रायगढ़ कार्बन प्लांट हादसा...मासूम बच्ची समेत 3 मौतें:
रायपुर
रायगढ़ मंगल कार्बन प्लांट हादसे ने पूरे परिवार को तोड़कर रख दिया है। महिला ने महज तीन महीने पहले अपनी 3 साल की बेटी को भी खो दिया था। अब हादसे में अपनी दूधमुंही बच्ची और पति को खो दिया।
गरीबी और पेट पालने की मजबूरी में मां-बाप प्लांट में मजदूरी करते थे और छोटी बच्चियों को साथ लेकर जाते थे। हादसे के दिन भी 9 महीने की भूमि को पास में लेटाकर मां उदासिनी खड़िया और पिता शिव खड़िया काम कर रहे थे।
हादसा होने के बाद छोटी बच्ची भी चपेट में आ गई। मंगलवार को इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया। पोस्टमॉर्टम के बाद परिजनों ने उसका अंतिम संस्कार किया ही थी कि देर रात पिता ने भी इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। जबकि 19 साल के युवक की भी इलाज के दौरान मौत हो गई।
परिजनों ने बताया कि तीन महीने पहले 3 साल की बच्ची सृष्टि की भी मौत हो चुकी थी। रिश्तेदारों के अनुसार, मजदूरी के दौरान उदासिनी अपनी दोनों बच्चियों को प्लांट परिसर में ही रखती थी और वहीं काम करती थी।
काम में व्यस्त रहने के कारण बच्ची प्लांट में धूल-मिट्टी खा ली थी, जिससे बच्ची की तबीयत बिगड़ी और खून की उल्टियां होने लगी। लेकिन इलाज के बावजूद उसे बचाया नहीं जा सका।
जिस दिन हादसा हुआ पहले उन्हें खरसिया के निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन हालत गंभीर होने पर रायपुर रेफर किया गया। इस दौरान प्लांट के फर्नेस में आग का तेज प्रेशर बाहर निकला और 8 लोग झुलस गए।
परिजनों का आरोप है कि प्लांट प्रबंधन की ओर से केस वापस लेने और बयान बदलने का दबाव बनाया जा रहा है। उनका कहना है कि प्लांट में टायर जलाकर तेल निकाला जाता था और सेफ्टी के पर्याप्त इंतजाम नहीं थे। अचानक ब्लास्ट होने से यह हादसा हुआ, जिसमें कई मजदूर गंभीर रूप से घायल हो गए। इस प्लांट में पुराने टायर पिघलाकर काला तेल निकाला जाता है, जो रोड बनाने के काम आता है। आरोप है कि फर्नेस को ठंडा किए बिना खोला गया। मजदूरों को सुरक्षा उपकरण उपलब्ध नहीं कराए गए। इसी लापरवाही की वजह से यह भयावह हादसा हुआ।
पीड़ित परिवारों की मांग है कि, मृत बच्ची के परिजनों को तत्काल उचित मुआवजा दिया जाए। सभी घायलों के इलाज का पूरा खर्च प्लांट प्रबंधन से वसूला जाए। FIR वापस लेने के दबाव की निष्पक्ष जांच हो। दोषी प्रबंधन और जिम्मेदार अधिकारियों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई हो।