एफएलएन सह नवीन पाठ्यपुस्तक प्रशिक्षण से सशक्त हुए बीआरज शिक्षको तक पहुंचेगा नवाचार
पाटनl जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान, डाइट दुर्ग में शिक्षा के नवोन्मेषी युग का एक प्रेरणादायी अध्याय उस समय साकार हुआ, जब एफएलएन (फाउंडेशनल लिटरेसी एंड न्यूमेरसी) एवं नवीन पाठ्यपुस्तक आधारित विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। इस प्रशिक्षण ने जिले की शैक्षिक दिशा को नई ऊर्जा, नवीन दृष्टि और सृजनात्मक संकल्प प्रदान किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ डाइट दुर्ग के प्राचार्य आदरणीय श्री पी. सी. मर्कले के मार्गदर्शन में हुआ। उन्होंने अपने प्रेरक उद्बोधन में कहा कि शिक्षा केवल पाठ्यक्रम का विषय नहीं, बल्कि बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण की आधारशिला है। शिक्षक यदि संवेदनशीलता, नवाचार और समर्पण के साथ कार्य करें, तो कक्षा का प्रत्येक कोना सीखने का उत्सव बन सकता है।
एफएलएन प्रभारी डॉ. एच. के. साहू ने बुनियादी साक्षरता एवं संख्यात्मक दक्षता के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि प्रारंभिक शिक्षा की मजबूत नींव ही बच्चों के भविष्य को उज्ज्वल बनाती है। उन्होंने शिक्षकों को बालकेंद्रित शिक्षण, सतत मूल्यांकन और आनंदमय अधिगम के महत्व से अवगत कराया।
प्रशिक्षण में डॉ. शिशिरकना भट्टाचार्य, श्रीमती संध्या शर्मा, श्रीमती आभा वर्मा तथा श्रीमती तृप्ति चंद्रवंशी ने नवीन पाठ्यपुस्तकों की संरचना, उद्देश्य, विषयवस्तु और क्रियान्वयन की बारीकियों को अत्यंत सरल, सहज एवं प्रभावी शैली में प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि नई पाठ्यपुस्तकों में बच्चों की जिज्ञासा, रचनात्मकता, अभिव्यक्ति और अनुभवात्मक सीखने को केंद्र में रखा गया है, ताकि शिक्षा बोझ नहीं, बल्कि आनंदमयी यात्रा बन सके।
प्रशिक्षण के दौरान हिंदी, गणित, पर्यावरण अध्ययन, अंग्रेजी, खेल आधारित शिक्षण, गतिविधि आधारित अधिगम तथा थीम आधारित शिक्षण पद्धति पर विस्तृत सत्र आयोजित किए गए। डाइट एवं डीआरजी टीम ने उदाहरणों, गतिविधियों और व्यवहारिक अभ्यासों के माध्यम से बीआरजी सदस्यों को यह समझाया कि कक्षा शिक्षण को किस प्रकार जीवंत, रोचक और प्रभावशाली बनाया जा सकता है।
इस महत्वपूर्ण प्रशिक्षण में डीआरजी टीम के सदस्य विरेन्द्र कुमार साहू (प्रधानपाठक), पी. एल. सपहा, कामता प्रसाद धनकर, कामता प्रसाद साहू, तिलक राम साहू एवं नम्रता देवांगन ने सक्रिय भूमिका निभाई। सभी ने विषय विशेषज्ञ के रूप में अपनी सारगर्भित प्रस्तुति से प्रशिक्षण को ज्ञानवर्धक और प्रेरणास्पद बनाया।
जिले के प्रत्येक विकासखंड से 12-12 बीआरजी सदस्यों ने सहभागिता कर इस प्रशिक्षण को सार्थक बनाया। अब यही प्रशिक्षित बीआरजी अपने-अपने विकासखंडों में शिक्षकों को नवीन पाठ्यक्रम, एफएलएन एवं बालकेंद्रित शिक्षा की बारीकियों से अवगत कराएंगे। प्रशिक्षण की आगामी रूपरेखा के तहत पहले शिक्षकों को तीन दिवसीय ऑनलाइन प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा, जिसके पश्चात पांच दिवसीय ऑफलाइन प्रशिक्षण आयोजित कर कक्षा-कक्ष में नवीन शिक्षण पद्धतियों के प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित किया जाएगा।
यह प्रशिक्षण केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं, बल्कि शिक्षा की नई चेतना का वह दीपोत्सव है, जो बच्चों के उज्ज्वल भविष्य, शिक्षकों की सृजनशीलता और विद्यालयों की गुणवत्ता को नई ऊंचाइयों तक ले जाने का मार्ग प्रशस्त करेगा।
डाइट दुर्ग का यह अभिनव प्रयास निश्चित ही जिले की शैक्षिक प्रगति में मील का पत्थर सिद्ध होगा।