सिलतरा में मजदूरों का विस्फोट गोदावरी प्लांट गेट पर उग्र प्रदर्शन, दबाव में झुका प्रबंधन
धरसींवा (रायपुर)।
राजधानी रायपुर के औद्योगिक क्षेत्र सिलतरा में शनिवार को श्रमिकों का आक्रोश खुलकर सामने आया। गोदावरी इस्पात पावर लिमिटेड के मुख्य द्वार पर सैकड़ों मजदूर एकजुट हुए और प्रबंधन के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। सुबह से शुरू हुआ यह विरोध कुछ ही घंटों में उग्र जन-आंदोलन में बदल गया। नारेबाजी, आक्रोश और अपनी मांगों को लेकर अडिग रुख ने पूरे औद्योगिक क्षेत्र में तनाव का माहौल बना दिया।
मजदूरों का आरोप है कि उनसे लगातार 12-12 घंटे काम लिया जा रहा है, जबकि उन्हें न्यूनतम मजदूरी भी पूरी नहीं मिलती। तपती भट्टियों और खतरनाक हालात में काम करने के बावजूद सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं। ठेका प्रथा में फंसे इन श्रमिकों ने कहा कि वर्षों से काम करने के बावजूद उन्हें स्थायी नहीं किया गया, जिससे उनका भविष्य असुरक्षित बना हुआ है।
आंदोलन को उस समय निर्णायक बल मिला जब आसपास की ग्राम पंचायतों के सरपंच और स्थानीय जनप्रतिनिधि भी मजदूरों के समर्थन में धरने पर बैठ गए। इसके बाद यह संघर्ष केवल मजदूरी का मुद्दा नहीं रहा, बल्कि स्थानीय हक और सम्मान की लड़ाई बन गया। जनप्रतिनिधियों ने प्रबंधन पर स्थानीय युवाओं की उपेक्षा और रोजगार में पारदर्शिता की कमी का आरोप लगाते हुए कड़ा रुख अपनाया।
दोपहर के समय स्थिति और तनावपूर्ण हो गई, जब प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने पहुंची पुलिस और मजदूरों के बीच तीखी नोकझोंक हुई। हालांकि प्रशासन ने संयम बरतते हुए हालात को संभाला और किसी बड़े टकराव को टाल दिया। मजदूर अपनी मांगों को लेकर डटे रहे और पीछे हटने को तैयार नहीं थे।
आखिरकार प्रशासन के हस्तक्षेप से प्रबंधन और आंदोलनकारियों के बीच वार्ता का रास्ता खुला। लंबी बातचीत के बाद कई महत्वपूर्ण मांगों पर सहमति बनी। इसके तहत 10 वर्षों से कार्यरत सप्लाई वर्करों के नियमितीकरण पर विचार, 8 घंटे की शिफ्ट लागू करने, 20 हजार रुपये दिवाली बोनस देने और दुर्घटना की स्थिति में 50 लाख रुपये मुआवजा देने जैसे मुद्दों पर सहमति बनी। इसके बाद मजदूरों ने हड़ताल समाप्त कर दी और क्षेत्र में स्थिति सामान्य हो गई।
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मजदूरों ने अपनी मांगों में 8 घंटे की शिफ्ट का सख्ती से पालन, पिछले 10 वर्षों से कार्यरत श्रमिकों के नियमितीकरण, न्यूनतम वेतन का पूर्ण भुगतान, 20 हजार रुपये दिवाली बोनस, दुर्घटना की स्थिति में 50 लाख रुपये मुआवजा और कार्यस्थल पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम जैसी प्रमुख बातें शामिल कीं। इन मांगों को लेकर ही श्रमिक लंबे समय से संघर्षरत थे, जो शनिवार को बड़े आंदोलन के रूप में सामने आया।
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दिनभर घटनाक्रम तेजी से बदला
सुबह मजदूरों ने फैक्ट्री गेट पर एकत्र होकर नारेबाजी शुरू की। दोपहर तक जनप्रतिनिधियों के समर्थन से आंदोलन उग्र हो गया। इसी दौरान पुलिस और मजदूरों के बीच नोकझोंक भी हुई। बाद में प्रशासन ने हस्तक्षेप कर दोनों पक्षों के बीच वार्ता कराई, जिसके बाद शाम तक सहमति बन गई और हड़ताल समाप्त कर दी गई।
वर्जन तहसीलदार
तहसीलदार बाबूलाल कुर्रे ने बताया कि मजदूरों की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए प्रबंधन के साथ विस्तृत चर्चा की गई। प्रशासन की प्राथमिकता क्षेत्र में शांति बनाए रखने के साथ-साथ श्रमिकों को उनका वाजिब अधिकार दिलाना है। दोनों पक्षों के बीच सहमति बनने के बाद स्थिति अब पूरी तरह नियंत्रण में है और हड़ताल समाप्त कर दी गई है।