राजधानी

कुछ भी लिखने सुनाने और दिखाने को अपना मौलिक अधिकार मान लेना बेहद चिंता जनक

आज 3 मई को दुनिया भर में विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस मनाया जा रहा है ये दिन कलम की स्वतंत्रता के मूलभूत सिद्धांतों का पालन करने तथा पत्रकारों की स्वतंत्रता के उद्देश्य के साथ सत्य को उजागर करने की कीमत जिन पत्रकारों ने अपनी जान देकर चुकाई है उनकी स्मृतियो को सम्मानित और नमन करने के लिए मनाया जाता है

कृत्रिम बुद्धिमत्ता के इस दौर में जिस स्वतंत्र निष्पक्ष मीडिया को लोकतंत्र की आधारशिला माना जाता था वो ढांचा अब ढह गया है 

आज  सामान्यतः प्रेस की आजादी का मतलब है जनसंपर्क के विभिन्न माध्यमों समाचार पत्र मीडिया के माध्यम से लोगों को पढ़ने सुनने और देखने के लिए कुछ भी भरोसा जा सकता है 

एक लोकतांत्रिक देश में अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर कुछ भी लिखने सुनने और दिखाने को अपना मौलिक अधिकार समझ लेना बेहद चिंता का विषय है

यही कारण है कि प्रत्येक वर्ष जारी होने वाली प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक 2024 में भारतीय पत्रकारिता का चिंताजनक स्थान दिखाई दिया है भारत विश्व भर के 180 देश में 159 वे स्थान पर है जो पिछली रिपोर्ट से भी नीचे है समझा जा सकता है हमारी स्थिति क्या है और कौन जिम्मेदार है 

मीडिया की स्वतंत्रता और निष्पक्षता से ही लोगों तक वास्तविक जानकारी पहुंचती है और समाज में जागृति के साथ सहिष्णुता और समरसता का भाव पैदा होता है 

इसलिए मीडिया की भी जिम्मेदारी बनती है के गहन खोजबीन करने के बाद वास्तविक स्थिति का पता चलने पर ही कुछ लिखा या दिखाया जाए अन्यथा तकनीक के इस दौर में संभालने का मौका भी नहीं मिलता और किसी के चरित्र का चीर हरण हो जाता है ये एक अलग तरह का उत्पीड़न है

आज इस अवसर पर मुश्किल हालातो में लोकतंत्र के सजक प्रहरी के रूप में भूमिका निभाने वाले समाचार पत्र पत्रिकाएं एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के सभी छाया करो एवं पत्रकार बंधुओ को शुभकामनाएं

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