अवैध ईंट भट्टों का साम्राज्य! प्रशासन की चुप्पी से पर्यावरण पर मंडरा रहा बड़ा खतरा पेड़ों की कटाई और तालाब के पानी का इस्तेमाल, प्रशासन की नाक के नीचे फल-फूल रहा अवैध कारोबार
गोविन्द राम ब्यूरो चीफ
पलारी।
जिले में इन दिनों अवैध ईंट भट्टों का कारोबार बेलगाम होता जा रहा है। गांव-गांव में बिना किसी वैध अनुमति के ईंट निर्माण का काम धड़ल्ले से चल रहा है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि जिम्मेदार विभाग इस पूरे मामले में मौन साधे बैठे हैं। पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंचाने वाले इन अवैध भट्टों पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने से प्रशासन की कार्यशैली पर भी सवाल उठने लगे हैं।
जानकारी के अनुसार जिले के कई स्थानों पर अवैध रूप से ईंट भट्टे संचालित किए जा रहे हैं। इन भट्टों को जलाने के लिए बड़ी मात्रा में पेड़ों की कटाई की जा रही है। वन और राजस्व विभाग के अंतर्गत आने वाली जमीनों से भी अवैध रूप से लकड़ी काटकर ईंट पकाने में उपयोग किया जा रहा है। इसके कारण क्षेत्र की हरियाली तेजी से खत्म होती जा रही है और पर्यावरण संरक्षण की सारी बातें कागजों तक ही सीमित नजर आ रही हैं।
सूत्रों के मुताबिक पलारी विकासखंड के ग्राम पंचायत छेरकापुर में तो स्थिति और भी गंभीर है। यहां शासकीय जमीन पर बड़े पैमाने पर ईंट भट्टे संचालित किए जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि लगभग ढाई से तीन एकड़ सरकारी जमीन का उपयोग ईंट निर्माण के लिए किया जा रहा है। आरोप यह भी है कि ग्राम पंचायत की मिलीभगत से यह जमीन ईंट भट्टा संचालकों को दी गई है और इसके एवज में पंचायत को राशि भी दी जा रही है।
सबसे चिंताजनक बात यह है कि यह ईंट भट्टा गांव के अमृत सरोवर तालाब से लगा हुआ है और भट्टा संचालक खुलेआम तालाब के पानी का उपयोग ईंट निर्माण में कर रहे हैं। एक ओर सरकार अमृत सरोवर योजना के माध्यम से जल संरक्षण और पर्यावरण बचाने की बात करती है, वहीं दूसरी ओर उसी तालाब के संसाधनों का खुलेआम दोहन किया जा रहा है।
सूत्रों की मानें तो यहां करीब 50 लाख रुपये से अधिक की ईंटों का निर्माण अवैध रूप से किया जा रहा है। न तो इस पर सरकार को कोई राजस्व मिल रहा है और न ही जीएसटी का भुगतान किया जा रहा है। शासकीय जमीन, शासकीय तालाब का पानी और अवैध लकड़ी का उपयोग कर यह कारोबार खुलेआम फल-फूल रहा है। इससे जहां पर्यावरण को भारी नुकसान हो रहा है, वहीं शासन को भी आर्थिक क्षति उठानी पड़ रही है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर इतने बड़े पैमाने पर अवैध गतिविधियां चलने के बावजूद राजस्व, वन और खनिज विभाग के जिम्मेदार अधिकारी आखिर क्यों मौन हैं? क्या प्रशासन की नजर इन अवैध भट्टों पर नहीं पड़ रही या फिर जानबूझकर अनदेखी की जा रही है?
पर्यावरण प्रेमियों और ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते इन अवैध ईंट भट्टों पर रोक नहीं लगाई गई तो आने वाले समय में क्षेत्र की हरियाली और जलस्रोत दोनों गंभीर संकट में पड़ सकते हैं। उन्होंने जिला प्रशासन से मांग की है कि पूरे जिले में संचालित अवैध ईंट भट्टों की उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए और पर्यावरण को बचाने के लिए तत्काल प्रभाव से इन पर रोक लगाई जाए।
अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस गंभीर मुद्दे को कितनी गंभीरता से लेता है या फिर अवैध ईंट भट्टों का यह काला कारोबार यूं ही चलता रहेगा।