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*खरौद में बाढ़ से वार्ड क्रमांक 13 एवं 400 एकड़ खेतिहर भूमि जलमग्न* 18 परिवारों के 75 लोगों को सुरक्षित पहुंचाया गया, तटबंध एवं पचरी निर्माण की मांग

रिगनी /खरौद। महानदी के तट पर स्थित नगर पंचायत खरौद महानदी  का जलस्तर बढ़ गया। इसका सबसे अधिक असर नगर के निचले इलाकों में देखने को मिला। शनिवार शाम वार्ड क्रमांक 13 की गलियों में करीब 5 फीट तक पानी भर गया और कई घरों में भी पानी घुसने लगा। स्थिति को देखते हुए प्रशासन एवं नगर पंचायत की टीम ने तत्काल राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया।
बाढ़ का पानी बढ़ने के बाद वार्ड क्रमांक 13 के करीब 18 घरों के लगभग 75 लोगों को सुरक्षित निकालकर खरौद स्थित रेस्ट हाउस में ठहराया गया। प्रभावित परिवारों के लिए भोजन, शुद्ध पेयजल एवं ठहरने की व्यवस्था की गई। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने प्रभावित लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण कर आवश्यक दवाइयां उपलब्ध कराईं।
कलेक्टर-एसपी ने लिया प्रभावित क्षेत्र का जायजा
बाढ़ की स्थिति की जानकारी मिलने पर कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षक ने खरौद के प्रभावित क्षेत्रों का स्थल निरीक्षण किया। अधिकारियों ने प्रभावित परिवारों से चर्चा कर उनकी समस्याएं सुनीं तथा राहत एवं बचाव कार्यों की जानकारी ली।

इस दौरान एसडीएम, तहसीलदार, पटवारी, मुख्य नगर पालिका अधिकारी, नगर पंचायत अध्यक्ष गोविंद यादव, उपाध्यक्ष महेश्वर यादव, पार्षदगण, नगर पंचायत एवं स्वास्थ्य विभाग की टीम मौजूद रही। कलेक्टर ने संबंधित अधिकारियों को 24 घंटे अलर्ट रहने तथा आवश्यकता पड़ने पर तत्काल राहत एवं बचाव कार्य सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

जलस्तर घटा, प्रशासन सतर्क

राहत की बात यह है कि अब महानदी का जलस्तर करीब 3 फीट कम हो गया है। पानी कम होने के बाद प्रभावित क्षेत्रों में स्थिति धीरे-धीरे सामान्य होने लगी है। हालांकि निचले इलाकों में प्रशासन अभी भी सतर्क है और स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।

तटबंध एवं पचरी निर्माण की मांग

महानदी के जल कटाव एवं प्रतिवर्ष होने वाली बाढ़ की समस्या के स्थायी समाधान के लिए नगर पंचायत अध्यक्ष गोविंद यादव एवं उपाध्यक्ष महेश्वर यादव ने जांजगीर-चांपा प्रवास के दौरान मंत्री ओपी चौधरी को आवेदन सौंपकर खरौद में तटबंध एवं पचरी निर्माण की स्वीकृति प्रदान करने की मांग की थी।

आवेदन में बताया गया कि छत्तीसगढ़ काशी के नाम से विख्यात लक्ष्मणेश्वर महादेव की नगरी खरौद महानदी के तट पर स्थित है। बारिश एवं नदी का जलस्तर बढ़ने के दौरान तटवर्ती क्षेत्रों में जल कटाव और बाढ़ का खतरा बढ़ जाता है। तटबंध निर्माण होने से नगर के निचले इलाकों को बाढ़ एवं कटाव से सुरक्षा मिल सकेगी, वहीं पचरी निर्माण से नदी तट का व्यवस्थित विकास होने के साथ लोगों के आवागमन की सुविधा भी बेहतर होगी।

हालिया बाढ़ की स्थिति ने एक बार फिर महानदी तट पर स्थायी सुरक्षा व्यवस्था की आवश्यकता को सामने ला दिया है। नगरवासियों को उम्मीद है कि तटबंध एवं पचरी निर्माण की स्वीकृति मिलने से भविष्य में बढ़ते जलस्तर और जल कटाव से तटीय क्षेत्रों को राहत मिलेगी।

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