खैरागढ़ में खाद-केसीसी घोटाले का आरोप, सैकड़ों किसान पहुंचे कलेक्ट्रेट
खैरागढ़। सेवा सहकारी समिति डोकराभाठा से जुड़े आठ गांवों के लगभग 200 किसान सोमवार को अपनी समस्याओं को लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे। किसानों ने समिति के कर्मचारियों पर अभद्र व्यवहार और धन के गबन का आरोप लगाया है। किसानों का कहना है कि उन्हें न तो पर्याप्त मात्रा में खाद मिला है और न ही केसीसी (किसान क्रेडिट कार्ड) के तहत ऋण का सही लाभ मिला, इसके बावजूद उनके खातों में भारी कर्ज दर्ज कर दिया गया है। किसानों ने बताया कि खाद के लिए परमिट तो जारी कर दिया गया, लेकिन वास्तविक रूप से उन्हें खाद उपलब्ध नहीं कराया गया, जिससे उन्हें गंभीर आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इस संबंध में जिला किसान कांग्रेस के अध्यक्ष देवराज किशोर दास वैष्णव के नेतृत्व में किसानों ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर अपर कलेक्टर सुरेंद्र ठाकुर से मुलाकात की और त्वरित कार्रवाई की मांग की। अपर कलेक्टर ने मामले की जांच कर दो दिनों के भीतर समाधान का आश्वासन दिया है।
25 हजार से 1 लाख तक कर्ज दिखाने का आरोप
किसानों ने बताया कि वे समिति में खाद-बीज और केसीसी ऋण के तहत लेन-देन करते हैं। जब वे बकाया राशि जमा करने समिति पहुंचे, तो उनके खातों में 25 हजार से लेकर 1 लाख रुपये तक का कर्ज दर्शाया गया। किसानों का कहना है कि उन्होंने इतनी मात्रा में खाद लिया ही नहीं है, जितना उनके खाते में दर्ज किया गया है। वे जितनी वास्तविक राशि थी, उतनी लेकर कर्ज चुकाने पहुंचे थे, लेकिन कंप्यूटर ऑपरेटर द्वारा ऑनलाइन रिकॉर्ड का हवाला देकर अधिक राशि जमा करने के लिए कहा गया।
फर्जी तरीके से खाद परमिट जारी करने का आरोप
किसानों ने आरोप लगाया कि समिति द्वारा फर्जी तरीके से उनके नाम पर खाद के परमिट जारी किए गए, जबकि उन्हें वास्तविक रूप से खाद नहीं मिला।
किसानों ने समिति प्रबंधक मिश्रा और कंप्यूटर ऑपरेटर जगमोहन जोशी पर गंभीर फर्जीवाड़े का आरोप लगाया है। हालांकि, प्रबंधक मिश्रा वर्तमान में निलंबित बताए जा रहे हैं, लेकिन किसानों का कहना है कि इस पूरे मामले में कंप्यूटर ऑपरेटर की भूमिका प्रमुख है।
एफआईआर दर्ज करने की मांग
जिला किसान कांग्रेस अध्यक्ष देवराज किशोर दास वैष्णव ने इस मामले में संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की है।
किसानों का कहना है कि बिना उनकी अनुमति के खाद का परमिट जारी करना और केसीसी ऋण दर्शाना समझ से परे है। अब सभी की नजर प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हुई है कि आश्वासन के बाद इस मामले में क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।