छक्कन दास मनहरे के प्रकरण में प्रशासन के छुट रहे पसीने राजस्व मंत्री के जिले में राजस्व का बुरा हाल, राजस्व प्रकरण लंबित 2 से 3 पटवारी हो गए लगातार सीलिंग जमीन पर वार करते हुए
गोविंद राम ब्यूरो चीफ बलौदाबाजार
बलौदाबाजार भाटापारा जिले के भाटापारा विकासखंड में आने वाला ग्राम पंचायत तुरमा जहां के किसान छक्कन दास मनहरे जो लगभग 6 साल से अपनी जमीन के प्रकरण के निराकरण के लिए लगातार तहसील कार्यालय,एसडीएम कार्यालय, भाटापारा थाना,एसपी कार्यालय तथा जिलाधीश तथा राजस्व मंत्री के समक्ष भी बार-बार आवेदन के माध्यम से खड़ा हो रहा है मगर शासन तथा प्रशासन आज तक छक्कन दास मन्हरे के प्रकरण में मुक दर्शक बनी हुई है और लगातार राजस्व के अधिकारियों के ऊपर मेहरबान है जिससे यह साबित होता है कि सब मिली भगत से कार्य संचय होता है क्योंकि छक्कन दास मन्हरे किसान के 2015 सन् में जब वसीयतनामा के आधार पर जमीन उनके नाम पर आदेश हुई थी और उसके बाद पटवारी अयूब खान तथा राधेश्याम बर्मन पटवारी के द्वारा मैन्युअल नक्शे में तथा लिपि त्रुटि तथा ऑनलाइन में भी रिकॉर्ड को काटा गया है
जिससे आज दिनांक तक किसान का जमीन का रिकॉर्ड की दुरुस्ति नहीं हो पाया चाहे वह लूप लाइन में हो या फिर ऑनलाइन में और आज दिनांक तक तहसीलदार एसडीएम कलेक्टर भी अपने पटवारी के ऊपर मेहरबान दिख रहे हैं क्योंकि बलौदाबाजार भाटापारा जिले में लगभग चार से पांच कलेक्टर बदल गए इसी तरह तहसीलदार की भी संख्या 6 से 7 हो गई मगर आज तक किसान के रिकार्ड की दुरुस्ती तथा पटवारी के ऊपर कार्यवाही और यहां तक की छक्कन दास मन्हरे के रिकॉर्ड में चढ़ी हुई जमीन पर आज कब्जा धारी ने भी कब्जा कर अवैध अतिक्रमण भी किया गया है मगर प्रकरण का निराकरण करने में प्रशासन के पसीने छूट गए हैं और अब न जाने किसान कुछ करने पर मजबूर हो जाएंगे ऐसी अवस्था में आ गए हैं क्योंकि लगातार ग्राम तुरमा की खबरें सुर्खियों में बनी हुई है और लगातार तहसीलदार, एसडीएम, कलेक्टर का तबादला बीच-बीच में होते रहा है
मगर कागज का निराकरण अभी तक नहीं हो पाया। लगातार जिलाधीश अपने राजस्व के समीक्षा बैठक में जब पूरे राजस्व विभाग की टीम के साथ मीटिंग में रहते हैं तो लगातार आदेश निर्देश देते रहते हैं मगर जिले में किस तरह का परिपालन यह तो समझ से पड़े हैं क्योंकि राजस्व के प्रकरण का समय अवधि में प्रकरण को पूरा करना रहता है मगर किसान अधिकारी के ऑफिस के चक्कर लगाते लगाते थक जाते हैं चप्पल गिस जाते हैं मगर निराकरण नहीं हो पाया।आखिर वजह क्या है और ग्राम तुरमा के किसान के आवेदन पर क्या बातें हैं जिसमें इतना विलंब हो रहा है आखिर कौन वह पटवारी है जिसने उनका रिकॉर्ड बनाया और किस तरह से रिकॉर्ड दूसरे नाम पर चढ़ा और किस तहसीलदार ने उनके प्रकरण का आदेश किया और अब रिकॉर्ड में चढ़ने के बाद किस तरह से विलोपित होता है या फिर कलम से काटा जाता है यह तो रिकॉर्ड में स्पष्ट नजर आ रहा है मगर अभी तक गलती करने वाले के ऊपर अभी तक कार्रवाई नहीं हुई लिहाजा यह मान सकते हैं कि ठोस कार्यवाही भी नहीं हुई और सिर्फ मामला कागज में पंचनामा रिपोर्ट करके ठंडा बक्से में डाल दिया जाता है अब देखने वाली बात यह होगी कि खबर की प्रकाशन के बाद प्रशासन इस प्रकरण को किस तरह से गंभीरता से संज्ञान में लेकर कार्यवाही करते हैं या फिर मूल नक्शे में जाकर शासन से प्रदत्त जमीन का उस समय के सभी गांव वालों का जमीन रिकॉर्ड से बिलुपित करते हैं।
मैं अभी थोड़ा सा प्रशासनिक कार्य में व्यस्त हूं एक सप्ताह के अंदर विधिवत जांच करके प्रकरण निराकरण करवा देता हूं
यशवंत राज
तहसीलदार भाटापारा