प्रधानमंत्री सरस्वती साइकिल योजना पर गंभीर सवाल! घटिया साइकिलों के वितरण का आरोप, 1-2 दिन में ही बच्चों के सामने खड़ी हो रही परेशानी
ज़िला जांजगीर चांपा ब्लॉक नवागढ़
छात्राओं को स्कूल आने-जाने में सुविधा देने के उद्देश्य से संचालित प्रधानमंत्री सरस्वती साइकिल योजना के तहत वितरित की जा रही साइकिलों की गुणवत्ता पर अब गंभीर सवाल उठने लगे हैं। आरोप है कि कुछ स्थानों पर ऐसी साइकिलें वितरित की जा रही हैं, जो इस्तेमाल के महज एक-दो दिन बाद ही खराब होने लगती हैं।
साइकिलों के खराब होने से बच्चों और उनके अभिभावकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि जब सरकार बच्चों के हित में योजना चला रही है, तो फिर घटिया गुणवत्ता की साइकिलें आखिर किसके इशारे पर और किस गुणवत्ता जांच के बाद वितरित की जा रही हैं?
❓ बड़ा सवाल—जिम्मेदार कौन?
क्या वितरण से पहले साइकिलों की गुणवत्ता की जांच की गई थी?
क्या संबंधित अधिकारियों ने साइकिलों की मजबूती और मानकों की जांच की?
यदि साइकिलें इतनी जल्दी खराब हो रही हैं, तो बच्चों को इसका खामियाजा क्यों भुगतना पड़े?
सरकार की योजना का उद्देश्य बच्चों को सुविधा देना है, लेकिन यदि घटिया सामग्री के कारण बच्चे परेशान हों तो यह योजना की पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है।
अब जरूरत है कि संबंधित विभाग मामले की निष्पक्ष जांच कराए, वितरित साइकिलों की गुणवत्ता की जांच हो और यदि शिकायत सही पाई जाती है तो जिम्मेदारों पर कार्रवाई की जाए।
बच्चों के हक की योजना में लापरवाही बर्दाश्त क्यों?
गुणवत्ता से समझौता आखिर किस कीमत पर?