

ज्ञापन का एक महत्वपूर्ण मुद्दा विद्यार्थियों के मेडिकल अवकाश से संबंधित है। संघ ने आयुक्त कार्यालय के पत्र क्रमांक एफ 15-71/2007/25/2, दिनांक 27 सितंबर 2023 का उल्लेख करते हुए बताया कि विद्यार्थियों के अस्वस्थ होने की स्थिति में 30 दिवस के मेडिकल अवकाश का प्रावधान है। इसके बावजूद एचएमएस पोर्टल में मेडिकल अवकाश दर्ज करने के लिए पृथक विकल्प उपलब्ध नहीं होने की समस्या सामने आ रही है।
वायरल बुखार, टाइफाइड, मलेरिया, चिकनपॉक्स जैसी बीमारियों के कारण कई बार विद्यार्थियों को चिकित्सकीय सलाह पर लंबे समय तक घर पर रहना पड़ता है। ऐसे मामलों में मेडिकल अवकाश दर्ज करने की सुविधा नहीं होने से ऑनलाइन उपस्थिति व्यवस्था में व्यावहारिक कठिनाइयां उत्पन्न होती हैं। संघ ने विभागीय प्रावधान के अनुरूप पोर्टल में 30 दिवस तक के मेडिकल अवकाश का विकल्प तत्काल उपलब्ध कराने की मांग की है।

राष्ट्रीय पर्व मनाने का खर्च भी अधीक्षकों के जिम्मे क्यों

15 अगस्त, 26 जनवरी, गांधी जयंती, बाल दिवस और अन्य राष्ट्रीय एवं विभागीय कार्यक्रमों के आयोजन के लिए भी संघ ने पृथक बजट की मांग की है। इन अवसरों पर ध्वजारोहण, सजावट, बैनर, पोस्टर, फ्लेक्स और विद्यार्थियों की गतिविधियों पर होने वाले खर्च के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देशों के साथ पर्याप्त राशि स्वीकृत करने की मांग की गई है। संघ का कहना है कि पृथक बजट के अभाव में अधीक्षकों को निजी धनराशि खर्च कर कार्यक्रम आयोजित करने पड़ते हैं, जो स्थायी व्यवस्था नहीं हो सकती।

जिम्मेदारी पूरी, लेकिन संसाधनों की व्यवस्था कौन करेगा

छात्रावास अधीक्षकों की भूमिका केवल विद्यार्थियों की उपस्थिति दर्ज करने तक सीमित नहीं है। उन्हें भोजन, सुरक्षा, अनुशासन, स्वास्थ्य, दैनिक आवश्यकताओं और संपूर्ण संस्था संचालन की जिम्मेदारी भी निभानी पड़ती है। ऐसे में ऑनलाइन प्रविष्टियों का अतिरिक्त कार्यभार, तकनीकी सुविधाओं की कमी और निजी खर्च की मजबूरी उनके सामने दोहरी चुनौती खड़ी कर रही है।
छात्रावास अधीक्षक संघ ने आयुक्त से मांग की है कि ज्ञापन में उठाए गए सभी बिंदुओं पर गंभीरता से विचार कर संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए जाएं। संघ चाहता है कि एचएमएस पोर्टल की व्यवस्था जमीनी परिस्थितियों के अनुरूप बने, विद्यार्थियों की जानकारी की सुरक्षित निगरानी सुनिश्चित हो, मेडिकल अवकाश का विकल्प जोड़ा जाए और छात्रावासों एवं आश्रमों के संचालन के लिए पर्याप्त तकनीकी, मानव एवं वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराए जाएं।

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