राज्योत्सव की तैयारियों के बीच रिसदा बाईपास के गड्ढों में निकला ‘जलपरा’! बलौदाबाजार की बदहाल सड़क ने खोली विकास के दावों की पोल
गोविंद राम ब्यूरो चीफ
बलौदाबाजार 31 अक्टूबर 2026
छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना की 26वीं वर्षगांठ पर बलौदाबाजार जिले में राज्योत्सव की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। जिला प्रशासन उत्सव को भव्य बनाने में जुटा है, लेकिन इसी बीच जिला मुख्यालय से महज पांच किलोमीटर दूर रिसदा बाईपास सड़क की बदहाली ने विकास के दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिस सड़क पर वाहनों के पहिए चलने चाहिए, वहां गड्ढों में तालाब जैसा पानी भरा हुआ है। हालात ऐसे हैं कि स्थानीय युवाओं ने सड़क के गड्ढे में नहाकर विरोध का ऐसा अनोखा तरीका अपनाया, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। यह वीडियो केवल मनोरंजन या व्यंग्य नहीं, बल्कि व्यवस्था की उस विडंबना को उजागर कर रहा है, जहां एक ओर राज्य की उपलब्धियों का उत्सव मनाने की तैयारी है, तो दूसरी ओर जनता बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रही है।
रिसदा बाईपास के गड्ढे में निकला 'जलपरा', युवाओं के व्यंग्य प्रशासन को दिखा रहा आईना
बीते दिनों अर्नब चक्रवात के प्रभाव से हुई बारिश के बाद बलौदाबाजार-सिमगा मार्ग पर स्थित रिसदा बाईपास की स्थिति और भी भयावह हो गई है। सड़क पर कई स्थानों पर तीन से चार फीट तक गहरे गड्ढे होने की बात सामने आ रही है। बारिश का पानी भरने से सड़क के बड़े हिस्से ने तालाब का रूप ले लिया है।
इसी बीच कुछ स्थानीय युवाओं ने सड़क की दुर्दशा को उजागर करने के लिए अनोखा तरीका अपनाया। वायरल वीडियो में एक युवक गड्ढे में भरे पानी में नहाते हुए व्यंग्यात्मक अंदाज में कहता नजर आ रहा है कि रिसदा बाईपास के गड्ढे में जलपरा निकल आया है। लोग पैसे खर्च करके दूसरी जगह जलपरी देखने जाते हैं, लेकिन बलौदाबाजार के रिसदा बाईपास में जलपरा के दर्शन बिल्कुल निशुल्क हो रहे हैं। जिसे देखना हो, वह रिसदा बाईपास पहुंच जाए।

बताया जा रहा है कि उक्त वीडियो इंस्टाग्राम के 'सीजी स्टार दाल वाला', 'जीतेन्द्र वीलॉग 99' सहित विभिन्न सोशल मीडिया अकाउंट पर प्रसारित हो रहा है। वीडियो पर लोगों की तीखी प्रतिक्रियाएं भी सामने आ रही हैं। कोई व्यंग्य करते हुए लिख रहा है, धन्यवाद मंत्री जी, स्विमिंग पूल के लिए! तो कोई कह रहा है, विधायक जी, वीडियो देखकर तो जाग जाओ! कई लोग जिला प्रशासन, जनप्रतिनिधियों और प्रदेश सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं। वहीं अनेक लोगों ने युवाओं के इस अनोखे विरोध प्रदर्शन की सराहना की है।
राज्योत्सव के लिए मंच सजेंगे, लेकिन जनता की राह कब संवरेगी
रिसदा बाईपास की बदहाली ऐसे समय सामने आई है, जब जिला प्रशासन राज्योत्सव की तैयारियों में व्यस्त है। यह विरोधाभास अपने आप में कई असहज सवाल खड़े करता है। आखिर जिस जिले में मुख्यालय से कुछ किलोमीटर दूर की सड़क तक सुरक्षित आवागमन के योग्य नहीं रह गई हो, वहां विकास की उपलब्धियों का उत्सव किस आधार पर मनाया जाएगा?
राज्योत्सव निश्चित रूप से छत्तीसगढ़ की अस्मिता, संस्कृति, गौरव और उपलब्धियों का महत्वपूर्ण पर्व है। इसका आयोजन होना चाहिए, लेकिन सवाल उत्सव मनाने का नहीं, बल्कि उत्सव की सार्थकता का है। जब जनता की रोजमर्रा की जिंदगी गड्ढों, कीचड़ और दुर्घटना के खतरे से जूझ रही हो, तब केवल भव्य मंच, चमकदार रोशनी, आकर्षक पंडाल और औपचारिक भाषणों से विकास की तस्वीर नहीं बदली जा सकती।

रिसदा बाईपास का वायरल वीडियो मानो जिला प्रशासन से पूछ रहा है कि क्या विकास केवल सरकारी कार्यक्रमों के मंचों पर दिखाई देने वाली उपलब्धियों का नाम है? क्या सड़क पर सुरक्षित चलना, एम्बुलेंस का निर्बाध गुजरना और स्कूली बच्चों का सुरक्षित घर पहुंचना विकास की प्राथमिकताओं में शामिल नहीं है?
यदि प्रशासन उत्सव स्थल की सजावट के लिए तत्पर हो सकता है, तो वर्षों से बदहाल सड़क को दुरुस्त कराने के लिए वही तत्परता क्यों नहीं दिखाई देती? यह प्रश्न केवल एक सड़क का नहीं, बल्कि शासन की प्राथमिकताओं और प्रशासनिक जवाबदेही का है।
राज्योत्सव के मंच से विकास की उपलब्धियां गिनाना आसान है, लेकिन रिसदा बाईपास के गड्ढों में उतरकर जनता की परेशानी समझना कहीं अधिक जरूरी है। किसी भी सरकार और प्रशासन की वास्तविक उपलब्धि उत्सव की भव्यता से नहीं, बल्कि आम नागरिक को मिलने वाली सुविधाओं से आंकी जानी चाहिए।
दस दिन पहले गड्ढों की लेवलिंग, फिर सड़क बनी दलदल,मरम्मत के नाम पर आखिर कैसी खानापूर्ति?
स्थानीय स्तर पर मिली जानकारी के अनुसार, करीब दस दिन पहले रिसदा बाईपास के गड्ढों की लेवलिंग के लिए रोड रोलर चलाया गया था। लेकिन भारी वाहनों की आवाजाही और बारिश के बाद सड़क दोबारा गहरे गड्ढों तथा कीचड़ में तब्दील हो गई।
यदि सड़क की मरम्मत के नाम पर केवल गड्ढों को समतल करने की औपचारिकता निभाई गई, तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या प्रशासन के पास इस व्यस्त मार्ग के स्थायी सुधार की कोई ठोस योजना है?
सड़क की वर्तमान स्थिति में दोपहिया वाहन चालकों, साइकिल सवारों और पैदल राहगीरों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय जानकारी के अनुसार स्कूली बसों और एम्बुलेंस जैसे आवश्यक वाहनों का आवागमन भी प्रभावित हो रहा है। पानी से भरे गड्ढों की वास्तविक गहराई का अंदाजा नहीं लग पाने के कारण दुर्घटना की आशंका और बढ़ गई है।
करोड़ों का कारोबार करने वाले सीमेंट संयंत्रों की राह बदहाल
रिसदा बाईपास की बदहाली का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू क्षेत्र में संचालित लगभग आधा दर्जन सीमेंट संयंत्रों से जुड़ा है। इस मार्ग से सीमेंट उद्योगों से संबंधित भारी वाहनों की नियमित आवाजाही होती है। आरोप है कि क्षमता से अधिक भार लेकर चलने वाले वाहनों के कारण सड़क तेजी से क्षतिग्रस्त हो रही है।
विडंबना यह है कि जिन उद्योगों के व्यावसायिक परिवहन के लिए यह मार्ग महत्वपूर्ण है, उन्हीं उद्योगों के अधिकारियों और वरिष्ठ प्रतिनिधियों का भी इसी सड़क से आना-जाना होता है। ऐसे में सवाल उठता है कि सड़क की बदहाली दूर करने के लिए उद्योग प्रबंधन ने प्रशासन के साथ मिलकर अब तक क्या ठोस पहल की है?
उद्योगों की सामाजिक जिम्मेदारी केवल प्रचार, औपचारिक कार्यक्रमों और चुनिंदा गतिविधियों तक सीमित नहीं होनी चाहिए। स्थानीय जनता की सुरक्षा और बुनियादी सुविधाओं के लिए भी सहयोग की अपेक्षा स्वाभाविक है। हालांकि सड़क निर्माण एवं रखरखाव का प्राथमिक दायित्व संबंधित शासकीय एजेंसी का है, लेकिन भारी औद्योगिक परिवहन से जुड़े मार्ग की बदहाली पर उद्योगों की भूमिका की भी समीक्षा होनी चाहिए।
मंत्री टंकराम वर्मा के गृहग्राम जाने वाला मार्ग भी बदहाल, फिर आम जनता किससे लगाए उम्मीद?
रिसदा बाईपास की बदहाली इसलिए भी चर्चा का विषय है क्योंकि इसी मार्ग से प्रदेश के राजस्व मंत्री एवं क्षेत्रीय विधायक टंकराम वर्मा के गृहग्राम की ओर आवागमन होता है।
ऐसे में स्थानीय जनता का सवाल है कि जब क्षेत्र के प्रभावशाली जनप्रतिनिधियों से जुड़े मार्ग की स्थिति इतनी खराब है, तो दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों की सड़कों की हालत का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है।
क्षेत्रीय विधायक और मंत्री होने के नाते टंकराम वर्मा से जनता की अपेक्षाएं स्वाभाविक रूप से अधिक हैं। अब आवश्यकता इस बात की है कि सड़क की बदहाली पर संबंधित विभागों से जवाबदेही तय कराई जाए और स्थायी निर्माण अथवा गुणवत्तापूर्ण मरम्मत की समयबद्ध कार्ययोजना सामने आए।
मंच पर छत्तीसगढ़ महतारी का गौरवगान, सड़क पर बदहाली की तस्वीर—क्या यही 26 वर्षों के विकास का पैमाना?
छत्तीसगढ़ राज्य के गठन को 26 वर्ष पूरे होने जा रहे हैं। इन वर्षों में प्रदेश ने अनेक क्षेत्रों में प्रगति की है, लेकिन रिसदा बाईपास जैसी सड़कों की स्थिति यह याद दिलाती है कि विकास की यात्रा अभी अधूरी है। राज्योत्सव केवल बीते वर्षों की उपलब्धियां गिनाने का अवसर नहीं, बल्कि उन कमियों पर आत्ममंथन करने का भी अवसर होना चाहिए, जिनका सामना जनता आज भी कर रही है।
राज्य की स्थापना का उद्देश्य केवल नए प्रशासनिक ढांचे, भव्य सरकारी आयोजनों और उत्सवों का विस्तार नहीं था, बल्कि आम नागरिक के जीवन में वास्तविक बदलाव लाना भी था। अच्छी सड़क, स्वच्छ पेयजल, बेहतर स्वास्थ्य सुविधा, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और सुरक्षित आवागमन कोई विलासिता नहीं, बल्कि जनता की बुनियादी जरूरतें हैं।
बलौदाबाजार का रिसदा बाईपास इसी वास्तविकता को सामने ला रहा है। उत्सव के मंच पर विकास की कितनी भी आकर्षक तस्वीर प्रस्तुत कर दी जाए, सड़क पर मौजूद गड्ढे उस तस्वीर से मेल नहीं खाते।
यहां लेख राज्योत्सव के विरोध का नहीं, बल्कि विकास की प्राथमिकताओं का है। जनता के लिए सबसे बड़ा राज्योत्सव वह दिन होगा, जब उसे गड्ढों से मुक्त सड़क मिलेगी, स्कूली बच्चे सुरक्षित सफर करेंगे और मरीजों को अस्पताल पहुंचाने वाली एम्बुलेंस को कीचड़ में फंसने का डर नहीं रहेगा।
जलपरा का वायरल वीडियो, हंसी के पीछे छिपा है जनता का आक्रोश
रिसदा बाईपास के गड्ढे में नहाते युवक का वीडियो देखने में भले हास्य और व्यंग्य से भरा दिखाई देता हो, लेकिन इसके पीछे गंभीर जनसमस्या छिपी है। यह उस स्थिति का प्रतीक है, जब बार-बार सामने आने वाली समस्याओं के बीच नागरिकों को प्रशासन का ध्यान आकर्षित करने के लिए असामान्य तरीके अपनाने पड़ते हैं।
सोशल मीडिया पर जलपरा की चर्चा भले मनोरंजन का विषय बन गई हो, लेकिन जिला प्रशासन के लिए यह आत्ममंथन का अवसर होना चाहिए। जिस सड़क के गड्ढों में लोग नहाकर वीडियो बना रहे हों, उस सड़क की दुर्दशा को केवल सोशल मीडिया की चर्चा समझकर नजरअंदाज करना प्रशासनिक संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े करेगा।
अब देखना यह होगा कि राज्योत्सव की तैयारियों में जुटा जिला प्रशासन रिसदा बाईपास की समस्या पर कितनी गंभीरता दिखाता है। क्या संबंधित विभाग सड़क की स्थायी मरम्मत की समयसीमा घोषित करेगा? क्या भारी वाहनों की ओवरलोडिंग की जांच होगी? क्या सीमेंट संयंत्रों के साथ सड़क सुधार को लेकर कोई ठोस पहल होगी? या फिर राज्योत्सव के भव्य आयोजन के बाद भी रिसदा बाईपास के गड्ढे यूं ही जनता की परेशानी और सोशल मीडिया के व्यंग्य का विषय बने रहेंगे?
फिलहाल रिसदा बाईपास का जलपरा एक तीखा सवाल छोड़ गया है- साहब, राज्योत्सव के लिए मंच तो सज रहा है, लेकिन जिस सड़क से जनता गुजरती है, उसका विकास कब होगा? क्योंकि विकास का असली उत्सव मंच की रोशनी में नहीं, जनता की सुरक्षित राहों पर दिखाई देता है।