राजधानी

निजी अस्पतालों की दवा-इंप्लांट के नाम पर वसूली, बिल भी नहीं ताकि सबूत ही न रहे

राजधानी और प्रदेश के निजी अस्पतालों में आयुष्मान भारत योजना के मरीजों से पैकेज के अलावा इलाज खर्च लिया जा रहा है। मरीजों और उनके परिजनों से इलाज खर्च के नाम पर यह वसूली दवा और क्वालिटी इंप्लांट के नाम पर हो रही है। यह खुलासा शहर के 10 निजी अस्पतालों में आयुष्मान श्रेणी में भर्ती हुए मरीजों से पैरेलल इलाज खर्च की वसूली की शिकायतों की पड़ताल में हुआ है।

दुर्ग के 29 वर्षीय शुभम का बीते साल एक्सीडेंट हो गया। परिजन ने उन्हें पहले रायपुर के दीवान हॉस्पिटल, फिर ग्लोबल हॉस्पिटल में भर्ती कराया। शुभम की मां … ने बताया कि आयुष्मान से ट्रीटमेंट का रजिस्ट्रेशन कराने के बाद दीवान हॉस्पिटल के संचालकों ने 3 और ग्लोबल हॉस्पिटल प्रबंधन ने 4 लाख रुपए लिए। कई दिनों तक भर्ती रखने के बाद ग्लोबल हॉस्पिटल के डॉक्टरों ने शुभम को मेकाहारा रेफर कर दिया। जहां इसी साल 22 मई को शुभम की मौत हो गई। वह कहती हैं कि निजी अस्पतालों का बिल चुकाने में जमीन, जेवर और गाड़ी बिक गई। निजी अस्पतालों द्वारा इलाज खर्च के नाम पर अतिरिक्त वसूली की शिकायत कलेक्टर को की है। 

दुर्ग के 65 वर्षीय लल्लन साहू को पेट दर्द की शिकायत हुई। बेटे दिनेश ने उन्हें दुर्ग के आरोग्यम हॉस्पिटल में भर्ती कराया। यहां लल्लन साहू को आयुष्मान कार्ड से भर्ती कर, सीधे आईसीयू में शिफ्ट कर दिया गया। दिनेश ने बताया कि डॉक्टर्स ने दो दिन में 20 हजार रुपए की दवाएं तो मंगाई लेकिन मरीज को आईसीयू में नहीं दी। इसकी शिकायत करने पर स्वास्थ्य विभाग ने अस्पताल पर 11.41 लाख का जुर्माना लगाया है। आयुष्मान योजना से ट्रीटमेंट कराने वाले मरीज और उनके परिजन ने कई अस्पतालों के खिलाफ शिकायतें की हैं।

स्वास्थ्य संचालनालय स्थित आयुष्मान भारत योजना के हेल्पलाइन नंबर 104 पर निजी अस्पतालों की 100 से अधिक शिकायतें पहुंची हैं। इनमें मरीजों और उनके परिजन ने निजी अस्पताल में डॉक्टर्स द्वारा आयुष्मान कार्ड से रजिस्ट्रेशन के वाबजूद अलग से दवा, उपकरण, इंप्लांट के नाम पर मनमर्जी से वसूली की शिकायतें की हैं।

रायपुर में आयुष्मान कार्ड से ट्रीटमेंट के लिए भर्ती होने वाले मरीजों से निजी अस्पताल संचालक मेडिसिन , इंप्लांट के नाम पर 10 हजार से लेकर 1.5 लाख रुपए तक ले रहे हैं। मरीज और उनके परिजन को उनसे ट्रीटमेंट के लिए दिए गए इस अमाउंट का बिल भी नहीं दिया जा रहा है। ऐसा आयुष्मान योजना के हेल्पलाइन पर शिकायत होने पर कार्रवाई से बचने के लिए निजी अस्पताल कर रहे हैं।

आयुष्मान योजना से ट्रीटमेंट कराने वाले मरीज और उनके परिजन ने कई अस्पतालों के खिलाफ शिकायतें की हैं। इनकी जांच के बाद दोषी अस्पतालों पर कार्रवाई कर रहे हैं।

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