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चंद्रखुरी में 51 फीट ऊंची वनवासी श्रीराम प्रतिमा: आस्था के संग पर्यटन को नई ऊंचाई

चंद्रकांत साहू बिहान छत्तीसगढ़ रायपुर। छत्तीसगढ़ की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को सशक्त बनाने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया जा रहा है। रायपुर जिले के चंद्रखुरी में, जिसे माता कौशल्या की जन्मस्थली और भगवान श्रीराम का ननिहाल माना जाता है, 51 फीट ऊंची वनवासी स्वरूप में भगवान श्रीराम की भव्य प्रतिमा स्थापित की जाएगी। यह परियोजना न केवल आस्था का प्रतीक बनेगी, बल्कि प्रदेश के धार्मिक पर्यटन को भी नई गति देगी।

चंद्रखुरी स्थित कौशल्या माता मंदिर पहले से ही श्रद्धालुओं के लिए प्रमुख आकर्षण का केंद्र है। अब यहां स्थापित होने जा रही विशाल वनवासी श्रीराम प्रतिमा इस क्षेत्र को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने की दिशा में अहम साबित होगी। यह प्रतिमा राज्य सरकार की बहुप्रतीक्षित ‘राम वनगमन पर्यटन परिपथ’ योजना को और मजबूती प्रदान करेगी, जिसके तहत भगवान श्रीराम के वनवास काल से जुड़े स्थलों को विकसित किया जा रहा है।

ग्वालियर से तैयार होकर रवाना हुई यह प्रतिमा टिडमिंट पत्थर से निर्मित है। लगभग 70 टन पत्थर के उपयोग से तैयार की गई इस प्रतिमा का कुल वजन करीब 35 टन है। प्रसिद्ध मूर्तिकार दीपक विश्वकर्मा और उनकी 25 सदस्यीय टीम ने सात महीने की कठिन साधना और परिश्रम के बाद इसे आकार दिया है। प्रतिमा में 108 रुद्राक्ष की माला उकेरी गई है, जो इसकी आध्यात्मिक गरिमा और प्रतीकात्मक महत्व को और बढ़ाती है।

तीन हिस्सों में लाई जा रही इस प्रतिमा को चंद्रखुरी में विशेष तकनीकी प्रक्रिया के तहत जोड़कर स्थापित किया जाएगा। वनवासी रूप में श्रीराम की यह प्रतिमा राज्य की उस सांस्कृतिक धरोहर को दर्शाएगी, जो छत्तीसगढ़ को राम के ननिहाल के रूप में विशिष्ट पहचान दिलाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, वनवास काल में श्रीराम का इस क्षेत्र से विशेष संबंध रहा है, जिसे सरकार पर्यटन के मानचित्र पर सशक्त रूप से उभारने का प्रयास कर रही है।

राज्य सरकार द्वारा बीते वर्षों में राम वनगमन पथ के विकास, आधारभूत संरचना के उन्नयन, सड़क और प्रकाश व्यवस्था के विस्तार तथा पर्यटक सुविधाओं के निर्माण पर विशेष जोर दिया गया है। चंद्रखुरी, सिरपुर और राजिम जैसे स्थलों को आपस में जोड़कर एक समग्र धार्मिक पर्यटन सर्किट विकसित किया जा रहा है। नई प्रतिमा के स्थापित होने से यहां देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि की उम्मीद है।

विशेषज्ञों का मानना है कि धार्मिक पर्यटन स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी सशक्त करता है। होटल, परिवहन, हस्तशिल्प और स्थानीय व्यवसायों को इससे सीधा लाभ मिलता है। चंद्रखुरी में यह प्रतिमा स्थापित होने के बाद यह स्थल न केवल आस्था का केंद्र रहेगा, बल्कि सांस्कृतिक आयोजनों और धार्मिक पर्वों का भी प्रमुख मंच बन सकता है।

कुल मिलाकर, 51 फीट ऊंची वनवासी श्रीराम प्रतिमा छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत, धार्मिक आस्था और पर्यटन विकास की साझा कड़ी बनने जा रही है। यह पहल राज्य को आध्यात्मिक पर्यटन के राष्ट्रीय मानचित्र पर नई पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो सकती है।

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