बलौदाबाजार में अवैध कारोबार बेलगाम, प्रशासन बना मुकदर्शक
गोविन्द राम ब्यूरो चीफ
बलौदाबाजार
जिले में अवैध कारोबार इस कदर हावी हो चुका है कि कानून और प्रशासन की सख्ती के दावों पर भी सवाल खड़े होने लगे हैं। रेत, शराब, सट्टा और नशीली दवाओं के अवैध कारोबार ने जिले में समानांतर व्यवस्था खड़ी कर दी है। कार्रवाई के दावे तो लगातार किए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है।
जिले के विभिन्न क्षेत्रों में रेत माफिया खुलेआम नदी-नालों और घाटों से धरती का सीना छलनी कर रहे हैं। रात के अंधेरे से लेकर दिन के उजाले तक अवैध उत्खनन का खेल जारी है। प्रशासनिक छापेमारी और जब्ती की खबरें जरूर सामने आती हैं, लेकिन यह सवाल अब भी कायम है कि आखिर इतने बड़े पैमाने पर अवैध रेत कारोबार किसके संरक्षण में फल-फूल रहा है?
वहीं अवैध शराब का कारोबार भी जिले में तेजी से पैर पसार रहा है। गांवों से लेकर शहर तक शराब की अवैध बिक्री आम चर्चा का विषय बन चुकी है। इतना ही नहीं, निजी परिसरों में शराब की पैकिंग से जुड़े सामान जैसे सीसी, ढक्कन और लेबल मिलने की खबरें भी सामने आ रही हैं, जो इस अवैध नेटवर्क की गहराई को उजागर करती हैं।
मेडिकल दुकानों में नशीली दवाओं की कथित बिक्री और सट्टे के कारोबार ने भी कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिम्मेदार विभागों की कार्रवाई के बावजूद इन अवैध धंधों का लगातार जारी रहना आम लोगों के बीच चर्चा और चिंता का विषय बना हुआ है।
हालांकि जिले में नए पुलिस अधीक्षक के पदभार संभालने के बाद कार्रवाई की गति बढ़ी है और कई मामलों में सख्ती भी देखने को मिली है, लेकिन हालात यह संकेत दे रहे हैं कि अभी और कड़ी निगरानी तथा प्रभावी कार्रवाई की जरूरत है। केवल छोटे खिलाड़ियों पर कार्रवाई कर बड़े नेटवर्क को छोड़ देने की नीति से अवैध कारोबार पर अंकुश लगना मुश्किल दिखाई दे रहा है।
प्रदेश सरकार द्वारा शिकायतों के लिए टोल-फ्री नंबर जारी किए गए हैं, उच्चस्तरीय बैठकें आयोजित की जा रही हैं और अधिकारियों को सख्त निर्देश भी दिए जा चुके हैं। इसके बावजूद यदि अवैध कारोबार चरम पर बना हुआ है, तो यह व्यवस्था की प्रभावशीलता पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।
जिले की जनता अब यह जानना चाहती है कि अवैध रेत, शराब, नशीले पदार्थों और सट्टे के इस संगठित नेटवर्क पर निर्णायक प्रहार कब होगा? आखिर कब तक माफिया बेखौफ होकर कानून को चुनौती देते रहेंगे और प्रशासन केवल कार्रवाई के दावे करता रहेगा?
यदि समय रहते कठोर और निरंतर कार्रवाई नहीं हुई, तो अवैध कारोबार का यह जाल न केवल राजस्व को नुकसान पहुंचाएगा, बल्कि सामाजिक और कानून-व्यवस्था की स्थिति को भी गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है।