जल निकासी के अभाव में बढ़ी परेशानी, ग्रामीणों ने पंचायत व्यवस्था पर उठाए सवाल, मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में भी शिकायत
इमरान खोखर ब्यूरो चीफ मुंगेली
मुंगेली
जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में लगातार हो रही बारिश के बीच जलभराव की समस्या गंभीर होती जा रही है। अधिकांश गांवों की सड़कें और गलियां पानी से लबालब हैं, जिससे ग्रामीणों का जनजीवन प्रभावित हो रहा है। कीचड़ और जलभराव के बीच लोगों को रोजमर्रा के कार्यों के लिए आवाजाही करनी पड़ रही है। हालात ऐसे हैं कि पंचायती राज व्यवस्था के विकास कार्यों पर भी सवाल उठने लगे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि हर चुनाव में सड़क, नाली और जल निकासी जैसी मूलभूत सुविधाओं के बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, लेकिन चुनाव खत्म होते ही ये वादे कागजों तक सीमित रह जाते हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि कई पंचायतों में सीसी रोड, नाली निर्माण और जल निकासी के लिए लाखों रुपये की स्वीकृति मिलने के बावजूद जमीनी स्तर पर हालात नहीं बदले हैं। बारिश के दौरान गांवों में जलभराव आम समस्या बन चुकी है और इसका खामियाजा आम लोगों को भुगतना पड़ रहा है।
इसी तरह की स्थिति जनपद पंचायत मुंगेली के ग्राम नीरजाम में भी देखने को मिल रही है। गांव के निवासी देवराज साहू ने बताया कि लगातार बारिश के कारण गांव की सड़कें और गलियां पूरी तरह पानी में डूबी हुई हैं। कई स्थानों पर जल निकासी की समुचित व्यवस्था नहीं होने से कई दिनों तक पानी जमा रहता है। इससे लोगों का पैदल चलना तक मुश्किल हो गया है। सबसे अधिक परेशानी स्कूली बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को उठानी पड़ रही है। उन्होंने बताया कि इस समस्या की शिकायत मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में भी दर्ज कराई जा चुकी है, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं हो सका है।
ग्रामीणों का कहना है कि लंबे समय तक पानी जमा रहने से मच्छरों का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है। इससे डेंगू, मलेरिया और अन्य मौसमी बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते जल निकासी की समुचित व्यवस्था नहीं की गई तो आने वाले दिनों में स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं और गंभीर रूप ले सकती हैं।
ग्रामीणों ने पंचायत प्रतिनिधियों और संबंधित विभाग के अधिकारियों से गांव में स्थायी जल निकासी व्यवस्था विकसित करने, नालियों की नियमित सफाई कराने तथा क्षतिग्रस्त सड़कों की तत्काल मरम्मत कराने की मांग की है। उनका कहना है कि विकास कार्य केवल सरकारी रिकॉर्ड और कागजों तक सीमित नहीं रहने चाहिए, बल्कि उनका लाभ धरातल पर भी दिखाई देना चाहिए।
अब ग्रामीणों की निगाहें प्रशासन और पंचायत प्रतिनिधियों पर टिकी हैं। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो बारिश के पूरे मौसम में ग्रामीणों को इसी तरह जलभराव, कीचड़ और बीमारियों के खतरे के बीच जीवनयापन करना पड़ेगा।