जर्वे–पीथमपुर रोड: कागजों में स्वीकृत, ज़मीन पर गुम… आखिर किसके भरोसे जनता?
ज़िला जांजगीर चांपा जांजगीर जिला मुख्यालय से लगे गांव
जर्वे से पीथमपुर को जोड़ने वाली बहुप्रतीक्षित सड़क भले ही कागजों में स्वीकृत हो चुकी हो, लेकिन ज़मीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। सालों से इस रोड का इंतजार कर रहे ग्रामीण अब सवाल पूछने लगे हैं—आखिर स्वीकृति के बाद भी निर्माण में इतनी देरी क्यों?
ग्रामीणों का कहना है कि यह सड़क सिर्फ एक रास्ता नहीं, बल्कि उनकी रोज़मर्रा की जिंदगी की लाइफलाइन है। इसी मार्ग से बच्चों को स्कूल जाना होता है, किसानों को अपनी उपज बाजार तक पहुंचानी होती है और मरीजों को अस्पताल। लेकिन सड़क की हालत ऐसी है कि बरसात में कीचड़ और गर्मी में धूल ही धूल उड़ती है।
सूत्रों की मानें तो सड़क निर्माण के लिए बजट भी पास हो चुका है, फिर भी काम शुरू नहीं होना कई सवाल खड़े करता है। कहीं यह देरी ठेकेदार की लापरवाही है या फिर विभागीय उदासीनता? या फिर कोई और खेल चल रहा है पर्दे के पीछे?
स्थानीय लोगों का गुस्सा अब फूटने लगा है। उनका कहना है कि अगर जल्द ही निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ, तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे। “नेता सिर्फ वादे करते हैं, लेकिन काम के नाम पर शून्य है,” एक ग्रामीण ने नाराज़गी जाहिर करते हुए कहा।
अब देखना यह होगा कि जिम्मेदार अधिकारी इस मामले में कब तक चुप्पी साधे रहते हैं और कब जनता को राहत मिलती है। फिलहाल जर्वे–पीथमपुर रोड एक ऐसा वादा बनकर रह गया है, जो हर चुनाव में दोहराया जाता है, लेकिन हकीकत में कभी उतर नहीं