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अंतागढ़ में सरपंचों का आंदोलन खत्म, प्रशासन के आश्वासन के बाद खुला चक्का जाम — प्रशासनिक व्यवस्था पर भी उठे सवाल

प्रद्युम्न शुक्ल ब्यूरो चीफ कांकेर बिहान छत्तीसगढ़ 

कांकेर। अंतागढ़ विकासखंड की 56 ग्राम पंचायतों के सरपंचों द्वारा ग्राम विकास कार्यों की स्वीकृति की मांग को लेकर पिछले एक सप्ताह से जारी आंदोलन आखिरकार प्रशासन के आश्वासन के बाद समाप्त हो गया। आंदोलनकारियों ने भानुप्रतापपुर–नारायणपुर मुख्य मार्ग पर चक्का जाम कर दिया था, जिससे करीब 24 घंटे तक आवागमन पूरी तरह बाधित रहा और दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं।

धरना स्थल अंतागढ़ के कुहचे चौक एवं बूढ़ा चौक में रविवार को प्रशासनिक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के बीच संयुक्त चर्चा हुई। चर्चा में अपर कलेक्टर अरुण वर्मा, एसडीएम राहुल रजक, एसडीओपी शुभम तिवारी, अतिरिक्त तहसीलदार एवं थाना प्रभारी रमेश जायसवाल मौजूद रहे। पंचायत प्रतिनिधियों ने बताया कि विभिन्न विकास कार्यों के प्रस्ताव काफी समय पहले डीएमएफ शाखा को भेजे जा चुके हैं, लेकिन अब तक स्वीकृति नहीं मिलने से क्षेत्रीय विकास प्रभावित हो रहा है।

चर्चा के दौरान प्रशासन की ओर से आश्वासन दिया गया कि भीषण गर्मी और आगामी वर्षा ऋतु को देखते हुए अति-आवश्यक कार्यों को आगामी 4 से 5 दिनों के भीतर स्वीकृत किया जाएगा। वहीं अन्य अधोसंरचनात्मक कार्यों को अगले 15 दिनों के भीतर डीएमएफ की शासी परिषद से अनुमोदन दिलाकर प्राथमिकता के आधार पर मंजूरी दी जाएगी। अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि फंड की उपलब्धता और कार्यों की आवश्यकता के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।

प्रशासन की ओर से मिले लिखित एवं सकारात्मक आश्वासन के बाद जनप्रतिनिधियों और सरपंच संघ ने आंदोलन समाप्त करने तथा सड़क से चक्का जाम हटाने की घोषणा कर दी। मौके पर पंचनामा तैयार कर उपस्थित लोगों के समक्ष पढ़कर सुनाया गया, जिस पर सभी पक्षों ने सहमति जताते हुए हस्ताक्षर किए।

हालांकि इस पूरे घटनाक्रम के दौरान प्रशासनिक व्यवस्था और पुलिस की कार्यशैली पर सवाल भी उठे। सड़क जाम के चलते बसें, यात्री वाहन और मालवाहक गाड़ियां घंटों तक तपती धूप में फंसी रहीं। यात्रियों, महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।

मौके पर मौजूद कुछ पत्रकारों और यात्रियों का आरोप है कि सहायता मांगने पर पुलिस और प्रशासन की ओर से अपेक्षित सहयोग नहीं मिला। लोगों का कहना है कि जब पूरा क्षेत्र जाम से जूझ रहा था, तब जिम्मेदार अधिकारी समस्या के त्वरित समाधान की बजाय औपचारिकताओं में व्यस्त नजर आए।

स्थानीय लोगों ने सवाल उठाया कि सरकार जहां नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास और सुशासन की बात कर रही है, वहीं जमीनी स्तर पर प्रशासन की संवेदनशीलता और जवाबदेही पर लगातार प्रश्न खड़े हो रहे हैं। लोगों ने मांग की है कि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने, इसके लिए प्रशासन समय रहते पंचायत प्रतिनिधियों से संवाद स्थापित करे और आम जनता को परेशानियों से बचाने के लिए प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित करे।

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