29 लाख के नए फंड पर सरपंच की 'गिद्ध नजर': SDM कोर्ट में धारा 40 के बावजूद बड़े खर्री में सरकारी खजाने की खुली डकैती की तैयारी!
सारंगढ़/बिलाईगढ़
सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले की ग्राम पंचायत बड़े खर्री (खर्री बड़े) में स्थानीय लोकतंत्र का गला घोंटा जा रहा है। जिस सरपंच पर वित्तीय अनियमितता और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों के तहत अनुविभागीय अधिकारी (SDM) कोर्ट में छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम की धारा 40 का बेदखली प्रकरण विचाराधीन है, वही सरपंच अब 29 लाख रुपये से अधिक के नए सरकारी फंड को ठिकाने लगाने की फिराक में है!
दस्तावेजी सबूतों के साथ का यह सबसे बड़ा खुलासा है कि कैसे कानूनी शिकंजे में घिरे होने के बावजूद सरपंच की नजरें गांव के विकास के नाम पर आए लाखों रुपयों पर टिकी हैं।
29.24 लाख रुपये का नया वर्क ऑर्डर और गबन की सीधी आशंका
ग्राम पंचायत बड़े खर्री के उपसरपंच, पंचों और सजग ग्रामीणों ने प्रशासनिक तंत्र पर सीधा हमला बोलते हुए आधिकारिक ज्ञापन प्रस्तुत किया है।
गौण खनिज रॉयल्टी मद से 08 कार्य स्वीकृत: जनपद पंचायत सारंगढ़ द्वारा 27 जनवरी 2026 को गौण खनिज रॉयल्टी मद के तहत 29,24,500 रुपये (उनतीस लाख चौबीस हजार पांच सौ रुपये) के 08 निर्माण कार्यों का कार्यादेश (Work Order) जारी किया गया है।
14 अगस्त 2026 को अगली सुनवाई: SDM कोर्ट में सरपंच गिरिजा प्रसाद पटेल के खिलाफ धारा 40 का मामला अंतिम दौर में है, जिसकी अगली सुनवाई 14 अगस्त 2026 को तय है।
खजाने पर डाका डालने की तैयारी: उपसरपंच और पंचों को गंभीर आशंका है कि फैसला आने से पहले ही सरपंच और सचिव की मिलीभगत से इस 29.24 लाख रुपये की भारी-भरकम राशि का बैंक खातों से आहरण कर बंदरबांट कर लिया जाएगा।
29 जनवरी से सो रहा था प्रशासन, 5 अगस्त को फिर ग्रामीणों ने घेरा
यह कोई पहला मौका नहीं है जब ग्रामीणों ने आवाज उठाई है।
29 जनवरी 2026: ग्रामीणों ने सबसे पहले आवेदन देकर खातों के आहरण पर तत्काल रोक लगाने की मांग की थी।
05 अगस्त 2026: महीनों बीत जाने के बाद भी जब कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो 5 अगस्त 2026 को उपसरपंच और पंचगणों (जिसमें श्रीमती कृष्णा यादव मालती सिदार, विमला पटेल, सिल्या बाई, ज्योतिप्रभा पटेल, रेशम लाल पटेल, रूपसिंह, नरगीबाई आदि शामिल हैं) ने पुनः लिखित आवेदन सौंपकर खाता तत्काल होल्ड (Freeze) करने की गुहार लगाई।
ग्रामीणों का साफ कहना है कि यदि शासकीय धनराशि का दुरुपयोग होता है, तो इसके लिए संबंधित पंचायत प्रतिनिधि और मौन प्रशासनिक अधिकारी सीधे तौर पर जिम्मेदार होंगे।
सब कुछ जानते हुए भी मौन धारण किए बैठे हैं CEO राधेश्याम नायक!
मामले का सबसे निराशाजनक पहलू प्रशासनिक संरक्षण का है। जनपद पंचायत सारंगढ़ के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) राधेश्याम नायक की भूमिका अब पूरी तरह सवालों के घेरे में है।
जब SDM कोर्ट में धारा 40 का मामला लंबित है और ग्रामीणों ने जनवरी से लेकर अगस्त तक बार-बार लिखित शिकायतें दी हैं, तब भी खाते फ्रीज करने के बजाय वर्क ऑर्डर जारी कर आहरण की खुली छूट क्यों दी गई?
ग्रामीणों का आरोप है कि जब वे अपनी फरियाद लेकर पहुंचे, तो CEO राधेश्याम नायक ने कोई सख्त वैधानिक कार्रवाई करने के स्थान पर मामले को "आपस में बैठकर ले-देकर सलटाने" जैसी गैर-जिम्मेदाराना सलाह दे डाली।
उल्टा शिकायतों से "विकास कार्य प्रभावित होने" का रोना रोकर भ्रष्टाचारियों को बचाते नजर आए।
29.24 लाख रुपये के इस खेल में आखिर किसकी शह मिली हुई है? क्या सारंगढ़ जनपद CEO राधेश्याम नायक कानून के नियमों का पालन करवाएंगे और 14 अगस्त की सुनवाई तक खाता होल्ड करेंगे, या फिर शासकीय धन की इस संभावित डकैती के मूकदर्शक बने रहेंगे?