राजधानी

संविधान दिवस अमर रहे

आधुनिक भारत के महान शिल्पकारों यथा पंडित नेहरू, सरदार पटेल, बाबू राजेंद्र प्रसाद, भीमराव अंबेडकर, मौलाना आज़ाद,  सर बी.एन. राव सहित संविधान समिति के सभी सदस्यों के 2 वर्ष 11 माह,18 दिनों के अथक प्रयासों ने देश को सबसे विस्तृत लिखा हुआ संविधान दिया, जिसे 26 नवंबर 1949 को अंगीकृत किया गया तथा 26 जनवरी 1950 को लागू किया गया। संविधान सभा में मूल रूप से 389 सदस्य थे पर विभाजन के बाद घटकर 299 सदस्य रह गए थे। 284 सदस्यों ने हस्ताक्षर किए थे।

संविधान सभा का गठन 06 दिसंबर 1946 को किया गया था जिसके स्थाई अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद थे और प्रमुख सलाहकार सर बी.एन. राव थे। चूंकि प्रारूप समिति ने संविधान का मसौदा तैयार किया था और इसके अध्यक्ष डॉ. भीमराव अंबेडकर थे इसलिए उन्हें संविधान का जनक कहा जाता है। भारत के संविधान के लिए 60 से अधिक देशों के संविधानों का गहन अध्ययन किया गया था तथा 10 से अधिक देशों के संविधानों से मार्गदर्शन प्राप्त कर भारतीय संविधान तैयार किया गया है। 

मूल संविधान में भगवान् राम, माता सीता और लक्ष्मण जी की तस्वीर है।  भारतीय संविधान में कुल 251 पन्ने हैं। इस खूबसूरत संविधान को श्री प्रेम बिहारी नारायण रायजादा (सक्सेना) ने हिंदी तथा अंग्रेजी में लिपिबद्ध किया था जिसे पूरा करने में उन्हें छह माह का समय लगा। इसके लिए उन्होंने कोई शुल्क नहीं लिया था। उन्होंने जहां इसे लिखा था उसे अब कंस्टीट्यूशन क्लब कहते हैं। इस मूल संविधान प्रति की सजावट को अंतिम रूप शांतिनिकेतन के प्रसिद्ध चित्रकार नंदलाल बोस जी, राममनोहर सिन्हा जी ने दिया था। इसका प्रकाशन देहरादून से किया गया था और सर्वे ऑफ इंडिया द्वारा फोटोलिथोग्राफ किया गया था। संविधान की हिंदी तथा अंग्रेजी में लिपिबद्ध दोनों हस्तलिखित प्रतियां भारतीय संसद की लाइब्रेरी के हीलियम बॉक्स में संरक्षित है, इसकी दूसरी हस्तलिखित प्रति ग्वालियर के सेंट्रल लाइब्रेरी में भी संरक्षित है।

 मूल संविधान में एक प्रस्तावना, 22 भाग, 395 अनुच्छेद, तथा 08 अनुसूचियों का समावेश था, पर वर्तमान में प्रस्तावना, 25 भाग, 448 अनुच्छेद, 12 अनुसूची तथा 130 संशोधन हैं। भारत का संविधान दुनिया के सबसे बड़े संविधानों में से एक है, जिसमें मौलिक अधिकारों से लेकर समानता, शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण जैसे कई मजबूत सिद्धांत शामिल हैं। हमारा संविधान देश के प्रत्येक नागरिक को स्वतंत्रता, समानता और न्याय की गारंटी देता है तथा गरिमामय जीवन का वायदा करता है। यह गरीबों, वंचितों, पिछड़ों, दलितों,आदिवासियों, महिलाओं सहित सभी देशवासियों का सुरक्षा कवच है।

संविधान दिवस केवल एक जश्न मनाने की तारीख मात्र नहीं है, यह उस भरोसे की याद है जो हमारे पूर्वजों ने हम पर किया था। हमारा संविधान सिर्फ दस्तावेज नहीं है बल्कि हमारे पूर्वजों की दूरदृष्टी, त्याग तथा न्याय के सपनों का आधार है। 

आइए, संकल्प लें कि हम हर कीमत पर अपने गर्वित संविधान की रक्षा करेंगे, उसे और सुदृढ़ करेंगे। कृतज्ञ राष्ट्र संविधान निर्माताओं का सदैव ऋणी रहेगा। 
समस्त देशवासियों को संविधान दिवस की अनंत शुभकामनाएं।

जय भारत  , जय संविधान।

       परमजीत  बॉबी सलूजा,
                नया रायपुर, छत्तीसगढ़।

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