राजनीति

छत्तीसगढ़ में 3 साल में 32 करोड़ की साइबर-ठगी:सांसद बृजमोहन ने सदन में उठाया 'डिजिटल अरेस्ट' का मुद्दा

रायपुर

लोकसभा के शून्यकाल में गुरुवार (11 दिसंबर) को छत्तीसगढ़ में ऑनलाइन धोखाधड़ी का मुद्दा उठा। रायपुर से सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने सदन में सरकार का ध्यान साइबर ठगी के ट्रेंड ‘डिजिटल अरेस्ट’ की ओर खींचा।

सांसद अग्रवाल ने कहा कि डिजिटल अरेस्ट के नाम पर लोगों की पूरी जीवनभर की कमाई कुछ ही मिनटों में उड़ा दी जा रही है। उन्होंने बताया कि ऑनलाइन लुटेरे अब पुलिस अफसर बनकर वीडियो कॉल करते हैं, वर्दी में दिखाई देते हैं और फर्जी कार्रवाई का भय दिखाकर पीड़ितों से पैसे ट्रांसफर करा लेते हैं।

सांसद अग्रवाल ने सदन में कहा कि डिजिटल अरेस्ट के इस गिरोह की चपेट में सबसे ज्यादा बुजुर्ग, अकेले रहने वाले लोग और तकनीक से अनभिज्ञ वर्ग आ रहा है। ऐसे पीड़ितों से लुटेरे उनकी बचत, रिटायरमेंट फंड और फिक्स्ड डिपॉजिट तक एक झटके में निकलवा लेते हैं।

सांसद अग्रवाल ने साइबर ठगों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति बनाने की मांग की है। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ में पिछले 3 सालों में डिजिटल अरेस्ट की आड़ में ऑनलाइन ठगी के 40 से ज्यादा मामले सामने आए हैं। इन केसों में करीब 32 करोड़ की ठगी हुई है। साथ ही उन्होंने लोगों को साइबर ठगी से बचाने कुछ महत्वपूर्ण भी सुझाव भी दिए।

बृजमोहन के अनुसार समस्या तब और गंभीर हो जाती है, जब डर और धमकी के माहौल में पीड़ित कुछ ही मिनटों में अपनी उम्रभर की बचत का 80 प्रतिशत -90 प्रतिशत तक रकम ट्रांसफर कर देते हैं।

उन्होंने कहा कि मौजूदा बैंकिंग सिस्टम ऐसे मामलों को सामान्य ट्रांजैक्शन की तरह प्रोसेस कर देता है, जबकि इस प्रक्रिया में तत्काल सुधार की आवश्यकता है।

छत्तीसगढ़ में पिछले 3 सालों के दौरान डिजिटल अरेस्ट की आड़ में ऑनलाइन ठगी के 40 से ज्यादा गंभीर मामले उजागर हुए हैं, जिनमें लगभग 32 करोड़ रुपए की फर्जीवाड़े की पुष्टि हो चुकी है।

इसके अलावा कुछ घटनाएं ऐसी भी सामने आई हैं, जिन पर औपचारिक अपराध दर्ज नहीं हुआ है। लेकिन शिकायतों के आधार पर जांच जारी है। रायपुर, बिलासपुर, भिलाई और राजनांदगांव जैसे बड़े शहरों में बड़ी तादाद में लोग साइबर ठगों का शिकार बने हैं।

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