मीडिया पर पाबंदी! BEO का विवादित आदेश, स्कूलों से कहा- ‘पत्रकारों से न करें बात’
गरियाबंद। जिले के मैनपुर ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (BEO) द्वारा जारी एक निर्देश ने शिक्षा जगत में नई बहस को जन्म दे दिया है। बीईओ ने सभी सरकारी स्कूलों को मीडिया से दूरी बनाए रखने का आदेश दिया है। यह निर्देश बीईओ कार्यालय की ओर से आधिकारिक रूप से जारी किया गया है, जिसकी प्रति सामने आने के बाद शिक्षक समुदाय और पत्रकारों में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है।
पत्रकारों से संवाद न करने का निर्देश
बीईओ कार्यालय से जारी सात बिंदुओं वाले निर्देश में एक बिंदु विशेष रूप से विवाद का कारण बना है, जिसमें स्कूलों को यह हिदायत दी गई है कि वे मीडिया से किसी भी प्रकार का संवाद न करें। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि विद्यालय से जुड़ी कोई भी जानकारी मीडिया को न दी जाए और पत्रकारों से दूरी बनाए रखी जाए।
जर्जर स्कूलों पर मीडिया रिपोर्टों के बाद आया आदेश
सूत्रों की मानें तो यह आदेश हाल ही में भारी बारिश के कारण कुछ स्कूल भवनों के क्षतिग्रस्त होने और उसकी खबरें प्रमुख समाचार माध्यमों में आने के बाद जारी किया गया है। इन रिपोर्टों के कारण स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हुए थे। आशंका जताई जा रही है कि इन्हीं घटनाओं के बाद बीईओ की ओर से यह कदम उठाया गया है।
BEO के सात निर्देशों में क्या है शामिल
स्कूलों का संचालन निर्धारित समय अनुसार हो।
विद्यालय की सफाई, रसोई और शौचालय की नियमित सफाई सुनिश्चित की जाए।
किसी भी जर्जर भवन में स्कूल संचालन न किया जाए।
स्कूल से जुड़ी कोई भी जानकारी मीडिया को न दी जाए।
आवश्यक दस्तावेज और पंजी संधारित किए जाएं।
संकुल समन्वयक और प्राचार्य प्रतिदिन स्कूलों की निगरानी करें।
विद्यालय का संचालन व्यवस्थित एवं सुरक्षित परिसर में हो।
शिक्षक संगठनों और पत्रकारों ने जताई आपत्ति
बीईओ के इस आदेश पर शिक्षक संगठनों और स्थानीय पत्रकारों ने नाराजगी व्यक्त की है। शिक्षकों का कहना है कि यदि कोई समस्या या अव्यवस्था है तो उसे उजागर करने में मीडिया की भूमिका अहम होती है। मीडिया के माध्यम से ही कई बार समस्याएं शासन-प्रशासन तक पहुंचती हैं और उसका समाधान भी निकलता है। वहीं पत्रकारों का कहना है कि यह आदेश पारदर्शिता के विरुद्ध है। “जब कोई अधिकारी अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन ठीक से नहीं कर पाता तो वह सवालों से बचने के लिए ऐसे आदेश निकालता है,” एक वरिष्ठ पत्रकार ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा।
सूचना के अधिकार और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर प्रश्न
विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार का निर्देश न केवल सूचना के अधिकार (RTI) की भावना के विरुद्ध है, बल्कि यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर भी सीधा प्रहार है। सरकारी स्कूलों की कार्यप्रणाली को जनमानस और शासन के सामने लाने में मीडिया की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। ऐसे में पत्रकारों से दूरी बनाए रखने का फरमान निंदनीय बताया जा रहा है।
क्या शिक्षा विभाग लेगा संज्ञान?
फिलहाल इस आदेश को लेकर जिला स्तर पर विवाद गहराता जा रहा है। शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन शिक्षकों और पत्रकारों के विरोध को देखते हुए संभावना जताई जा रही है कि विभाग जल्द ही इस पर स्पष्टीकरण जारी कर सकता है।