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???????? मछुआरा प्रकोष्ठ के जिला संयोजक श्री नवीन धीवर जी की “हर घर तिरंगा” अभियान में शानदार पहल ???????? हर घर तिरंगा, हर दिल में देशभक्ति!
ज़िला जांजगीर चांपा नवागढ़
अवरीद मछुआरा प्रकोष्ठ के जिला संयोजक श्री नवीन धीवर जी द्वारा “हर घर तिरंगा” यात्रा के दौरान घर-घर पहुंचकर तिरंगे का वितरण किया जा रहा है। चेहरे पर खुशी, दिल में देशभक्ति का जज्बा और हाथों में तिरंगा लेकर वे लोगों को राष्ट्रप्रेम के इस अभियान से जुड़ने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।
तिरंगा वितरण के दौरान लोगों में भी उत्साह और देशभक्ति की भावना देखने को मिल रही है। श्री नवीन धीवर जी की यह पहल क्षेत्र में राष्ट्रप्रेम की भावना को और मजबूत करने का संदेश दे रही है।
???????? तिरंगा हर घर में लहराए, देशभक्ति हर दिल में समाए।
???????? जय हिंद! जय भारत! ????????
मानवाधिकार एवं सामाजिक सेवा के क्षेत्र में प्रद्युम्न शुक्ल का विशेष सम्मान
कांकेर, 15 अगस्त 2026
स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर राष्ट्रीय मानवाधिकार एवं अपराध नियंत्रण ब्यूरो (NHRCCB) टीम छत्तीसगढ़ की कांकेर जिला इकाई के जिला अध्यक्ष प्रद्युम्न शुक्ल को मानवाधिकार एवं सामाजिक सेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान तथा क्षेत्र में सामाजिक एवं शैक्षणिक गतिविधियों को निरंतर सहयोग प्रदान करने के लिए विशेष सम्मान से सम्मानित किया गया।
15 अगस्त 2026 के गरिमामय कार्यक्रम के दौरान प्रद्युम्न शुक्ल को यह सम्मान अंतागढ़ विधानसभा क्षेत्र के विधायक माननीय विक्रम उसेंडी, पखांजूर नगर पंचायत अध्यक्ष श्री नारायण चंद्र साहा, नगर पंचायत उपाध्यक्ष श्री शंकर सरकार, अनुविभागीय अधिकारी श्री मनीष देव साहू, तहसीलदार श्री केतन बोयर एवं एसडीओपी श्री कुलदीप जी सहित उपस्थित गणमान्य अतिथियों द्वारा प्रदान किया गया।
मानवाधिकार एवं सामाजिक सेवा के लिए सम्मान
प्रद्युम्न शुक्ल लंबे समय से राष्ट्रीय मानवाधिकार एवं अपराध नियंत्रण ब्यूरो व सामाजिक जागरूकता एवं जनहित से जुड़े कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं। *NHRCCB के माध्यम से क्षेत्र में लोगों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने, सामाजिक सरोकारों से जुड़े विषयों पर जनजागरूकता बढ़ाने तथा जरूरतमंद लोगों की समस्याओं को उचित मंच तक पहुंचाने के प्रयासों को देखते हुए उन्हें सम्मानित किया गया।
उनकी सक्रियता केवल संगठनात्मक गतिविधियों तक सीमित नहीं है, बल्कि शिक्षा, संस्कृति, सामाजिक जागरूकता एवं युवाओं की प्रतिभा को प्रोत्साहित करने के क्षेत्र में भी निरंतर दिखाई देती है।
स्वतंत्रता दिवस आयोजन में निरंतर सहयोग
प्रद्युम्न शुक्ल की एक महत्वपूर्ण भूमिका प्रत्येक वर्ष 15 अगस्त के स्वतंत्रता दिवस समारोह के मैदानी आयोजन में भी रही है। वे विद्यार्थियों को संगीत शिक्षा प्रदान करने, ब्रास बैंड ट्रेनर के रूप में प्रशिक्षण देने तथा स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर मंच एवं कार्यक्रम की व्यवस्थाओं में सहयोग करते रहे हैं।
विद्यालय एवं स्थानीय स्तर पर आयोजित स्वतंत्रता दिवस समारोह को व्यवस्थित, अनुशासित एवं आकर्षक बनाने में उनके तकनीकी एवं रचनात्मक सहयोग की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। विद्यार्थियों को देशभक्ति गीत, वादन एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के लिए तैयार करने से लेकर ब्रास बैंड की प्रस्तुति तथा मंचीय व्यवस्थाओं में सहयोग देने तक वे सक्रिय रूप से योगदान देते हैं।
संगीत और सामाजिक सेवा का अनूठा संगम
प्रद्युम्न शुक्ल सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यों के साथ-साथ संगीत निर्देशक, गायक, गीतकार एवं कंपोजर के रूप में भी सक्रिय हैं। संगीत के माध्यम से विद्यार्थियों और युवाओं को अपनी प्रतिभा विकसित करने का अवसर देना उनके कार्यों का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
स्वतंत्रता दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्वों पर विद्यार्थियों की देशभक्ति एवं सांस्कृतिक प्रतिभा को मंच प्रदान करने में उनका योगदान विशेष रूप से उल्लेखनीय माना गया है। यही कारण है कि इस वर्ष उन्हें मानवाधिकार एवं सामाजिक कार्यों के साथ-साथ मैदानी स्तर पर स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रमों के बेहतर आयोजन और निरंतर सहयोग के लिए विशेष सम्मान प्रदान किया गया।
सम्मान से बढ़ा उत्साह
सम्मान प्राप्त करने के बाद प्रद्युम्न शुक्ल ने उपस्थित जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों एवं आयोजकों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह सम्मान उनके लिए व्यक्तिगत उपलब्धि से अधिक समाजसेवा, मानवाधिकार जागरूकता, शिक्षा एवं विद्यार्थियों के हित में निरंतर कार्य करने की प्रेरणा है।
उन्होंने कहा कि आने वाले समय में भी मानवाधिकार संरक्षण, सामाजिक जागरूकता, विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास, संगीत शिक्षा तथा जनहित के कार्यों को पूरी निष्ठा के साथ आगे बढ़ाया जाएगा।
स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर मिला यह सम्मान NHRCCB कांकेर जिला इकाई के सामाजिक एवं मानवाधिकार कार्यों के साथ-साथ शिक्षा, संस्कृति और युवा प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की सराहना के रूप में देखा जा रहा है।
NHRCCB कांकेर जिला अध्यक्ष प्रद्युम्न शुक्ल ने वृद्ध, बीमार एवं लाचार महिला की मदद के लिए बढ़ाया हाथ
ब्यूरो चीफ कांकेर, बिहान छत्तीसगढ़
वृद्ध महिला को साथ लेकर विधायक विक्रम उसेंडी से कराई मुलाकात, तत्काल फल व दवाई के लिए ₹1,000 की सहायता और
इलाज का खर्च उठाने की घोषणा
NHRCCB (राष्ट्रीय मानवाधिकार एवं अपराध नियंत्रण ब्यूरो) कांकेर जिला अध्यक्ष प्रद्युम्न शुक्ल ने मानवता और सामाजिक सरोकार की मिसाल पेश करते हुए एक वृद्ध, बीमार एवं आर्थिक रूप से असहाय महिला की मदद के लिए पहल की।
महिला की दयनीय स्थिति की जानकारी मिलने के बाद प्रद्युम्न शुक्ल स्वयं उन्हें अपने साथ लेकर अंतागढ़ विधानसभा क्षेत्र के विधायक माननीय विक्रम उसेंडी से मुलाकात कराने पहुंचे। उन्होंने विधायक के समक्ष वृद्ध महिला की आर्थिक एवं स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को विस्तार से रखते हुए तत्काल आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने तथा उनके इलाज की समुचित व्यवस्था कराने का आग्रह किया।
वृद्ध महिला की स्थिति को गंभीरता से लेते हुए विधायक विक्रम उसेंडी ने तत्काल मानवीय संवेदना का परिचय देते हुए ₹1,000 की आर्थिक सहायता प्रदान की। यह सहायता महिला की आवश्यक जरूरतों एवं फल-फूल आदि के लिए की गई। साथ ही विधायक ने वृद्ध महिला की बीमारी को देखते हुए उनके इलाज का पूरा खर्च उठाने की घोषणा भी की।
इस दौरान नगर पंचायत अध्यक्ष श्री नारायण साहा, नगर पंचायत उपाध्यक्ष श्री शंकर सरकार, एसडीएम, पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष श्रीमती मोनिका साहा सहित अन्य अधिकारी एवं सहयोगी उपस्थित रहे। सभी ने वृद्ध महिला की स्थिति को गंभीरता से लेते हुए उनके प्रति संवेदना व्यक्त की तथा आवश्यक सहयोग का भरोसा दिलाया।
NHRCCB जिला अध्यक्ष प्रद्युम्न शुक्ल ने कहा कि समाज में कई ऐसे बुजुर्ग, बीमार और जरूरतमंद लोग हैं, जो आर्थिक अभाव के कारण इलाज एवं दैनिक जरूरतों के लिए संघर्ष करते हैं। ऐसे लोगों की सहायता करना केवल सामाजिक जिम्मेदारी ही नहीं, बल्कि मानवता का कर्तव्य भी है।
उन्होंने कहा कि मानवाधिकारों की रक्षा केवल जागरूकता कार्यक्रमों तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि जरूरतमंद व्यक्ति को उसके कठिन समय में सहयोग और सम्मान दिलाना भी मानवाधिकार संरक्षण का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
विधायक विक्रम उसेंडी द्वारा तत्काल आर्थिक सहायता देने तथा वृद्ध महिला के इलाज का खर्च उठाने की घोषणा के बाद महिला को काफी राहत मिली। इस मानवीय पहल के लिए प्रद्युम्न शुक्ल ने विधायक सहित नगर पंचायत एवं प्रशासनिक अधिकारियों का आभार व्यक्त किया।
NHRCCB कांकेर जिला इकाई की ओर से कहा गया कि भविष्य में भी जरूरतमंद, असहाय एवं पीड़ित लोगों की समस्याओं को सामने लाकर उनके समाधान के लिए जनप्रतिनिधियों एवं प्रशासन के सहयोग से प्रयास जारी रहेंगे।
यह पहल क्षेत्र में मानवता, जनसेवा और सामाजिक जिम्मेदारी का सकारात्मक उदाहरण बनकर सामने आई है।
नक्सलियों के खिलाफ अदम्य साहस को सलाम, 29 नक्सलियों के सफाए वाले ऑपरेशन के नायक रामचंद्र साहू को राष्ट्रपति वीरता पुरस्कार
प्रद्युम्न शुक्ल, ब्यूरो चीफ कांकेर बिहान छत्तीस
गढ़कांकेर/बांदे।
नक्सल प्रभावित कांकेर जिले में नक्सल उन्मूलन अभियान के दौरान पुलिस जवानों और अधिकारियों ने जिस अदम्य साहस और कर्तव्यनिष्ठा का परिचय दिया, वह पूरे क्षेत्र के लिए गौरव का विषय है। इसी साहसिक अभियान से जुड़े बांदे थाना प्रभारी रामचंद्र साहू को राष्ट्रपति वीरता पुरस्कार दिए जाने की खबर से पुलिस विभाग और क्षेत्र में खुशी का माहौल है।
नक्सल विरोधी अभियान के दौरान सुरक्षा बलों ने बेहद चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में जंगलों और दुर्गम इलाकों में अभियान चलाया। अभियान के दौरान सुरक्षा बलों और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ हुई, जिसमें बड़ी संख्या में नक्सलियों के मारे जाने की जानकारी सामने आई। इसी कार्रवाई में 29 नक्सलियों के सफाए को सुरक्षा बलों की बड़ी सफलता के रूप में देखा गया।
इस पूरे ऑपरेशन में पुलिस अधिकारियों और जवानों ने असाधारण साहस, सूझबूझ और रणनीतिक क्षमता का परिचय दिया। बांदे थाना प्रभारी रामचंद्र साहू की भूमिका को भी इस अभियान की सफलता में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कठिन परिस्थितियों में जवानों का नेतृत्व करते हुए उन्होंने जिस साहस और कर्तव्यपरायणता का परिचय दिया, वह पुलिस सेवा के लिए प्रेरणादायी है।
नक्सल मोर्चे पर साहस की मिसाल
बस्तर संभाग में नक्सलवाद के खिलाफ चल रहे अभियानों में पुलिस और सुरक्षा बलों के सामने सबसे बड़ी चुनौती दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियां और नक्सलियों की गतिविधियां हैं। इसके बावजूद जवान लगातार अपनी जान जोखिम में डालकर क्षेत्र में शांति और सुरक्षा कायम करने के लिए अभियान चला रहे हैं।
ऐसे में वीरता पुरस्कार केवल एक अधिकारी का सम्मान नहीं, बल्कि उन सभी पुलिस जवानों और सुरक्षा कर्मियों के साहस को सम्मान देने का प्रतीक है, जो नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में दिन-रात अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं।
पुलिस विभाग और क्षेत्रवासियों में खुशी
रामचंद्र साहू को राष्ट्रपति वीरता पुरस्कार मिलने की खबर के बाद पुलिस विभाग के साथ-साथ क्षेत्रवासियों में भी उत्साह का माहौल है। लोगों ने इसे कांकेर जिले और बांदे क्षेत्र के लिए गौरव का क्षण बताया है।
नक्सल उन्मूलन अभियान में अपनी जिम्मेदारी को पूरी निष्ठा और साहस के साथ निभाने वाले पुलिस अधिकारियों एवं जवानों के सम्मान से सुरक्षा बलों का मनोबल और मजबूत होगा। क्षेत्रवासियों ने रामचंद्र साहू को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है।
नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई में साहस, कर्तव्य और समर्पण की यह मिसाल निश्चित रूप से युवा पुलिसकर्मियों के लिए प्रेरणा बनेगी।
स्वतंत्रता दिवस पर मेधावी विद्यार्थियों का सम्मान, युवा संगठन सेवा समिति ने बढ़ाया हौसला
कोसीर
15 अगस्त स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर युवा संगठन सेवा समिति, ग्राम पाट द्वारा 5वीं, 8वीं, 10वीं एवं 12वीं कक्षा में उत्तीर्ण मेधावी विद्यार्थियों के सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। ग्राम स्तर पर प्रथम एवं द्वितीय स्थान प्राप्त विद्यार्थियों को नगद पुरस्कार, मेडल एवं पेन देकर सम्मानित किया गया। वहीं तृतीय स्थान सहित सभी उत्तीर्ण विद्यार्थियों को मेडल एवं पेन प्रदान कर प्रोत्साहित किया गया, कार्यक्रम में उपस्थित सरपंच, उपसरपंच, पंचगण, सचिव, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, शिक्षक एवं वरिष्ठ नागरिकों का भी श्रीफल एवं मेडल पहना कर स्वागत - सम्मान किया गया,
क्या कहते है विद्यालय के शिक्षक व उपस्थित मंच
समिति के पहल की सराहना करते हुए कहा कि हमारे गाँव के विद्यालय में इस तरह का आयोजन पहली बार हुआ है निश्चित ही इस तरह के आयोजन के लिए युवाओं को आगे आना चाहिए गांव में इस तरह का आयोजन पहली बार हुआ है, और हम युवाओं को मंच युवाओं के इस तरह के आयोजन का हर संभव सहयोग प्रदान करेंगे!
क्या कहते है समिति के सदस्यों
ग्रामीण क्षेत्रों में प्रतिभाओं की कमी नहीं है, जरूरत उन्हें सही दिशा और प्रोत्साहन देने की है, समिति का गठन गांव के विकास के उद्देश्य से युवाओं द्वारा किया गया है, जो शिक्षा, स्वच्छता, पानी एवं अन्य सामाजिक कार्यों में सक्रिय रूप से योगदान देगी। कार्यक्रम में विद्यार्थियों, अभिभावकों एवं ग्रामीणों में उत्साह का माहौल रहा!!
गड्ढों में डूबा गाताडीह–सरायपाली मार्ग, हर सफर पर हादसे का डर बरसात से सड़क की बदहाली और बढ़ी, जान जोखिम में डालकर आवागमन करते हैं। राहगिर; जल्द मरम्मत की उठी मांग
सारंगढ़-बिलाईगढ़
बिलाईगढ़ विकासखंड के गाताडीह से सरायपाली को जोड़ने वाला मुख्य सड़क मार्ग इन दिनों अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। बारिश के बाद सड़क पर जगह-जगह बड़े-बड़े गड्ढे बन गए हैं, जिनमें पानी भर जाने से राहगीरों और वाहन चालकों के लिए सफर जोखिम भरा हो गया है।
यह मार्ग आसपास के कई गांवों के लोगों के लिए प्रमुख आवागमन का साधन है। प्रतिदिन किसान, छात्र-छात्राएं, नौकरीपेशा लोग और छोटे-बड़े वाहन इसी सड़क से गुजरते हैं। लेकिन जर्जर सड़क के कारण दोपहिया वाहन चालकों को सबसे अधिक परेशानी उठानी पड़ रही है। कई बार वाहन गड्ढों में फंस जाते हैं और दुर्घटना की आशंका बनी रहती है।
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि बरसात शुरू होते ही सड़क की हालत और खराब हो गई है। कई बार शिकायत के बावजूद अब तक मरम्मत का कार्य शुरू नहीं किया गया है। लोगों ने संबंधित विभाग और प्रशासन से तत्काल सड़क की मरम्मत कराने की मांग की है, ताकि आम नागरिकों को सुरक्षित और सुगम आवागमन की सुविधा मिल सके।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते इस मार्ग की मरम्मत नहीं कराई गई, तो बरसात के दिनों में कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।
नक्सलियों के 'ब्लैक फॉरेस्ट' कर्रेगुट्टा पर लहराया तिरंगा:
जगदलपुर
यह वही कर्रेगुट्टा है, जहां कभी 3 राज्यों की सीमा से लगे घने जंगलों के बीच नक्सलियों की सरकार चलती थी। पहाड़ी की ढलानों पर उनके ठिकाने थे, हथियार बनाने की फैक्ट्री थी और गुफाओं में हथियार, IED छिपाकर रखे जाते थे।
इन्हीं जंगलों में बैठकर बस्तर में होने वाली बड़ी वारदातों की रणनीति भी तैयार की जाती थी। झीरम हमला और MLA भीमा मंडावी की हत्या का प्लान भी यहीं बना था। एक साल पहले तक इस रास्ते पर कदम रखना तो दूर, यहां पहुंचने की कल्पना करना भी आम लोगों के लिए मुश्किल था, लेकिन अब यह पहाड़ी नक्सलियों के साए से पूरी तरह मुक्त हो चुकी है।
ताड़पाला से ऊपर कर्रेगुट्टा हिल्स पर करीब 7.2 किलोमीटर तक सड़क का निर्माण चल रहा है और अब पहाड़ी पर तिरंगा भी लहरा रहा है। तिरंगा यात्रा के अंतिम दिन जब सरकार यहां पहुंची, तो यह सिर्फ तिरंगा फहराने का कार्यक्रम नहीं था, बल्कि उस इलाके में राज्य की वापसी का ऐलान था, जिसे कभी नक्सलियों का सबसे सुरक्षित ठिकाना माना जाता था।
कर्रेगुट्टा की पहाड़ी के नीचे छत्तीसगढ़ की तरफ ताड़पाला गांव है। यह इलाका छत्तीसगढ़ की सीमा का अंतिम छोर है। यहीं से सुरक्षाबलों ने पहाड़ी की ओर अपनी पकड़ मजबूत करनी शुरू की। सबसे पहले CRPF का कैंप स्थापित किया गया।
इसके बाद फोर्स धीरे-धीरे पहाड़ी की तरफ आगे बढ़ी। नीचे के कैंप से करीब 7 किलोमीटर ऊपर एक और कैंप बनाया गया। इस कैंप के स्थापित होने के बाद पहाड़ी के बड़े हिस्से पर सुरक्षाबलों की मौजूदगी मजबूत हो गई।
आज उसी जगह पर तस्वीर बिल्कुल उलट है। जहां कभी नक्सली बैठकर लोकतंत्र के खिलाफ रणनीति तैयार करते थे, वहां अब जवान बैठते हैं। जिस जगह से नक्सली संगठन की गतिविधियों के लिए प्लानिंग होती थी, वहां अब सुरक्षा बलों की मजबूती है।
कभी जिस जंगल से नक्सलियों का फरमान चलता था, वहां अब सरकार पहुंच चुकी है। यह बदलाव सिर्फ एक कैंप बनने तक सीमित नहीं है, बल्कि उस पूरे इलाके में राज्य की वापसी का संकेत है।
3 जिले और करीब 600 किमी की तिरंगा यात्रा के अंतिम दिन डिप्टी CM विजय शर्मा और वन मंत्री केदार कश्यप भी इस इलाके में पहुंचे। वे बाइक से पहाड़ी के ऊपर तक गए। यहां तिरंगा फहराया।
जवानों के साथ मिलकर राष्ट्रगान और देशभक्ति के नारों के बीच इस इलाके में स्वतंत्रता दिवस का जश्न मनाया गया। जिस पहाड़ी पर कभी नक्सलियों का लाल झंडा और उनका कब्जा माना जाता था, वहां अब तिरंगा सबसे ऊंचाई पर दिखाई दे रहा है
सारंगढ़ में हर्षोल्लास से मनाया गया स्वतंत्रता दिवस, सांसद राधेश्याम राठिया ने किया ध्वजारोहण..
सारंगढ़-बिलाईगढ़//
देश का 80वां स्वतंत्रता दिवस जिला मुख्यालय सारंगढ़ में हर्ष और उत्साह के साथ मनाया गया। जिला स्तरीय स्वतंत्रता दिवस समारोह का आयोजन खेलभांठा मैदान, सारंगढ़ में किया गया। समारोह में बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, अधिकारी, कर्मचारी, विद्यार्थी और नगरवासी शामिल हुए।कार्यक्रम में रायगढ़ लोकसभा सांसद राधेश्याम राठिया मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने ध्वजारोहण कर तिरंगे को सलामी दी। इसके बाद राष्ट्रगान के साथ स्वतंत्रता दिवस समारोह की औपचारिक शुरुआत हुई।
परेड का निरीक्षण और मार्चपास्ट
ध्वजारोहण के बाद मुख्य अतिथि ने परेड का निरीक्षण किया। विभिन्न टुकड़ियों ने अनुशासन और देशभक्ति की भावना के साथ मार्चपास्ट किया। पूरे मैदान में तिरंगे के साथ देशभक्ति का माहौल नजर आया। इसके बाद छत्तीसगढ़ शासन के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के संदेश का वाचन किया गया। समारोह में रंगीन गुब्बारे छोड़े गए और परेड कमांडरों के साथ परिचय एवं छायाचित्र का कार्यक्रम भी हुआ।
शहीद परिवारों का किया गया सम्मान
स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान शहीद परिवारों का सम्मान भी किया गया। इस अवसर पर देश की आजादी और सुरक्षा के लिए अपना योगदान देने वाले वीरों को याद करते हुए उनके परिवारों के प्रति सम्मान व्यक्त किया गया।
सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने बांधा समां
समारोह में स्कूली विद्यार्थियों द्वारा विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए। देशभक्ति गीत, नृत्य और अन्य प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम में मौजूद लोगों का उत्साह बढ़ाया। विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों में देशप्रेम और राष्ट्रीय एकता की झलक देखने को मिली। इसके अलावा विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वालों को प्रशस्ति पत्र और प्रमाण पत्र भी प्रदान किए गए।
सुबह से ही उत्साह में नजर आया शहर
स्वतंत्रता दिवस को लेकर जिला मुख्यालय में सुबह से ही उत्साह का माहौल रहा। खेलभांठा मैदान को आकर्षक ढंग से सजाया गया था। बड़ी संख्या में लोग समारोह देखने पहुंचे। तिरंगे के रंग में सजे मैदान में भारत माता की जय और देशभक्ति के नारों से वातावरण गूंजता रहा। जिला प्रशासन की ओर से आयोजित इस समारोह में स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के बलिदान को याद करते हुए देश की एकता, अखंडता और विकास के लिए मिलकर काम करने का संदेश दिया गया। समारोह का समापन मुख्य अतिथि के प्रस्थान के साथ हुआ।
साल्हेओना में किसानों ने निकाली भव्य तिरंगा ट्रैक्टर रैली, 31 ट्रैक्टरों के साथ गूंजा देशभक्ति का संदेश..
सारंगढ़-बिलाईगढ़//
80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर साल्हेओना क्षेत्र में किसानों ने अनोखे अंदाज में देशभक्ति का परिचय दिया। आंचलिक किसान संघ साल्हेओना के नेतृत्व में साल्हेओना और बरगांव सोसायटी से जुड़े किसानों ने 31 ट्रैक्टरों के साथ भव्य तिरंगा ट्रैक्टर रैली निकाली। ट्रैक्टरों पर तिरंगा लगाकर निकले किसानों ने पूरे क्षेत्र में आजादी और राष्ट्रप्रेम का संदेश दिया।
तिरंगा ट्रैक्टर रैली की शुरुआत साल्हेओना सोसायटी से हुई। इसके बाद रैली धोबनीपाली, बरगांव और मानिकपुर होते हुए राधामाधव मंदिर विश्वासपुर पहुंची। इस दौरान बड़ी संख्या में किसान ट्रैक्टरों के साथ रैली में शामिल हुए। हाथों में तिरंगा और ट्रैक्टरों पर लहराते राष्ट्रीय ध्वज ने पूरे मार्ग को देशभक्ति के रंग में रंग दिया।
किसानों में दिखा खासा उत्साह
स्वतंत्रता दिवस के मौके पर आयोजित इस रैली को लेकर किसानों में खासा उत्साह देखने को मिला। ग्रामीण क्षेत्र में किसानों द्वारा इस तरह की तिरंगा यात्रा निकालना लोगों के लिए भी आकर्षण का केंद्र रहा। जगह-जगह लोगों ने रैली को देखा और किसानों के इस प्रयास की सराहना की। किसानों ने कहा कि तिरंगा देश की एकता, अखंडता और स्वतंत्रता का प्रतीक है। देश की आजादी के लिए बलिदान देने वाले स्वतंत्रता सेनानियों को याद करते हुए किसानों ने राष्ट्र के प्रति अपनी जिम्मेदारी और सम्मान का संदेश दिया।
किसान संगठन के बैनर तले जुटे किसान
आंचलिक किसान संघ साल्हेओना के बैनर तले आयोजित इस कार्यक्रम में साल्हेओना और बरगांव सोसायटी क्षेत्र के किसान बड़ी संख्या में शामिल हुए। किसानों ने एकजुट होकर स्वतंत्रता दिवस मनाया और आपसी एकता का भी संदेश दिया। रैली में युवराज चौधरी, उग्रसेन साहू, अगनू पटेल, भुवन विजय मालाकार, गुलशन, करुणा सागर, सुभाष पटेल, मोहन पटेल, अजय पटेल, रोशन पटेल, रामकुमार पटेल, पदुम, नवसागर, सतपीर पटेल, संदीप पटेल, जगतराम पटेल, रविचंद पटेल, रघुनाथ पटेल, यश पटेल, मदन पटेल, शिव पटेल, संजय पटेल, महेंद्र पटेल, टीकाराम चौधरी, लोचन पटेल, गांधी गौटिया, हितेश मालाकार, अनिल मालाकार सहित बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे। रैली के सफल आयोजन के बाद किसानों में उत्साह देखने को मिला। ट्रैक्टरों पर लहराते तिरंगे के साथ निकली यह यात्रा स्वतंत्रता दिवस पर ग्रामीण अंचल में देशभक्ति और किसान एकता का खास संदेश दे गई।
नदीगांव में मुक्तिधाम निर्माण का हुआ भूमिपूजन, 6.50 लाख रुपये से होगा विकास कार्य..
सारंगढ़-बिलाईगढ़//
सरिया तहसील अंतर्गत ग्राम पंचायत नदीगांव पुरानी बस्ती में मुक्तिधाम निर्माण कार्य का भूमिपूजन कार्यक्रम आयोजित किया गया। गांव में लंबे समय से मुक्तिधाम की आवश्यकता महसूस की जा रही थी। निर्माण कार्य के लिए जी राम जी (VB-G RAM G) योजना के तहत 6.50 लाख रुपये की मंजूरी मिली है।
भूमिपूजन कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में जल संसाधन विभाग के सेवानिवृत्त एसडीओ विमलेश विश्वाल उपस्थित रहे। कार्यक्रम में सरपंच गौरीशंकर विश्वाल, उपसरपंच दृष्टिदेव प्रधान सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण और गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।
गांव में जरूरी सुविधा का होगा विकास
मुक्तिधाम का निर्माण होने से नदीगांव पुरानी बस्ती के ग्रामीणों को अंतिम संस्कार के लिए बेहतर और व्यवस्थित स्थान उपलब्ध होगा। ग्रामीणों ने मुक्तिधाम निर्माण के लिए राशि स्वीकृत होने पर खुशी जताई और पंचायत स्तर पर किए जा रहे प्रयासों की सराहना की।कार्यक्रम के दौरान उपस्थित लोगों ने कहा कि गांव के विकास के लिए सड़क, नाली और अन्य सुविधाओं के साथ मुक्तिधाम जैसी मूलभूत व्यवस्था भी बेहद जरूरी है। निर्माण पूरा होने के बाद ग्रामीणों को इसका सीधा लाभ मिलेगा।
भूमिपूजन कार्यक्रम में शशिभूषण प्रधान, विकास विश्वाल, उसतराम प्रधान, देवानंद प्रधान, विदेशी माझी, फागुलाल माझी, सुनील प्रधान, कैलाशचंद विश्वाल, सच्चिदानंद गुप्ता, बलराम विश्वाल, संपत यादव, रोहित शर्मा, बबलू शर्मा सहित अन्य ग्रामीण उपस्थित रहे। 6.50 लाख रुपये की लागत से बनने वाला यह मुक्तिधाम गांव के लिए एक महत्वपूर्ण विकास कार्य माना जा रहा है। निर्माण कार्य जल्द शुरू होने की उम्मीद है, जिससे ग्रामीणों को लंबे समय से महसूस की जा रही इस सुविधा का लाभ मिल सकेगा।
*चैंबर ऑफ कॉमर्स व राइस मिल एसोसिएशन ने तिरंगा यात्रा में बांटी सामग्री * देशभक्ति के रंग में डूबा सारंगढ़, बच्चों ने दिखाया उत्साह
सारंगढ़
अगस्त क्रांति अंग्रेज भारत छोड़ो आंदोलन की स्मृति में भाजपा द्वारा आयोजित भव्य तिरंगा यात्रा नगर में देशभक्ति के रंग में निकली। यात्रा में प्रभारी मंत्री टंकराम वर्मा, कलेक्टर पद्मिनी भोई साहू, पुलिस अधीक्षक सुनील शर्मा, भाजपा जिला अध्यक्ष ज्योति पटेल, जिपं अध्यक्ष संजय भूषण पांडे सहित भाजपा नेता, कार्यकर्ता और बड़ी संख्या में नगरवासी शामिल हुए।
तिरंगा यात्रा में स्कूलों के बच्चों ने बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया। हाथों में तिरंगा लेकर बच्चों ने देशभक्ति के नारे लगाए और पूरे जोश के साथ रैली में शामिल हुए। उनके उत्साह ने पूरे माहौल को देश भक्तिमय बना दिया । प्रशासनिक व पुलिस अधिकारी ने भी बच्चों का हौसला बढ़ाया।
छग चैंबर ऑफ कॉमर्स जिला इकाई सारंगढ़ एवं राइस मिल एसोसिएशन के बैनर तले यात्रा में शामिल लोगों के लिए विशेष व्यवस्था की गई ।
पदाधिकारियों एवं सदस्यों द्वारा बच्चों को मीठा बिस्कुट, नमकीन, चॉकलेट के साथ पानी वितरित किया गया । चैंबर व राइस मिल सदस्यों का सहयोग सराहनीय रहा। सारंगढ़ 2026
कार्यक्रम में सभी ने एकजुट होकर राष्ट्र भक्ति का संदेश दिया।
दो महीने से वेतन की एक-एक पाई को तरसे सुरक्षा कर्मी! PF के नाम पर कटता रहा पैसा, खाते में नहीं पहुंचा—‘ईगल हंटर’ पर 33 कर्मचारियों का संगीन आरोप
शराब दुकानों की हिफाजत करने वालों के ही घरों में आर्थिक संकट का पहरा! ‘दो सुरक्षाकर्मियों’ के भरोसे सुरक्षा व्यवस्था,
तीसरे की मांग को लेकर कलेक्टर जनदर्शन में पहुंचा 33 कर्मचारियों का दर्द
*सारंगढ़-बिलाईगढ़ :
-*जिन कंधों पर शराब दुकानों की सुरक्षा का भार है, आज उन्हीं कंधों पर दो महीने से वेतन का बोझ लदा हुआ है! जिन हाथों में सुरक्षा की जिम्मेदारी है, उन्हीं हाथों को अपने परिवार का चूल्हा जलाने के लिए वेतन का इंतजार करना पड़ रहा है! मामला निजी सुरक्षा एजेंसी ईगल हंटर प्राइवेट लिमिटेड से जुड़ा है, जहां तैनात सुरक्षा कर्मियों ने जिला प्रशासन के समक्ष शिकायत कर वेतन भुगतान और PF को लेकर गंभीर आरोपों का पिटारा खोल दिया है।
कर्मचारियों की शिकायत अगर सच साबित होती है तो मामला महज वेतन में देरी का नहीं, बल्कि उन मेहनतकश सुरक्षा कर्मियों की आर्थिक सुरक्षा पर ही सवालिया निशान खड़ा करता है, जो दिन-रात अपनी ड्यूटी निभाकर दूसरों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का दावा करते हैं।
दो महीने का वेतन अटका, इंतजार की घड़ी हुई लंबी!:-
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि उन्हें पिछले दो महीनों से वेतन नहीं मिला है। यानी जिस वेतन से उनके घरों की जरूरतें पूरी होनी थीं, वही वेतन अब कागजों और इंतजार के बीच कहीं अटका हुआ दिखाई दे रहा है।
सुरक्षा कर्मियों का कहना है कि वेतन भुगतान में पहले भी देरी होती रही है। ऐसे में सवाल उठता है कि जिस कर्मचारी के घर का बजट महीने की तनख्वाह से चलता है, उसके लिए दो महीने का वेतन कितना बड़ा पहाड़ बन सकता है?
PF की कटौती हुई, लेकिन खाते में रकम पहुंची या नहीं—यही सबसे बड़ा सवाल!:-
शिकायत में सुरक्षा कर्मियों ने आरोप लगाया है कि उनके वेतन से PF की राशि काटी जाती है, लेकिन PF खाते में राशि जमा नहीं की जा रही है।
अगर यह आरोप जांच में सही पाया जाता है तो मामला और गंभीर हो सकता है। क्योंकि कर्मचारी के वेतन से कटने वाली छोटी-सी रकम उसके भविष्य की बड़ी उम्मीद होती है।
वेतन से पैसा कट गया, लेकिन PF खाते में उसका अता-पता नहीं—तो आखिर यह पैसा गया कहां?:-
यही सवाल अब शिकायत के बाद जिला प्रशासन के दरवाजे पर दस्तक दे रहा है।
सुरक्षा की जिम्मेदारी भारी, लेकिन दुकानों पर सिर्फ दो-दो जवान!:-
शिकायत में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी गंभीर आपत्ति दर्ज कराई गई है। कर्मचारियों के अनुसार कई शराब दुकानों में केवल दो सुरक्षा कर्मियों की ड्यूटी लगाई गई है।
कर्मचारियों ने मांग की है कि प्रत्येक दुकान पर तीन सुरक्षा कर्मियों की व्यवस्था की जाए।
यानी एक तरफ सुरक्षा का पहाड़ जितना बड़ा जिम्मा, दूसरी तरफ उसे संभालने के लिए सीमित हाथ! ऐसे में कर्मचारियों ने अतिरिक्त सुरक्षा कर्मी की मांग उठाई है।
33 कर्मचारियों की सामूहिक आवाज—“अब प्रशासन ही सुने हमारी फरियाद”:-
मामले की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि शिकायत के साथ 33 सुरक्षा कर्मियों के नाम और संपर्क विवरण की सूची भी संलग्न की गई है।
यह महज एक कर्मचारी की आवाज नहीं, बल्कि 33 कर्मचारियों की सामूहिक दस्तक के रूप में सामने आई है।
शिकायतकर्ताओं ने जिला प्रशासन से पूरे मामले की जांच कराने, बकाया वेतन दिलाने, PF संबंधी स्थिति स्पष्ट कराने तथा सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की मांग की है।
एजेंसी पर कार्रवाई और जिले से हटाने की मांग :-
शिकायत में सुरक्षा कर्मियों ने मांग की है कि यदि जांच में एजेंसी की लापरवाही या अनियमितता सामने आती है तो नियमानुसार कार्रवाई करते हुए एजेंसी को जिले से हटाने की कार्रवाई की जाए।
अब देखना यह होगा कि शिकायत के बाद प्रशासन की जांच कितनी गहराई तक पहुंचती है और कर्मचारियों के आरोपों की परतें खुलने पर तस्वीर क्या सामने आती है।
सबसे बड़ा सवाल:-
जिस एजेंसी को सुरक्षा कर्मियों की ड्यूटी और उनके भुगतान की जिम्मेदारी दी गई है, क्या वही कर्मचारियों की आर्थिक सुरक्षा भी सुनिश्चित कर रही है?
*दो महीने का वेतन क्यों अटका?
PF की कटौती हुई तो रकम खाते में क्यों नहीं दिख रही?
क्या 33 कर्मचारियों की शिकायत में दम है?
और शराब दुकानों की सुरक्षा के लिए केवल दो कर्मियों की व्यवस्था पर्याप्त है या नहीं?*
इन सवालों का जवाब अब जिला प्रशासन की जांच और संबंधित एजेंसी के स्पष्टीकरण से ही सामने आएगा।
आदेश बेअसर: संलग्नीकरण खत्म करने के निर्देश के बाद भी अधिकारी-कर्मचारी अटैचमेंट में छत्तीसगढ़ शासन के कड़े निर्देशों के बावजूद मूल संस्थाओं में नहीं लौटे कर्मचारी, शिक्षक और अधिकारी
सदाशिव राना ब्यूरो चीफ बीजापुर
छत्तीसगढ़ शासन एवं स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा विभिन्न जिलों में गैर-शैक्षणिक कार्यों, कार्यालयों तथा अन्य स्थानों पर लंबे समय से संलग्न (Attachment) शिक्षकों एवं कर्मचारियों का संलग्नीकरण समाप्त कर उन्हें तत्काल उनकी मूल संस्था में वापस भेजने के स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं। इसके बावजूद कई स्थानों पर कर्मचारी, अधिकारी और शिक्षक अब भी अटैचमेंट में ही अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
शासन के निर्देश के अनुसार गैर-शैक्षणिक कार्यों या कार्यालयों में संलग्न शिक्षकों एवं कर्मचारियों को तत्काल अपने मूल विद्यालय अथवा कार्यालय में लौटकर कार्यभार संभालना है। संलग्नीकरण समाप्त करने के बाद संबंधित अधिकारियों को इसकी अनुपालन रिपोर्ट और प्रमाण-पत्र उच्च अधिकारियों एवं संचालनालय को भेजने के निर्देश भी दिए गए हैं।
आदेश का पालन नहीं तो कार्रवाई की चेतावनी
निर्धारित समय-सीमा में संलग्नीकरण समाप्त नहीं करने अथवा शासन के निर्देशों का पालन नहीं करने वाले संस्था प्रमुखों एवं संबंधित अधिकारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। इसके बावजूद यदि कर्मचारी-अधिकारी अटैचमेंट में जमे हुए हैं तो यह शासन के आदेशों के पालन पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
सवाल यह—किसके संरक्षण में जारी है अटैचमेंट
शासन के स्पष्ट निर्देश के बाद भी यदि कर्मचारी और अधिकारी मूल संस्था में वापस नहीं लौटे हैं, तो सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर उन्हें अटैचमेंट में बनाए रखने का जिम्मेदार कौन है? क्या संबंधित विभागीय अधिकारी शासन के आदेशों की अनदेखी कर रहे हैं?
अब जरूरत है कि शासन के निर्देशों का जमीनी स्तर पर सत्यापन किया जाए और जहां भी आदेश के बावजूद संलग्नीकरण जारी है, वहां जिम्मेदार अधिकारियों एवं संस्था प्रमुखों की जवाबदेही तय कर नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
निगम सामान्य सभा में जमकर हंगामा,विपक्ष ने किया बहिष्कार
सरगुजा
अंबिकापुर नगर निगम की सामान्य सभा में महापौर के वायरल ऑडियो को लेकर जमकर हंगामा हुआ। प्रश्नकाल में जब विपक्ष ने यह मुद्दा उठाया, तो सत्तापक्ष चर्चा के लिए तैयार नहीं हुआ। इसके बाद नेता प्रतिपक्ष ने शहर की समस्याओं को लेकर सत्तापक्ष पर जमकर हमला बोला। हंगामे के बीच सभापति और महापौर उठकर बाहर चले गए।
बाद में ऑडियो विवाद को लेकर फिर से हंगामा हुआ। इसके विरोध में विपक्ष ने सामान्य सभा का बहिष्कार कर दिया।
मंगलवार को नगर निगम की सामान्य सभा के प्रश्नकाल में नेता प्रतिपक्ष शफी अहमद ने महापौर के वायरल ऑडियो का मुद्दा उठाया। जैसे ही उन्होंने इस मामले पर चर्चा का प्रस्ताव रखा, सत्तापक्ष के पार्षदों ने हंगामा शुरू कर दिया।
एमआईसी सदस्य मनीष सिंह ने कहा कि सामान्य सभा में उन्हीं सवालों पर चर्चा होनी चाहिए, जिन्हें पहले से प्रश्न के रूप में लिया गया है।
जब सत्तापक्ष महापौर के ऑडियो विवाद पर चर्चा को तैयार नहीं हुआ तो काफी देर तक दोनों पक्ष में बहस होती रही और प्रश्नकाल नहीं चल सका। कुछ देर के लिए कार्रवाई रोक दी गई। दोबारा सामान्य सभा की कार्रवाई शुरू की गई तो शहर में खराब सड़क, पेयजल और बिजली की समस्या को लेकर नेता प्रतिपक्ष शफी अहमद ने जमकर खरी-खोटी सुनाई।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि शहर की सड़कों के गड्ढों की जानकारी लेने के लिए सभी पार्षदों को बुलाया गया था। पार्षदों से जानकारी लेकर गड्ढों की मरम्मत के लिए 10 लाख रुपए का प्रस्ताव तैयार किया गया और आयुक्त के सामने रखा गया, लेकिन उन्होंने प्रस्ताव वापस कर दिया।
नेता प्रतिपक्ष ने शहर में पेयजल की कम आपूर्ति को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि प्रतिदिन करीब 40 प्रतिशत पेयजल सप्लाई कम हुई, लेकिन लोगों से पैसा पूरा लिया गया। यह सीधे तौर पर लोगों का शोषण है।
जब नेता प्रतिपक्ष ने सत्तापक्ष को खरी-खरी सुनाई तो पहले सभापति, फिर महापौर मंजूषा भगत इसके बाद एमआईसी के सदस्य बाहर चले गए।
बिहान दैनिक न्यूज़ | नवीन महाविद्यालय के नाम नवागढ़ में सरकारी जमीन पर ‘कब्जे का खेल’!
तहसीलदार की रोक के बावजूद छुट्टी के दिनों में निर्माण का आरोप, सरकारी जमीन पर धीरे-धीरे बढ़ता कब्जा—अफसरों की
कार्यशैली पर उठे गंभीर सवाल
ज़िला जांजगीर चांपा नवागढ़
सरकारी जमीन की हिफाजत करने वाला प्रशासन आखिर सरकारी जमीन को बचाने में कितना गंभीर है? नवागढ़ में शासकीय नवीन महाविद्यालय से जुड़ी जमीन को लेकर उठे सवालों ने प्रशासनिक व्यवस्था को कटघरे में खड़ा कर दिया है।
स्थानीय स्तर पर आरोप है कि विद्यालय/शैक्षणिक संस्था के लिए उपलब्ध सरकारी जमीन पर कथित रूप से धीरे-धीरे कब्जे की कोशिश की जा रही है। सबसे चौंकाने वाली बात यह बताई जा रही है कि तहसीलदार द्वारा निर्माण रोकने की बात सामने आने के बाद भी छुट्टी के दिनों में निर्माण कार्य आगे बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।
रोक का आदेश भारी या कब्जे का दबदबा?
अब नवागढ़ की जनता का सवाल बेहद सीधा है—
अगर प्रशासन ने निर्माण रोकने कहा था, तो फिर निर्माण आगे कैसे बढ़ रहा है?
क्या संबंधित अधिकारियों को इसकी जानकारी नहीं?
या फिर जानकारी होने के बावजूद कार्रवाई नहीं हो रही?
अगर मौके पर सरकारी जमीन है तो उसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी आखिर किसकी है?
छुट्टी का दिन बना ‘कब्जे का मौका’?
स्थानीय लोगों के अनुसार कथित निर्माण कार्य को छुट्टी के दिनों में आगे बढ़ाने की कोशिश की जा रही है।
अगर यह सही पाया जाता है तो सवाल और गंभीर हो जाता है कि—
क्या छुट्टी के दिन सरकारी जमीन पर कानून बदल जाता है?
क्या अधिकारियों की निगरानी छुट्टी के दिन बंद हो जाती है?
क्या कार्रवाई के डर के बिना सरकारी जमीन पर निर्माण किया जा सकता है?
ये सवाल अब सिर्फ नवागढ़ के नहीं, बल्कि पूरे प्रशासनिक तंत्र की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा कर रहे हैं।
“आज थोड़ा कब्जा, कल पूरा कब्जा”—क्या प्रशासन इसी इंतजार में है?
सरकारी जमीन पर कथित अतिक्रमण को लेकर सबसे बड़ा खतरा यही होता है कि शुरुआत में छोटे स्तर पर किया गया निर्माण समय के साथ बड़ा रूप ले लेता है।
फिर वही जमीन विवाद, सीमांकन, कब्जा और कानूनी कार्रवाई के लंबे चक्र में फंस जाती है।
इसलिए सवाल यह नहीं कि अभी कितना निर्माण हुआ है—सवाल यह है कि इसे समय रहते रोका क्यों नहीं जा रहा?
बिहान दैनिक न्यूज़ के 7 सीधे सवाल
1. जमीन का वास्तविक मालिकाना हक किसके नाम दर्ज है?
2. क्या संबंधित जमीन शासकीय रिकॉर्ड में दर्ज है?
3. क्या मौके पर सीमांकन कराया गया है?
4. यदि निर्माण अवैध है तो अब तक निर्माण हटाने की कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
5. तहसीलदार के निर्देश के बाद भी निर्माण हुआ तो जिम्मेदार कौन है?
6. छुट्टी के दिनों में निर्माण की शिकायतों पर निगरानी क्यों नहीं?
7. सरकारी जमीन की सुरक्षा के लिए प्रशासन अब कौन-सी ठोस कार्रवाई करेगा?
अब जनता को जवाब चाहिए, सिर्फ आश्वासन नहीं!
नवागढ़ के नागरिकों की मांग है कि प्रशासन पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराए, राजस्व रिकॉर्ड की जांच एवं सीमांकन कराए और यदि कब्जा/निर्माण नियम विरुद्ध पाया जाता है तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई करे।
सरकारी जमीन किसी व्यक्ति की निजी संपत्ति नहीं है। यदि जमीन वास्तव में शासकीय है और उस पर अनधिकृत कब्जे की पुष्टि होती है, तो प्रशासन को बिना किसी दबाव के कार्रवाई करनी चाहिए।
सबसे बड़ा सवाल—
“सरकारी जमीन पर कब्जे का आरोप है, तहसीलदार की रोक की बात है, फिर भी निर्माण कैसे?”
अब देखना होगा कि नवागढ़ प्रशासन इस मामले में कागजों से निकलकर जमीन पर उतरता है या नहीं।
बिहान दैनिक न्यूज़ की नजर रहेगी—
जमीन से लेकर दस्तावेज तक, आदेश से लेकर कार्रवाई तक… इस पूरे मामले की हर कड़ी पर।
जनता की जमीन—जनता का सवाल—जवाब देगा प्रशासन!
ग्राम विकास को लेकर युवा पत्रकार गुलशन लहरे की पहल, 16वें वित्त आयोग की राशि से स्ट्रीट लाइट लगाने की मांग
कोसीर
ग्राम पंचायत कोसीर में मूलभूत सुविधाओं एवं नागरिकों की सुरक्षा को लेकर युवा पत्रकार एवं ग्राम पंचायत के नागरिक गुलशन लहरे ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। उन्होंने ग्राम पंचायत के ग्राम विकास की आगामी कार्ययोजना में 16वें वित्त आयोग की राशि से विभिन्न प्रमुख स्थानों पर स्ट्रीट लाइट एवं प्रकाश व्यवस्था किए जाने की मांग को लेकर ग्राम विकास अधिकारी, सरपंच एवं समस्त पंचगण को ज्ञापन सौंपा है।
गुलशन लहरे ने अपने ज्ञापन में ग्राम पंचायत कोसीर के चार प्रमुख स्थानों पर प्रकाश व्यवस्था को कार्ययोजना में प्राथमिकता से शामिल करने का आग्रह किया है
ज्ञापन में प्रमुख रूप से डॉ. भीमराव अम्बेडकर चौक से बौद्ध विहार तक, डॉ. भीमराव अम्बेडकर चौक से मूंघापारा तक तथा डॉ. भीमराव अम्बेडकर चौक से गौठान तक प्रत्येक विद्युत खंभे में स्ट्रीट लाइट लगाने की मांग की गई है। इसके अलावा बांधा तालाब (बंधवा) के पार गणेश निषाद के घर से सती मंदिर तक आवश्यक प्रकाश व्यवस्था करने का प्रस्ताव रखा गया है।
रात्रिकालीन आवागमन और युवाओं की सुरक्षा पर जोर
गुलशन लहरे ने बताया कि उक्त स्थानों पर पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था नहीं होने के कारण रात के समय ग्रामीणों को आवागमन में परेशानी होती है। स्ट्रीट लाइट लगने से पैदल एवं दोपहिया वाहन से आने-जाने वाले लोगों को सुविधा मिलने के साथ ही रात्रिकालीन सुरक्षा व्यवस्था भी बेहतर होगी। उन्होंने विशेष रूप से ग्राम पंचायत कोसीर के युवाओं का विषय उठाते हुए कहा कि कई युवा पुलिस एवं अन्य शासकीय सेवाओं की शारीरिक परीक्षा की तैयारी के लिए बटाऊपाली रोड पर दौड़ एवं शारीरिक अभ्यास करने जाते हैं। ऐसे में प्रमुख मार्गों पर पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था होने से युवाओं को भी रात्रि के समय आवागमन में सुविधा एवं सुरक्षा मिलेगी।
ग्राम विकास कार्ययोजना में शामिल करने की मांग
गुलशन लहरे ने ग्राम पंचायत से आग्रह किया है कि जनहित से जुड़े इन चारों कार्यों को आगामी ग्राम विकास कार्ययोजना में प्राथमिकता से शामिल किया जाए तथा 16वें वित्त आयोग से प्राप्त/उपलब्ध राशि एवं नियमानुसार अनुमन्य मद से इन कार्यों को कराने के लिए आवश्यक कार्रवाई की जाए।ग्राम विकास से जुड़े इस प्रस्ताव को लेकर अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि ग्राम पंचायत द्वारा इन कार्यों को आगामी कार्ययोजना में किस प्राथमिकता के साथ शामिल किया जाता है।
पक्की सड़क के इंतजार में गांव कोठीखोल, वर्षों से बदहाल रास्ते से जूझ रहे ग्रामीण सड़क नहीं होने से स्वास्थ्य, शिक्षा और राशन तक पहुंच बनी चुनौती; बारिश में बढ़ जाती है ग्रामीणों की परेशानी कोठीखोल
बिलाईगढ़
ग्राम पंचायत किसड़ा के आश्रित ग्राम कोठीखोल में आज भी पक्की सड़क ग्रामीणों के लिए सपना बनी हुई है। वर्षों से सड़क निर्माण की मांग के बावजूद गांव तक पक्की सड़क नहीं पहुंच सकी है। कच्चे और जर्जर रास्ते से आवागमन करना ग्रामीणों की मजबूरी बन गया है।
बारिश के दिनों में रास्ते की हालत और खराब हो जाती है। कीचड़ और गड्ढों के कारण पैदल चलना भी मुश्किल हो जाता है। ऐसे में बीमार व्यक्ति को अस्पताल पहुंचाना हो या जरूरी सामान के लिए बाहर जाना, ग्रामीणों को काफी परेशानी उठानी पड़ती है।
स्वास्थ्य और राशन के लिए दूसरे गांव पर निर्भर
गांव में स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध नहीं होने से ग्रामीणों को इलाज के लिए दूसरे गांवों का रुख करना पड़ता है। राशन लेने के लिए भी दूसरे गांव पर निर्भरता बनी हुई है। खराब सड़क के कारण बुजुर्गों, महिलाओं और जरूरतमंद परिवारों को सबसे ज्यादा दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
बच्चों की पढ़ाई पर भी पड़ रहा असर
गांव में प्राथमिक शिक्षा की सुविधा है, लेकिन आगे की पढ़ाई के लिए बच्चों को दूसरे गांव जाना पड़ता है। खराब सड़क और परिवहन सुविधा के अभाव में बच्चों के आवागमन में परेशानी होती है।
रोजगार के अवसर सीमित, आर्थिक स्थिति में सुधार की रफ्तार धीमी
सरकारी योजनाओं और आवास योजना का लाभ मिलने से कुछ परिवारों की स्थिति में सुधार हुआ है, लेकिन रोजगार के पर्याप्त अवसर नहीं होने से ग्रामीणों की आर्थिक स्थिति में अपेक्षित बदलाव नहीं आ पाया है।
ग्रामीणों की दो टूक—पहले सड़क बनाइए
ग्रामीणों का कहना है कि गांव की कई समस्याओं का समाधान सड़क बनने से आसान हो सकता है। पक्की सड़क बनने से आवागमन के साथ शिक्षा, स्वास्थ्य, राशन और रोजगार जैसी सुविधाओं तक पहुंच भी बेहतर होगी। ग्रामीणों ने संबंधित विभाग से गांव तक जल्द पक्की सड़क निर्माण की मांग की है।