धरसीवां में उमड़ा जनसैलाब, भव्य हिंदू सम्मेलन में गूंजा सामाजिक एकता का शंखनाद,,
धरसीवां
संत सुरेश्वर दास महाराज और मुख्य वक्ता खेमलाल खूंटे के ओजस्वी उद्बोधन से जागृत हुई सांस्कृतिक चेतना,
चंद्रकांन्त साहू(धरसीवां)। क्षेत्र में सांस्कृतिक पुनरुत्थान और सामाजिक एकजुटता के संकल्प के साथ स्थानीय स्टेडियम में भव्य 'हिन्दू सम्मेलन' का सफल आयोजन संपन्न हुआ। श्रद्धा और उत्साह के संगम वाले इस कार्यक्रम में धरसीवां खंड के हजारों ग्रामीणों ने हिस्सा लेकर संगठन शक्ति का परिचय दिया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य सनातन संस्कारों का संरक्षण और समाज में सकारात्मक चेतना का विस्तार करना रहा।
0 सांस्कृतिक चेतना ही समाज का आधार: संत सुरेश्वर दास
सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित संत सुरेश्वर दास जी महाराज ने अपने आशीर्वचनों से जनसमूह को कृतार्थ किया। उन्होंने कहा, "हिंदू समाज की वास्तविक शक्ति उसके संस्कारों, नैतिकता और अटूट एकता में निहित है। हमें अपनी जड़ों की ओर लौटकर सनातन संस्कृति के गौरव को आत्मसात करना होगा।" उन्होंने सामाजिक समरसता को राष्ट्र की उन्नति का मूल मंत्र बताया।
युवाओं को राष्ट्र निर्माण का आह्वान
मुख्य वक्ता खेमलाल खूंटे ने अपने ओजस्वी संबोधन में वर्तमान चुनौतियों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि समाज को संगठित रहकर ही अपनी पहचान सुरक्षित रखनी होगी। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे केवल दर्शक न बनें, बल्कि राष्ट्र निर्माण और सामाजिक जागरण की प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका निभाएं। विशिष्ट अतिथि प्राचार्य हेमावती चिव्हाने ने शिक्षा और संस्कारों के अंतर्संबंधों पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि शिक्षित समाज ही जागरूक समाज की नींव रखता है, जहाँ नैतिक मूल्यों का होना अनिवार्य है।
ग्रामीण अंचलों की ऐतिहासिक सहभागिता सम्मेलन में चरौदा, धरसीवां, नगरगांव, कुरा, बरतनारा, पंदरभट्ट, मुरा, टाड़ा सहित आसपास के दर्जनों गांवों से ग्रामीण पारंपरिक उत्साह के साथ पहुंचे। भजन और विचार-विमर्श के माध्यम से पूरे वातावरण को भक्तिमय और ऊर्जावान बना दिया गया।
आयोजकों ने बताया कि इस समागम का लक्ष्य हिंदू शक्ति को जागृत करना और संगठनात्मक ढांचे को सुदृढ़ करना था। कार्यक्रम के दौरान क्षेत्र के प्रमुख जनप्रतिनिधि, समाजसेवी और प्रबुद्ध नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। आयोजन की सफलता इस बात में रही कि इतने विशाल जनसमूह के बावजूद पूरा कार्यक्रम पूर्णतः अनुशासित और शांतिपूर्ण रहा। कार्यक्रम के अंत में आयोजन समिति ने आगंतुक अतिथियों और क्षेत्रवासियों का आभार व्यक्त किया।