हल्बी-हिंदी सचित्र शब्दावली निर्माण एवं ध्वनि अभिलेखन में क्षेत्र के शिक्षकों की उल्लेखनीय उपलब्धि
15-Jun-2026
प्रद्युम्न शुक्ल, ब्यूरो चीफ़ कांकेर बिहान छत्तीसगढ़
लुप्तप्राय भाषाओं के संरक्षण, संवर्धन एवं संचयन हेतु भारतीय भाषा संस्थान, शिक्षा मंत्रालय, उच्चतर शिक्षा विभाग, भारत सरकार द्वारा संचालित परियोजना के अंतर्गत हल्बी-हिंदी सचित्र शब्दावली का निर्माण सफलतापूर्वक किया गया है। यह कार्य पूर्वी क्षेत्रीय भाषा केंद्र, भुवनेश्वर (ओडिशा) में संपन्न हुआ।
इस महत्वपूर्ण परियोजना में डॉ. कृष्णपाल राणा, व्याख्याता, शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय माटोली तथा श्री सिवन बघेल, सहायक शिक्षक, शासकीय प्राथमिक शाला छोटेपारा, घोड़ागांव द्वारा सक्रिय सहभागिता निभाई गई। भारतीय भाषा संस्थान के विशेषज्ञ सुजय सरकार, एम. नागराजू, डॉ. सुदिप्ता भट्टाचार्य एवं देबिका डी. संगमा के मार्गदर्शन में लगभग 1300 हल्बी शब्दों की सचित्र शब्दावली तैयार की गई है।
विशेष बात यह है कि केवल शब्दावली निर्माण ही नहीं, बल्कि इन सभी शब्दों का उच्चारण सहित ध्वनि अभिलेखन (ऑडियो रिकॉर्डिंग) भी किया गया है, ताकि भाषा की मूल ध्वनियों एवं उच्चारण शैली को सुरक्षित रखा जा सके। इस रिकॉर्डिंग कार्य में डॉ. कृष्णपाल राणा, सिवन बघेल, एम. नागराजू एवं देबिका डी. संगमा ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
तैयार की गई यह सचित्र शब्दावली एवं ऑडियो रिकॉर्डिंग भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय एवं भारतीय भाषा संस्थान के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे शोधकर्ताओं, विद्यार्थियों, भाषा प्रेमियों एवं आम नागरिकों को हल्बी भाषा को समझने और सीखने में सुविधा होगी। भविष्य में इन संसाधनों को ऑनलाइन माध्यम से भी सुना एवं उपयोग किया जा सकेगा।
उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) द्वारा इस हल्बी-हिंदी सचित्र शब्दावली का प्रकाशन प्रस्तावित है। यह प्रयास बस्तर अंचल की समृद्ध भाषाई एवं सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।
इस उपलब्धि पर क्षेत्र के शिक्षकों, साहित्यकारों, समाजसेवियों एवं जनप्रतिनिधियों ने डॉ. कृष्णपाल राणा एवं सिवन बघेल सहित संपूर्ण टीम को बधाई एवं शुभकामनाएं प्रेषित की हैं।