संस्कृति

गौ सेवा से बड़ी कोई सेवा नहीं : पं. रत्नेश

-:गौ सेवा से बड़ी कोई सेवा नहीं : पं. रत्नेश:-

ग्राम भेण्डरी के पुराना गौठान स्थित हनुमान मंदिर परिसर में आयोजित छह दिवसीय संगीतमय श्रीमद्भागवत महापुराण कथा के छठवें दिन कथावाचक भागवताचार्य रत्नेश राममिलन पांडेय के मुखारविंद से श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का भावपूर्ण श्रवण किया। कथावाचक ने अपने प्रवचन में कहा कि गौ सेवा से बड़ा कोई धर्म और कोई सेवा नहीं है। प्रत्येक घर में गौमाता की सेवा होनी चाहिए। उन्होंने यह भी बताया कि गौ संवर्धन से बढ़कर कोई पुण्य कार्य नहीं है। गौमाता के गोबर से घर-आंगन पवित्र होता है, और गौमाता में तैंतीस कोटि देवी-देवताओं का वास माना गया है। गौ सेवा से महान पुण्य की प्राप्ति होती है।

कथा के दौरान भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं, नंद महोत्सव, पूतना मोक्ष, दही लूट, माखन लीलाएँ, रुक्मिणी विवाह और कंस वध का अत्यंत सुंदर एवं संगीतमय वर्णन किया गया। मधुर संगीत के साथ प्रस्तुत कथाओं पर श्रद्धालु झूम उठे और भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं के सजीव चित्रण से श्रोता भावविभोर हो गए। यह श्रीमद्भागवत महापुराण कथा गौ संवर्धन और गौमाता के संरक्षण के उद्देश्य से आयोजित की जा रही है। आयोजन ग्राम ब्राइट फ्यूचर एकेडमी के युवाओं द्वारा किया गया है। आयोजकों ने बताया कि इस कथा से प्राप्त होने वाला संपूर्ण दान गौ सेवा के कार्यों में ही लगाया जाएगा।

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