गडकरी बोले- नई पीढ़ी को जिम्मेदारी देने का समय:
नागपुर
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के 'जिम्मेदारी नई पीढ़ी के हाथों में सौंपने' वाले बयान पर मंगलवार को सफाई आई। गडकरी के ऑफिस ने कहा, 'उन्होंने अपने लक्ष्मणराव मानकर ट्रस्ट से जुड़े सामाजिक कार्यों की जिम्मेदारी नई पीढ़ी को सौंपने की बात कही थी।'
ऑफिस ने कहा कि उनके बयान का राजनीति से कोई संबंध नहीं है। दरअसल, कई मीडिया रिपोर्ट्स में गडकरी के इस बयान को उनके राजनीति से रिटायरमेंट लेने से जोड़ दिया गया था।
गडकरी का यह बयान 23 अगस्त का है। उन्होंने पुणे के काटोल में कहा था, ‘अब ज्यादा काम नहीं कर सकता। जब कर सकता था, तब किया। नई पीढ़ी को जिम्मेदारी सौंपनी चाहिए।
नागपुर के 'एकलव्य एकल विद्यालय शिक्षक-पर्यवेक्षक प्रशिक्षण वर्ग' के कार्यक्रम में 23 अगस्त को गडकरी ने कहा, ' मैं ज्यादा काम नहीं कर पाता। जब कर सकता था, तब किया। अब मेरा काम में दखल कम हो गया है।'
लक्ष्मणराव मानकर स्मृति संस्था नागपुर की एक सामाजिक संस्था है। मुख्य रूप से आदिवासी और ग्रामीण इलाकों में शिक्षा के क्षेत्र में काम करती है। संस्था एकल विद्यालय चलाती है। ट्रस्ट की अपनी वेबसाइट के मुताबिक, इसे नितिन गडकरी ने स्वर्गीय लक्ष्मणराव मानकर ‘गुरुजी’ की स्मृति में स्थापित किया था।
महात्मा फुले कृषि विद्यापीठ के दीक्षांत समारोह में राष्ट्रगान के दौरान गडकरी अचानक लड़खड़ाकर बेहोश हो गए। महाराष्ट्र के तत्कालीन राज्यपाल सी. विद्यासागर राव ने उन्हें संभाला। डॉक्टरों ने जांच की और कुछ देर बाद वे सामान्य हो गए। शुरुआत में गडकरी ने खुद ट्वीट किया कि उन्हें लो ब्लड शुगर की वजह से हल्की परेशानी हुई थी।
लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान एक रैली में भाषण देते हुए गडकरी अचानक बेहोश होकर मंच पर गिर पड़े। सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें संभाला। कुछ देर बाद वे ठीक हुए और अपना भाषण पूरा भी किया। इस बार गडकरी ने खुद बताया कि उन्हें तेज गर्मी के कारण असहज महसूस हुआ था और बाद में वे अगले कार्यक्रम के लिए रवाना हो गए।
नितिन गडकरी का राजनीतिक सफर करीब पांच दशक लंबा है। उन्होंने 1970 के दशक में छात्र राजनीति से शुरुआत की और 1989 में पहली बार महाराष्ट्र विधान परिषद पहुंचे। वे महाराष्ट्र में PWD मंत्री और बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष रहे।