महानदी तटीय गांवों में प्रशासन अलर्ट, राहत-बचाव की तैयारियों से टला बड़ा संकट, अब जलस्तर में आने लगी कमी..
सारंगढ़-बिलाईगढ़/
/जिले में लगातार हो रही बारिश और गंगरेल बांध से पानी छोड़े जाने के बाद महानदी का जलस्तर तेजी से बढ़ने से तटीय गांवों में बाढ़ की आशंका गहरा गई थी। संभावित खतरे को देखते हुए जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गया और समय रहते राहत एवं बचाव की व्यापक तैयारियां शुरू कर दी गईं। प्रशासन की सतर्कता और लगातार निगरानी के चलते किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए सभी आवश्यक इंतजाम पहले ही कर लिए गए थे। राहत की बात यह है कि शनिवार को महानदी का जलस्तर धीरे-धीरे कम होने लगा, जिससे लोगों ने राहत की सांस ली।
संभावित बाढ़ को देखते हुए नदी किनारे बसे गांवों में लगातार मुनादी कर लोगों को सतर्क किया गया। प्रशासन ने ग्रामीणों से उफनती नदी, नालों और पुल-पुलियों को पार नहीं करने की अपील की है। सबसे पहले चंद्रपुर-बरमकेला मुख्य मार्ग स्थित लात नाला पुल पर पानी बढ़ने के कारण आवागमन रोक दिया गया था। इसके अलावा लिप्ती, नदीगांव, परसरामपुर, सुरसी, सूरजगढ़, रानीडीह, पोरथ, तोरा, ठेंगागुड़ी, बोरिदा, रेबो (सांकरा), रतनपाली, बुदबुदा, नवापारा छोटे, पिहरा, नौघटा, बरगांव, मानिकपुर बड़े और विश्वासपुर सहित कई गांवों में लोगों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए।
शुक्रवार को डिप्टी कलेक्टर एवं जनपद पंचायत बरमकेला की प्रभारी मुख्य कार्यपालन अधिकारी शिक्षा शर्मा ने तहसीलदार कोमल प्रसाद साहू के साथ बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने ग्राम पोरथ स्थित प्रसिद्ध शिव मंदिर परिसर का जायजा लिया, जहां बाढ़ का पानी भर गया था। इसके बाद बरगांव के कलमा बैराज और लात नाला पुल पहुंचकर जलस्तर की स्थिति का निरीक्षण किया तथा स्थानीय लोगों से चर्चा कर आवश्यक निर्देश दिए।
संभावित आपदा से निपटने के लिए सरिया नगर पंचायत सभागार में डिप्टी कलेक्टर शिक्षा शर्मा ने पंचायत सचिवों, थाना प्रभारी, बिजली विभाग, स्वास्थ्य विभाग, शिक्षा विभाग और राजस्व विभाग के अधिकारियों की संयुक्त बैठक लेकर तैयारियों की समीक्षा की। बैठक में राहत केंद्रों की व्यवस्था, स्वास्थ्य सेवाएं, पेयजल व्यवस्था, बिजली आपूर्ति और बचाव कार्यों को लेकर विस्तृत रणनीति बनाई गई तथा सभी विभागों को 24 घंटे सतर्क रहने के निर्देश दिए गए।
प्रशासन ने विभिन्न स्थानों पर राहत केंद्र भी चिन्हांकित किए, ताकि आवश्यकता पड़ने पर प्रभावित परिवारों को तत्काल सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा सके। राहत केंद्रों में तोरा, लुकापारा, सरिया, बोंदा, साल्हेओना और सांकरा को शामिल किया गया, जहां आसपास के दर्जनों गांवों के लोगों के ठहरने की व्यवस्था सुनिश्चित की गई।
बाढ़ का असर कृषि क्षेत्र पर भी देखने को मिला। विशेषकर तोरा और आसपास के इलाकों में मक्का, गन्ना और धान की फसलें पानी में डूब गईं। किसानों ने फसलों को नुकसान की आशंका जताई, हालांकि अब पानी घटने से उन्हें कुछ राहत मिलने की उम्मीद है।
सरिया तहसीलदार कोमल प्रसाद साहू ने बताया कि प्रशासन लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है। राहत केंद्र पूरी तरह तैयार हैं और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए सभी विभागों को अलर्ट रखा गया है। उन्होंने कहा कि फिलहाल जलस्तर में कमी आ रही है, फिर भी लोगों से सतर्क रहने और प्रशासन के दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की गई है।