जिला

सालगिरह पर सेवा का संकल्प : भूतपूर्व सैनिक ने रक्तदान कर पेश की मानवता की मिसाल*

पवनी (सारंगढ़-भिलाईगढ़ जिला) में मानवता, सेवा और संवेदनशीलता का एक ऐसा प्रेरणादायक दृश्य देखने को मिला जिसने हर किसी का दिल छू लिया। भूतपूर्व सैनिक कमल किशोर साहू ने अपने सालगिरह के अवसर को पारंपरिक उत्सव की तरह नहीं बल्कि मानव सेवा के रूप में मनाते हुए रक्तदान कर जरूरतमंद बच्चों की जिंदगी बचाने का संकल्प लिया।

गर्मी के इस मौसम में ब्लड बैंकों में रक्त की भारी कमी देखने को मिल रही है। विशेषकर सिकल सेल और थैलेसीमिया से पीड़ित बच्चों के इलाज के लिए नियमित रूप से रक्त की आवश्यकता होती है। ऐसे समय में कमल किशोर साहू का यह कदम समाज के लिए एक मजबूत संदेश बनकर सामने आया कि “रक्तदान ही जीवनदान है।”

इस विशेष अवसर पर उन्होंने कई जरूरतमंद बच्चों के लिए रक्त उपलब्ध कराने में योगदान दिया। इसमें 12 वर्षीय भुवनेश्वरी के लिए O+ 3 यूनिट रक्त, 3 वर्षीय गरिमा कुमारी के लिए A+ 2 यूनिट रक्त, 1 वर्षीय आकृति यादव के लिए B+ 2 यूनिट रक्त तथा 5 वर्षीय अविनाश के लिए AB+ 2 यूनिट रक्त की व्यवस्था की गई।

यह पूरा रक्तदान कार्य मॉडल ब्लड सेंटर रक्तदान जीवन दान समिति के माध्यम से संपन्न हुआ। इस दौरान उन्होंने न केवल स्वयं रक्तदान किया, बल्कि लोगों को भी प्रेरित किया कि अधिक से अधिक लोग इस महादान में भाग लें, ताकि किसी भी जरूरतमंद को रक्त की कमी के कारण परेशानी न हो।

कमल किशोर साहू ने कहा कि रक्तदान केवल एक सामाजिक कार्य नहीं, बल्कि मानव जीवन बचाने का सबसे बड़ा पुण्य कार्य है। उन्होंने यह भी बताया कि रक्तदान करने से न केवल किसी की जिंदगी बचती है, बल्कि स्वयं दाता को भी मानसिक संतोष, खुशी और आंतरिक शांति का अनुभव होता है।

उनके इस कार्य ने मौके पर मौजूद लोगों को भावुक कर दिया। ग्रामीणों और उपस्थित लोगों ने कहा कि आज के समय में बहुत कम ऐसे लोग देखने को मिलते हैं जो अपने खास दिन को दूसरों की जिंदगी बचाने के लिए समर्पित कर दें। उनके इस कदम ने यह साबित कर दिया कि इंसानियत आज भी जिंदा है और सेवा की भावना अभी भी समाज में मजबूत है।

विशेष बात यह है कि यह पहली बार नहीं है जब इस प्रकार की सेवा देखने को मिली हो, लेकिन जन्मदिन जैसे निजी अवसर पर इस तरह का रक्तदान लोगों के लिए एक प्रेरणा बन गया।

स्थानीय लोगों ने इस पहल की जमकर सराहना करते हुए कहा कि यदि हर व्यक्ति अपने जीवन के खास दिनों को सेवा कार्य में बदले, तो समाज में किसी भी मरीज को रक्त की कमी से जूझना नहीं पड़ेगा।

कार्यक्रम के अंत में “वंदे मातरम्” और “भारतीय सेना जिंदाबाद” के नारों के साथ माहौल पूरी तरह भावुक और प्रेरणादायक बन गया। यह घटना न केवल एक खबर है, बल्कि समाज के लिए एक सीख भी है कि सच्चा उत्सव वही है जिसमें किसी की जिंदगी बचाई जाए।

Leave Your Comment

Click to reload image