कलेक्टर की सख्त चेतावनी: प्रसव के दौरान एक भी मातृ या शिशु मृत्यु हुई तो होगी जांच, लापरवाही पर होगी सख्त कार्रवाई..
सारंगढ़-बिलाईगढ़//
जिले में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने और मातृ एवं शिशु मृत्यु दर पर रोक लगाने के लिए कलेक्टर पद्मिनी भोई साहू ने स्वास्थ्य विभाग और महिला एवं बाल विकास विभाग की संयुक्त समीक्षा बैठक ली। बैठक में अप्रैल से जुलाई तक संचालित योजनाओं और कार्यक्रमों की ब्लॉकवार समीक्षा की गई। इस दौरान डिप्टी कलेक्टर वर्षा बंसल, ऋचा सिंह, सीएमएचओ, सिविल सर्जन, महिला एवं बाल विकास अधिकारी, परियोजना अधिकारी, डीपीएम सहित दोनों विभागों के अधिकारी और सुपरवाइजर मौजूद रहे।
मातृ और शिशु मृत्यु पर सख्त रुख
बैठक में कलेक्टर ने अधिकारियों से कहा कि जिले में प्रसव के दौरान एक भी मातृ या शिशु मृत्यु नहीं होनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि किसी मामले में मृत्यु होती है तो उसकी जांच की जाएगी और लापरवाही पाए जाने पर संबंधित अधिकारी या कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई होगी। उन्होंने दोनों विभागों को आपसी समन्वय के साथ संवेदनशीलता से काम करने के निर्देश दिए। कलेक्टर ने निर्देश दिए कि हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं और उनके परिजनों को प्रसव के दौरान होने वाली संभावित समस्याओं जैसे अधिक रक्तस्राव, खून की कमी, सामान्य या ऑपरेशन से प्रसव जैसी स्थितियों के बारे में पहले से जानकारी दी जाए। साथ ही प्रसव पीड़ा शुरू होने या गर्भावस्था पूरी होने पर उन्हें समय पर नजदीकी सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया जाए।
कुपोषण और टीबी उन्मूलन पर जोर
बैठक में पोषण पुनर्वास केंद्र की समीक्षा करते हुए कलेक्टर ने स्वास्थ्य और महिला एवं बाल विकास विभाग को कुपोषित बच्चों की पहचान कर उन्हें पोषण पुनर्वास केंद्र भेजने तथा आवश्यक दवा और पौष्टिक आहार उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। टीबी और कुष्ठ रोग की समीक्षा के दौरान उन्होंने अधिकारियों से कहा कि मरीजों को नियमित दवा लेने, मास्क का उपयोग करने और संक्रमण से बचाव के लिए जागरूक किया जाए। उन्होंने बताया कि जिले में 8 बच्चों में कुष्ठ रोग के लक्षण पाए गए हैं और इस बीमारी के लक्षण विकसित होने में 3 से 5 वर्ष तक का समय लग सकता है।
एचपीवी वैक्सीन और योजनाओं की समीक्षा
कलेक्टर ने 15 वर्ष की बालिकाओं और इच्छुक महिलाओं को एचपीवी वैक्सीन लगवाने के लिए जागरूकता बढ़ाने के निर्देश दिए। उन्होंने प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना की समीक्षा करते हुए बताया कि अब तक 1,883 हितग्राहियों को योजना का लाभ मिल चुका है, जबकि 126 आवेदन सत्यापन और स्वीकृति के लिए लंबित हैं। उन्होंने इन प्रकरणों का शीघ्र निराकरण करने के निर्देश दिए।
बैठक के अंत में कलेक्टर ने दोनों विभागों को स्कूलों और बच्चों से संबंधित जानकारी आपस में साझा करने तथा टीबी और कुष्ठ मुक्त जिला बनाने के लिए प्रभावी कार्ययोजना के साथ काम करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सभी योजनाओं का लाभ समय पर पात्र हितग्राहियों तक पहुंचे, यह सुनिश्चित करना अधिकारियों की प्राथमिक जिम्मेदारी है।