मानसून-सत्र...खाद के मुद्दे पर हंगामा, डॉ रमन भड़के
रायपुर
छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र का चौथा दिन हंगामेदार रहा। डीएपी (उर्वरक) खाद की सप्लाई का मुद्दा उठाते हुए विपक्ष ने जमकर हंगामा किया। नेता प्रतिपक्ष चरण दास महंत, पूर्व CM भूपेश बघेल, पूर्व मंत्री उमेश पटेल ने सरकार पर प्राइवेट सेक्टर को डीएपी देकर किसानों को वंचित रखने का आरोप लगाया।
सदन में खूब नारेबाजी हुई। हंगामा करते हुए कांग्रेस के विधायक विधानसभा सदन के गर्भगृह में जा पहुंचे। कई बार समझाने के बाद भी जब कांग्रेसी विधायक सदन के बाहर नहीं गए तो स्पीकर डॉ रमन सिंह नाराज हुए।
डॉ रमन ने कहा कि 25 साल से जो परंपरा चली आ रही है, इसे तोड़ने का काम प्रतिपक्ष के लोग कर रहे हैं। यहां संसदीय परंपराओं की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। इसके बाद डॉक्टर रमन सिंह ने सदन की कार्रवाई को स्थगित कर दिया। हालांकि, 5 मिनट बाद सदन की कार्रवाई फिर से शुरू हुई।
उमेश पटेल ने कहा कि यह तो 50% से भी कम भंडारण की स्थिति है। जवाब में कृषि मंत्री राम विचार नेताम ने डीएपी की कमी स्वीकारी, उन्होंने कहा लेकिन यह सिर्फ छत्तीसगढ़ की परेशानी नहीं है। एक वैश्विक समस्या है, देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में इस व्यवस्था को ठीक करने के लिए काम किया जा रहा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम सुनते ही कांग्रेस विधायकों ने बवाल शुरू कर दिया। कांग्रेस विधायकों ने आरोप लगाया कि कृषि मंत्री भाषण दे रहे हैं। इसके बाद प्राइवेट सेक्टर को डीएपी देने का आरोप लगाते हुए कांग्रेस विधायकों ने हंगामा कर दिया।
स्थिति काे संभालते हुए विधानसभा अध्यक्ष डॉ रमन सिंह ने कहा कि प्रदेश की स्थिति को देखते हुए सरकार को यह करना चाहिए कि डीएपी प्राइवेट सेक्टर में न देकर 100% सोसाइटी में ही देना चाहिए। कृषि मंत्री ने कहा कि हम यही व्यवस्था आने वाले दिनों में करने जा रहे हैं।
'DAP खाद देना होगा', 'किसान विरोधी सरकार नहीं चलेगी', 'कृषि मंत्री इस्तीफा दो' के नारे खुद भूपेश बघेल लगवाते हुए सभी विधायकों के साथ गर्भगृह में आ गए।
डॉ रमन सिंह ने कहा कि सदन के गर्भगृह में आने की वजह से सभी कांग्रेस विधायक निलंबित हो गए हैं। सदन के बाहर चले जाएं। कांग्रेसियों ने इस बात को अनदेखा कर दिया और वहीं बैठकर नारे लगाते रहे।
इस पर गृहमंत्री विजय शर्मा ने आपत्ति जताते हुए कहा कि जब ये सभी निलंबित हो चुके हैं फिर भी सदन की कार्रवाई में बाधा पहुंचाना, ये तो नई परंपरा की शुरुआत कर रहे हैं। इसके बाद फिर रमन सिंह ने सभी को बाहर जाने को कहा, ऐसा दो बार कहा गया मगर कोई कांग्रेसी विधायक बाहर नहीं गया। नारेबाजी चलती रही।
इसके बाद डॉ रमन सिंह खड़े हुए, उन्होंने कहा- प्रतिपक्ष के सम्मानित सदस्यों ने निरंतर असंसदीय व्यवहार किया है। इस विधानसभा में दो बार, तीन बार आग्रह करने के बाद भी बाहर नहीं गए। जो यहां की 25 साल की परंपरा है उसको ध्वस्त करने में लगे हुए हैं।
यह नुकसान छत्तीसगढ़ का है, छत्तीसगढ़ की संसदीय परंपराओं का है। पूरा देश देखता है कि छत्तीसगढ़ ने क्या मापदंड स्थापित किए थे और उस मापदंड की धज्जियां कैसे उड़ाई जा रही है, मेरे आग्रह के बाद भी आप समझने को तैयार नहीं है, इसलिए सदन की कार्रवाई स्थगित की जाती है।