सुविधाओं के अभाव में बदहाल साप्ताहिक आम बाजार, वर्षों से समाधान की राह देख रहे व्यापारी और ग्रामीण हर रविवार उमड़ती है हजारों लोगों की भीड़, लेकिन मूलभूत व्यवस्थाएं अब भी नदारद
चबूतरों की जर्जर हालत, पेयजल-बिजली संकट और गंदगी से परेशान हैं लोग
इमरान खोखर ब्यूरो चीफ मुंगेली
सेतगंगा । क्षेत्र का प्रमुख साप्ताहिक आम बाजार हर रविवार को ग्रामीण अर्थव्यवस्था और स्थानीय व्यापार का केंद्र बनता है। यहां आसपास के दर्जनों गांवों के अलावा पंडरिया, तखतपुर, लोरमी, पांडातराई, मुंगेली और कुंडा क्षेत्र से बड़ी संख्या में व्यापारी और ग्रामीण पहुंचते हैं। बावजूद इसके बाजार क्षेत्र आज भी मूलभूत सुविधाओं के अभाव से जूझ रहा है। वर्षों से चली आ रही समस्याओं के समाधान के लिए ग्रामीणों, व्यापारियों और स्थानीय नागरिकों द्वारा कई बार शासन-प्रशासन से मांग की गई, लेकिन स्थिति में कोई उल्लेखनीय सुधार नहीं हो पाया है।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार स्थानीय लोगों का कहना है कि बाजार क्षेत्र में समस्याओं का अंबार लगा हुआ है। बरसात के मौसम में स्थिति और भी गंभीर हो जाती है, जब कीचड़, जलभराव और अव्यवस्थित व्यवस्थाओं के कारण लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। व्यापारियों का कहना है कि सुविधाओं के अभाव का सीधा असर उनके व्यवसाय पर भी पड़ रहा है।
हर चुनाव में मिलते हैं आश्वासन, लेकिन नहीं होता समाधान
ग्रामीणों का आरोप है कि प्रत्येक चुनाव के दौरान जनप्रतिनिधि बाजार की समस्याओं के समाधान का वादा करते हैं, लेकिन चुनाव समाप्त होने के बाद ये मुद्दे फिर पीछे छूट जाते हैं। वर्षों से बाजार क्षेत्र में आवश्यक सुविधाओं के विकास की मांग की जा रही है, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं हो सकी है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि बाजार की स्थिति देखकर ऐसा प्रतीत होता है मानो विकास योजनाएं यहां तक पहुंच ही नहीं पाई हैं। लोगों ने जनप्रतिनिधियों और प्रशासन से बाजार क्षेत्र के समग्र विकास की मांग की है।
लाखों की आय के बावजूद सुविधाओं का अभाव
जानकारी के अनुसार साप्ताहिक आम बाजार की नीलामी से प्रतिवर्ष लगभग 6 से 7 लाख रुपये की आय प्राप्त होती है। इसके अलावा स्थानीय निकाय को 15वें वित्त आयोग की राशि के रूप में भी प्रतिवर्ष पर्याप्त बजट उपलब्ध होता है। इसके बावजूद बाजार क्षेत्र में आधारभूत सुविधाओं का विकास नहीं हो पाने पर लोग सवाल उठा रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि जब बाजार से नियमित आय हो रही है और विकास कार्यों के लिए शासन से भी राशि प्राप्त होती है, तो फिर बाजार क्षेत्र की बदहाली दूर क्यों नहीं की जा रही है।
चबूतरे जर्जर, पेयजल और बिजली व्यवस्था बदहाल
बाजार क्षेत्र में बने चबूतरों की स्थिति काफी खराब बताई जा रही है। कई स्थानों पर चबूतरे टूट-फूट चुके हैं, जिससे दुकानदारों को सामान रखने और व्यापार करने में परेशानी होती है।
इसके अलावा पेयजल व्यवस्था भी पर्याप्त नहीं है। गर्मी के दिनों में बाजार आने वाले लोगों को पीने के पानी के लिए भटकना पड़ता है। बिजली आपूर्ति और अस्थायी विद्युत व्यवस्था भी संतोषजनक नहीं होने की शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं।
पार्किंग और सफाई व्यवस्था भी चिंता का विषय
साप्ताहिक बाजार में बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं, लेकिन पार्किंग की समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण यातायात अव्यवस्थित हो जाता है। दोपहिया और चारपहिया वाहनों के लिए अलग से स्थान निर्धारित नहीं होने के कारण बाजार क्षेत्र में भीड़भाड़ बनी रहती है।
वहीं नियमित साफ-सफाई नहीं होने से जगह-जगह कचरे के ढेर दिखाई देते हैं। बाजार समाप्त होने के बाद भी लंबे समय तक गंदगी बनी रहती है, जिससे संक्रमण और बीमारियों का खतरा बना रहता है।
स्ट्रीट लाइट व्यवस्था भी नहीं है सुचारु
स्थानीय लोगों के अनुसार बाजार क्षेत्र में स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था भी पर्याप्त नहीं है। कई स्थानों पर लाइटें खराब पड़ी हैं, जबकि कुछ क्षेत्रों में रोशनी की समुचित व्यवस्था नहीं होने से शाम ढलते ही अंधेरा छा जाता है। इससे लोगों को आवागमन में कठिनाई होती है और सुरक्षा संबंधी चिंताएं भी बनी रहती हैं।
व्यापारियों और ग्रामीणों ने की विकास कार्यों की मांग
व्यापारियों और ग्रामीणों ने बाजार क्षेत्र में स्थायी शेड, पक्के चबूतरे, स्वच्छ पेयजल, बेहतर प्रकाश व्यवस्था, नियमित सफाई, पार्किंग सुविधा और जल निकासी व्यवस्था विकसित करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि इन मूलभूत समस्याओं का समाधान किया जाए तो यह बाजार क्षेत्रीय व्यापार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए और अधिक उपयोगी साबित हो सकता है।
फिलहाल बाजार की बदहाल स्थिति को लेकर लोगों में नाराजगी बनी हुई है और वे प्रशासन से शीघ्र आवश्यक कदम उठाने की अपेक्षा कर रहे हैं।