नक्सलियों के 'ब्लैक फॉरेस्ट' कर्रेगुट्टा पर लहराया तिरंगा:
जगदलपुर
यह वही कर्रेगुट्टा है, जहां कभी 3 राज्यों की सीमा से लगे घने जंगलों के बीच नक्सलियों की सरकार चलती थी। पहाड़ी की ढलानों पर उनके ठिकाने थे, हथियार बनाने की फैक्ट्री थी और गुफाओं में हथियार, IED छिपाकर रखे जाते थे।
इन्हीं जंगलों में बैठकर बस्तर में होने वाली बड़ी वारदातों की रणनीति भी तैयार की जाती थी। झीरम हमला और MLA भीमा मंडावी की हत्या का प्लान भी यहीं बना था। एक साल पहले तक इस रास्ते पर कदम रखना तो दूर, यहां पहुंचने की कल्पना करना भी आम लोगों के लिए मुश्किल था, लेकिन अब यह पहाड़ी नक्सलियों के साए से पूरी तरह मुक्त हो चुकी है।
ताड़पाला से ऊपर कर्रेगुट्टा हिल्स पर करीब 7.2 किलोमीटर तक सड़क का निर्माण चल रहा है और अब पहाड़ी पर तिरंगा भी लहरा रहा है। तिरंगा यात्रा के अंतिम दिन जब सरकार यहां पहुंची, तो यह सिर्फ तिरंगा फहराने का कार्यक्रम नहीं था, बल्कि उस इलाके में राज्य की वापसी का ऐलान था, जिसे कभी नक्सलियों का सबसे सुरक्षित ठिकाना माना जाता था।
कर्रेगुट्टा की पहाड़ी के नीचे छत्तीसगढ़ की तरफ ताड़पाला गांव है। यह इलाका छत्तीसगढ़ की सीमा का अंतिम छोर है। यहीं से सुरक्षाबलों ने पहाड़ी की ओर अपनी पकड़ मजबूत करनी शुरू की। सबसे पहले CRPF का कैंप स्थापित किया गया।
इसके बाद फोर्स धीरे-धीरे पहाड़ी की तरफ आगे बढ़ी। नीचे के कैंप से करीब 7 किलोमीटर ऊपर एक और कैंप बनाया गया। इस कैंप के स्थापित होने के बाद पहाड़ी के बड़े हिस्से पर सुरक्षाबलों की मौजूदगी मजबूत हो गई।
आज उसी जगह पर तस्वीर बिल्कुल उलट है। जहां कभी नक्सली बैठकर लोकतंत्र के खिलाफ रणनीति तैयार करते थे, वहां अब जवान बैठते हैं। जिस जगह से नक्सली संगठन की गतिविधियों के लिए प्लानिंग होती थी, वहां अब सुरक्षा बलों की मजबूती है।
कभी जिस जंगल से नक्सलियों का फरमान चलता था, वहां अब सरकार पहुंच चुकी है। यह बदलाव सिर्फ एक कैंप बनने तक सीमित नहीं है, बल्कि उस पूरे इलाके में राज्य की वापसी का संकेत है।
3 जिले और करीब 600 किमी की तिरंगा यात्रा के अंतिम दिन डिप्टी CM विजय शर्मा और वन मंत्री केदार कश्यप भी इस इलाके में पहुंचे। वे बाइक से पहाड़ी के ऊपर तक गए। यहां तिरंगा फहराया।
जवानों के साथ मिलकर राष्ट्रगान और देशभक्ति के नारों के बीच इस इलाके में स्वतंत्रता दिवस का जश्न मनाया गया। जिस पहाड़ी पर कभी नक्सलियों का लाल झंडा और उनका कब्जा माना जाता था, वहां अब तिरंगा सबसे ऊंचाई पर दिखाई दे रहा है