मुंगेली नगरपालिका में पीआईसी गठन पर सवाल, फिर कैसे घूम रही ‘सभापति’ लिखी गाड़ियां?
इमरान खोखर बिहान ब्यूरो चीफ
शासन को भेजा गया पीआईसी गठन का प्रस्ताव लंबित, दो बार गठन के बाद भी विवादों से नहीं निकल पाई पी आई सी
मुंगेली -
नगरपालिका मुंगेली की कार्यप्रणाली इन दिनों लगातार सवालों के घेरे में है। दो दिन पूर्व शहर कांग्रेस अध्यक्ष दीपक गुप्ता के नेतृत्व में कांग्रेसियों ने 13 सूत्रीय मांगों को लेकर नगरपालिका सीएमओ होरी सिंह ठाकुर को ज्ञापन सौंपा था। इन मांगों में पीआईसी (प्रेसिडेंट-इन-काउंसिल) के गठन का मामला भी शामिल था। इस पर सीएमओ ने बताया कि पीआईसी गठन से संबंधित प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। लेकिन इसी बीच नगर में ‘सभापति’ लिखी गाड़ियों का खुलेआम घूमना कई सवाल खड़े कर रहा है।
जब गठन लंबित, तो सभापति कैसे ?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि पीआईसी गठन का मामला शासन स्तर पर लंबित है, तो नगर में सभापति लिखी गाड़ियां किस आधार पर घूम रही हैं? क्या संबंधित पदों पर विधिवत नियुक्ति या गठन हो चुका है? यदि हां, तो इसकी आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक क्यों नहीं है? और यदि मामला अभी लंबित है, तो सभापति लिखकर वाहन चलाने की अनुमति किस आधार पर दी जा रही है? इन सवालों पर नगरपालिका प्रशासन की स्थिति स्पष्ट होना जरूरी है।
दो बार गठन, फिर भी विवाद बरकरार
गौरतलब है कि नगरपालिका चुनाव को दो वर्ष से अधिक समय बीत चुका है। इस दौरान नगरपालिका अध्यक्ष द्वारा दो बार पीआईसी का गठन किया गया, लेकिन दोनों ही बार प्रक्रिया विवादों में घिर गई। स्थिति यह रही कि कुछ पार्षदों ने पीआईसी में शामिल होने के महज कुछ घंटों बाद ही इस्तीफा दे दिया। इसके बाद से गठन की प्रक्रिया और उसकी वैधानिक स्थिति को लेकर चर्चाएं होती रही हैं।
जनता को जवाब कब मिलेगा?
अब सवाल यह है कि पीआईसी गठन को लेकर शासन से अंतिम निर्णय कब आएगा? क्या नगरपालिका प्रशासन सभापति लिखी गाड़ियों के संबंध में स्थिति स्पष्ट करेगा? क्या संबंधित वाहनों पर पदनाम लिखने के लिए कोई आधिकारिक आदेश मौजूद है? और यदि नहीं, तो क्या इस मामले में कार्रवाई होगी?